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अमेरिका में आईटी कंपनियों पर शिकंजा: वेंस बोले- विदेशी कर्मचारी ‘बंधुआ मजदूर’, भारतीय कंपनियों पर क्या असर?

Fri, 09 Oct 2026 08:39 AM IST
राकेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 09 Oct 2026 08:39 AM IST
सार

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई आईटी कंपनियों पर एच-1बी वीजा व्यवस्था के दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन वाले विदेशी पेशेवरों को रखने का आरोप लगाया है। ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो और अन्य कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़ी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया से निलंबित किया है। इसके साथ ही नौ विश्वविद्यालयों की जांच भी शुरू की गई है। इस कार्रवाई से विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, लेकिन इसका मतलब एच-1बी वीजा व्यवस्था का पूरी तरह बंद होना नहीं है।
 

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JD Vance Accuses Microsoft and IT Firms of H1B Visa Abuse
जेडी वेंस, अमेरिकी उपराष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई बड़ी आईटी कंपनियों पर एच-1बी वीजा व्यवस्था का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं। वेंस ने विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए अमेरिका लाए गए कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ तक कहा। उनका आरोप है कि कंपनियां ऐसा करके अपने खर्च कम कर रही हैं और अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन पर दबाव डाल रही हैं।
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वेंस का दावा- विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन मिलता है
जेडी वेंस के मुताबिक, अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी समान पद पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों की तुलना में औसतन 20 हजार डॉलर कम कमाते हैं। उन्होंने दावा किया कि विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए अमेरिका लाए गए कर्मचारियों के मामले में वेतन का यह अंतर 48 हजार डॉलर तक पहुंच जाता है। वेंस का कहना है कि कंपनियां इस व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को रखने के लिए कर रही हैं।
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माइक्रोसॉफ्ट पर क्यों लगे आरोप?
वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट को निशाने पर लेते हुए कहा कि कंपनी ने 2025 में करीब छह हजार अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की। इसके बावजूद कंपनी ने छह हजार से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर कराए। उन्होंने यह भी कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया से जुड़ी 3,682 श्रम प्रमाणन अर्जियां दाखिल कीं। इनमें से करीब एक हजार अर्जियां कथित तौर पर उन पदों से जुड़ी थीं, जिन पर पहले अमेरिकी कर्मचारी काम कर रहे थे। हालांकि, ये आरोप अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए हैं।
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माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियों पर कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट के अलावा कई दूसरी बड़ी आईटी कंपनियों को भी विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड प्रायोजित करने से जुड़ी प्रक्रिया से निलंबित कर दिया है। इनमें कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कैपजेमिनी और एडोबी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों से जुड़ी नई श्रम प्रमाणन अर्जियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा और पहले से लंबित अर्जियों पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। यह कार्रवाई कथित वीजा दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच की गई है।



नौ विश्वविद्यालय भी जांच के दायरे में
अमेरिकी प्रशासन ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत नौ विश्वविद्यालयों की जांच शुरू करने की भी घोषणा की है। प्रशासन को आशंका है कि कुछ संस्थान विदेशी छात्रों को ऐसे कार्यक्रमों के तहत ला रहे हैं, जिनका इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन को कम करने के लिए हो सकता है। अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने बताया कि जांच के सिलसिले में विश्वविद्यालयों को समन जारी किए जा चुके हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कहीं विदेशी प्रभाव, अनुचित वित्तीय संबंध या वीजा नियमों के उल्लंघन से सरकारी मदद से चलने वाले शोध कार्यक्रम प्रभावित तो नहीं हो रहे हैं।

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एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड में क्या अंतर है?
एच-1बी वीजा के जरिए योग्य विदेशी पेशेवर अमेरिका में अस्थायी रूप से नौकरी कर सकते हैं। वहीं, ग्रीन कार्ड मिलने पर उन्हें अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का अधिकार मिलता है। एच-1बी वीजा होने से अपने आप ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता। इसके लिए रोजगार आधारित कई श्रेणियों में कंपनियों को पहले श्रम प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इस प्रक्रिया में नियोक्ता को यह साबित करना पड़ता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त योग्य और इच्छुक अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को रखने से समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कामकाजी परिस्थितियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।

क्या एच-1बी वीजा पर काम करने वालों की नौकरी खत्म हो जाएगी?
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई एच-1बी वीजा व्यवस्था को पूरी तरह बंद करने के बजाय ग्रीन कार्ड के लिए जरूरी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया पर रोक लगाने से जुड़ी है। इसलिए इस कार्रवाई का सीधा मतलब यह नहीं है कि एच-1बी वीजा पर काम कर रहे सभी कर्मचारियों की नौकरी या वीजा खत्म हो जाएगा। हालांकि, जिन कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया इन कंपनियों के जरिए आगे बढ़नी थी, उनके स्थायी निवास पाने का रास्ता प्रभावित हो सकता है। इससे खास तौर पर उन विदेशी पेशेवरों की चिंता बढ़ सकती है, जो लंबे समय तक अमेरिका में काम करने और वहीं बसने की योजना बना रहे हैं।

टीसीएस का एलान:,अमेरिका में 5 साल में 15 हजार लोगों को देगी नौकरी
इस बीच, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने कहा है कि अमेरिका में ग्रीन कार्ड से जुड़े कार्यक्रम पर रोक लगने से उसकी भर्ती रणनीति और ग्राहकों के साथ कामकाज पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। कंपनी की भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को नौकरी देने पर केंद्रित है। इसके लिए मजबूत कैंपस भर्ती मॉडल अपनाया गया है। टीसीएस ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार और लोगों को नौकरी देने की योजना भी दोहराई है।
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