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अमेरिका: बाइडन प्रशासन ने दिया साफ संकेत, साइबर हमलों के लिए रूस ही दोषी

Thu, 14 Oct 2021 06:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Oct 2021 06:10 PM IST
सार

अमेरिका में इस साल दो बड़े साइबर हमले हो चुके हैं। इनमें से एक हमले के जरिए अमेरिका की एक बड़ी गैस और पेट्रोलियम पाइपलाइन के कंप्यूटर सिस्टम को जाम कर दिया गया, जिससे गैस की सप्लाई कई दिनों तक रुकी रही। दूसरे हमले में अमेरिका में मीट (मांस) के एक बड़े सप्लायर के कंप्यूटर नेटवर्क को निष्क्रिय कर दिया गया...

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Joe Biden administration opinion that Russia is the biggest culprit of cyber attacks in US
साइबर अटैक - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

जो बाइडन प्रशासन ने एक बार फिर अपनी इस राय का खुला इजहार किया है कि उसकी राय में साइबर हमलों के लिए सबसे बड़ा दोषी रूस है। अमेरिका ने रैनसमवेयर हमलों का मुकाबला करने के लिए एक वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया है। उसमें भाग लेने के लिए 30 देशों को आमंत्रित किया गया। लेकिन इन देशों में रूस शामिल नहीं है। रैनसमवेयर हमला उन साइबर हमलों को कहा जाता है, जिसके पीछे मकसद फिरौती वसूल करना होता है। ऐसे हमलों में हैकर किसी खास सिस्टम को जाम कर देते हैं और उसे दोबारा चालू करने के बदले बड़ी रकम की मांग करते हैं।

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अमेरिका की पहल पर बुधवार से शुरू हुए इस दो दिन के सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर काम करने वाले साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के उपायों पर विचार हो रहा है। सम्मेलन के बारे में जानकारी बाइडन प्रशासन के एक अधिकारी ने दी। उसने बताया कि रैनसमवेयर हमलों को रोकने के लिए अब अमेरिका अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस काम में वह रूस सरकार पर निर्भर नहीं रहना चाहता। अमेरिका अतीत में आरोप लगाता रहा है कि रूस साइबर अपराधियों के गिरोहों को संरक्षण देता है।
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अमेरिका में इस साल दो बड़े साइबर हमले हो चुके हैं। इनमें से एक हमले के जरिए अमेरिका की एक बड़ी गैस और पेट्रोलियम पाइपलाइन के कंप्यूटर सिस्टम को जाम कर दिया गया, जिससे गैस की सप्लाई कई दिनों तक रुकी रही। दूसरे हमले में अमेरिका में मीट (मांस) के एक बड़े सप्लायर के कंप्यूटर नेटवर्क को निष्क्रिय कर दिया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने इन हमलों के लिए डार्कसाइड और रेविल नाम के हैकर गुटों को जिम्मेदार ठहराया था। एफबीआई का आरोप है कि इन दोनों गुटों का संबंध रूस से है।

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न्यूज वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के मुताबिक बाइडन प्रशासन के एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि साइबर हमलों को लेकर अमेरिका की रूस के साथ भी बातचीत चल रही है। लेकिन ये बातचीत विशेषज्ञों के स्तर पर है। इसकी शुरुआत इस साल के मध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जिनेवा में हुई शिखर वार्ता के बाद हुई थी। उसी शिखर बैठक में इस बारे में दोनों राष्ट्रपतियों के बीच सहमति बनी थी। अधिकारी ने कहा कि रूसी विशेषज्ञों के साथ दो टूक बातचीत हुई है। लेकिन अमेरिका को अभी यह इंतजार है कि रूस अपने यहां क्या कदम उठाता है।

अमेरिका में अभी जो सम्मेलन चल रहा है, उसमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, डॉमिनिकल रिपब्लिक, यूरोपियन यूनियन, नाईजीरिया, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन, यूएई और कुछ अन्य देशों के अधिकारी भाग ले रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने सम्मेलन के एजेंडे या वहां हो रही चर्चा के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार किया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि ये सम्मेलन सिर्फ यह रेखांकित करता है कि रैनसमवेयर हमले कितना खतरनाक रूप ले चुके हैं और उससे विभिन्न देश कितना चिंतित हैं।

बीती जुलाई में राष्ट्रपति बाइडन ने एक राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज पर दस्तखत किए था, जिसके जरिए अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों को साइबर हमलों का मुकाबला करने की क्षमता विकसित करने का आदेश दिया गया। हाल में बाइडन प्रशासन ने क्रिप्टो करेंसी के जरिए फिरौती चुकाने को अवैध घोषित कर दिया। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को इन्हीं कदमों की अगली कड़ी समझा जा रहा है।

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