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China Semiconductor Sanctions: चीन पर अमेरिकी प्रतिबंध की कीमत चुकानी होगी जापान-नीदरलैंड की कंपनियों को भी

Tue, 08 Nov 2022 05:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 08 Nov 2022 05:49 PM IST
सार

China Semiconductor Sanctions: अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने अक्तूबर के पहले हफ्ते में चीन के साथ उन्नत सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के मामले में किसी प्रकार के सहयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके तहत चीन को ऐसे किसी सेमीकंडक्टर या चिप के निर्यात पर रोक लगा दी गई है...

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Japan-Netherlands companies will also have to pay the cost of US sanctions on China
China Semiconductor Sanctions - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन पर चिप और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में लगे अमेरिकी प्रतिबंधों की कीमत अब जापानी कंपनियों को चुकानी पड़ सकती है। जापानी कंपनियां इस प्रतिबंध में शामिल होने के लिए उत्सुक नहीं हैं। इन कंपनियों का चीन के साथ लाभदायक कारोबार है। लेकिन अब खबर है कि अमेरिका इस मामले में जापान सरकार पर दबाव बनाने वाला है। वह ऐसा ही दबाव नीदरलैंड पर भी डालने की तैयारी में है।

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फिलहाल, जापान का आर्थिक एवं उद्योग मंत्रालय जापानी कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा है। इस दौरान अमेरिकी प्रतिबंधों का जापान के चिप और सेमीकंडक्टर उद्योग पर संभावित असर का आकलन किया जा रहा है। साथ ही जापान सरकार और यहां की कंपनियां इस बारे में भी विचार-विमर्श कर रही हैं कि मौजूदा माहौल में उनके पास क्या विकल्प हैं।

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जापान में चिंता अमेरिका की वाणिज्य मंत्री गिना रैयमोन्डो का बयान आने के बाद से बढ़ी है। रायमोन्डो ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘मेरी समझ में यह आप देखेंगे कि जापान और नीदलैंड्स हमारी बात मानेंगे।’ रायमोन्डो ने इस बारे में ज्यादा ब्योरा नहीं दिया। लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला कि चीन पर प्रतिबंध लगाने की मुहिम में अमेरिका किन दो देशों को शामिल करने को अब प्राथमिकता दे रहा है।

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रायमोन्डो के बयान के बारे में पूछे जाने पर जापान के आर्थिक एवं उद्योग मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा- ‘हम अमेरिका के साथ रोजाना के स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान करते रहते हैं।’ क्या अमेरिका ने इस बारे मे जापान से संपर्क किया है, इस सवाल पर अधिकारी ने कहा- ‘यह विचारों के कूटनीतिक आदान-प्रदान का विषय है, इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता।’ बीते शुक्रवार को इस बार में जापान के सूचना तकनीक मंत्री यासुतोशी निखिमुरा से भी पूछा गया था। तब उन्होंने सिर्फ इतना कहा था- हम उचित कदम उठाएंगे।

अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने अक्तूबर के पहले हफ्ते में चीन के साथ उन्नत सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के मामले में किसी प्रकार के सहयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके तहत चीन को ऐसे किसी सेमीकंडक्टर या चिप के निर्यात पर रोक लगा दी गई है, जिसमें अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल हुआ हो।

चिप में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर के निर्माण में अमेरिकी कंपनियों का वर्चस्व है। साथ ही चिप डिजाइन में भी वे सबसे आगे हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान की की कंपनियां ऐसे सेमीकंडक्टर बनाती हैं, जिनमें अमेरिकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। ये कंपनियां अब प्रतिबंध के दायरे में आ गई हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक अब अमेरिका की निगाह जापान और नीदरलैंड्स की कंपनियों पर टिकी है। इसका कारण यह है कि इन कंपनियों की महारत ऐसे सेमीकंडक्टर का उत्पादन है, जो अमेरिकी प्रतिबंध से बाहर रहे हैं। दोनों देशों में ऐसी कंपनियां हैं, जो अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं हैं। इन कंपनियों का दुनिया के चिप बाजार में बड़ा दखल है। समझा जाता है कि अगर ये कंपनियां प्रतिबंध में शामिल नहीं हुईं, तो चीन को उन्नत तकनीक से वंचित करने की अमेरिकी योजना नाकाम हो जाएगी।

अमेरिका के सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जिमी गुडरिच ने बीते शुक्रवार को वाशिंगटन इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन की एक बैठक में कहा था- ‘यह सचमुच बड़ी निराशा की बात है कि सहयोगी देशों की कंपनियां प्रतिबंध में हमारे साथ नहीं आई हैं।’ समझा जाता है कि अमेरिका में बनी ऐसी धारणा के बाद ही बाइडेन प्रशासन ने जापान और नीदरलैंड्स की कंपनियों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

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