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Hindi News ›   World ›   Japan: a six year old girl Mao Takeshita Taking responsibility to carry on 370 year old tradition of Kubuki theatrical Art

जापान में छह साल की बच्ची पर 370 वर्ष पुरानी परंपरा निभाने की जिम्मेदारी

Thu, 16 Apr 2020 06:49 AM IST
योगेश साहू न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, शितारा।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, शितारा। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 16 Apr 2020 06:49 AM IST
सार

  • कुबुकी नाट्यकला स्कूल की पहली कक्षा में इकलौती विद्यार्थी बची माओ।
  • इस कला को सिखाने वाले स्कूल की कई कक्षाएं खाली।

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Japan:  a six year old girl Mao Takeshita Taking responsibility to carry on 370 year old tradition of Kubuki theatrical Art
जापान: नाट्यकला की प्रस्तुति के लिए तैयार होती माओ ताकेशिता।

विस्तार

जापान की 370 साल पुरानी ग्रामीण नाट्यकला कुबुकी का भविष्य छह साल की माओ ताकेशिता के कंधे पर है। शितारा शहर के गांव दामिन में कुबुकी का आयोजन उन्हीं पर निर्भर है। माओ भारी-भरकम पारंपरिक किमोनो परिधान पहन परंपरा को निभाती हैं।

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उनके सामने सैकड़ों जापानी ग्रामीण जनसमुदाय तातामी चटाई (चावल के फूस की बनी) पर बैठता है। माओ मंच पर अकेली आगे बढ़ती हैं, नृत्य करती हैं और पुरानी गुनगुनाती शैली में परिचय देती हैं। अगले वर्ष वह दामिन गांव के कुबुकी स्कूल की पहली कक्षा में नाट्यकला सीखने वाली अकेली विद्यार्थी होंगी।
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यहां बच्चे प्रशिक्षण लेकर ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक शैली में बांस व फूस से बनाए मंच पर करते हैं। यह प्रदर्शन क्षेत्रीय बौद्ध संस्कृति की क्षमा की देवी ‘कनोन’ के सम्मान में होता है। इस दौरान कोरस गान होता है, बेंजो जैसे वाद्य यंत्र सामिसेन बजाए जाते हैं।
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ये सब लोगों को एक ऐसी पारंपरिक दुनिया में ले जाते हैं, जो धीरे-धीरे खत्म हो रही है। कुबुकी स्कूल में 100 वर्षों के कला साधकों के प्रदर्शन की तस्वीरें लगाई गई हैं। कालांतर में ली गईं तस्वीरों में उनके पारंपरिक परिधान किमोनो का पाश्चात्य शैली में बदलना भी देखा जा सकता है।

शिक्षक भी नहीं रहे, वीडियो से सिखाना होगा  

Japan:  a six year old girl Mao Takeshita Taking responsibility to carry on 370 year old tradition of Kubuki theatrical Art
जापान: कुबुकी नाट्यकला की प्रस्तुति देते बच्चे।

बच्चों को कुबुकी सिखाने की जिम्मेदारी गांव में 82 साल की शिक्षिका इचिकावा पर है। वह मानती हैं कि दामिन का कुबुकी आयोजन क्षेत्र में सबसे प्राचीन है, लेकिन वे नहीं जानतीं कि इसे कब तक बचाए रख सकेंगे। इसे सिखाने के लिए अब शिक्षक भी नहीं बचे। वे कहते हैं कि उनके जाने के बाद शायद पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिये ही बच्चों को सिखाने का रास्ता बचेगा।

किसी तरह यह कला बचा रहे ग्रामीण
दामिन के लोग ही कुबुकी स्कूल को बचाए हुए हैं, आसपास के गांवों में बच्चों के अभाव में बंद हो चुके हैं। इसकी वजह जापान की बढ़ती बुजुर्ग आबादी व शहरों की ओर पलायन है। ग्रामीण मानते हैं, यह स्कूल बंद हुआ तो गांव की आत्मा ही मर जाएगी।

वे सुकून तलाशने गांव आए थे, उनके बच्चे शहरों में रोजगार तलाश रहे

ताकिको ताकेशिता 30 वर्ष की थी जब अपनी जुड़वां बेटियों को अच्छा वातावरण देने दामिन गांव आई थी। गांव में बेटियों ने शानदार बचपन गुजारा, ताकेशिता को भी पास के चाय बागान में काम मिला। आज बड़ी होकर यही बेटियां बाकी बच्चों की तरह काम के लिए शहर लौट गईं। एक बेटी नर्स है और दूसरी पुलिस अधिकारी। पूरे शितारा शहर में काम की कमी है, यहां केवल वृद्धजनों की देखभाल के काम बढ़ रहे हैं।

शोगन के समय शुरू हुई थी परंपरा
जापान पर 12वीं से 17वीं शताब्दी में करीब 700 वर्ष शोगुन सैन्य तानाशाहों का नियंत्रण रहा। 370 वर्ष पूर्व दामिन की यह नाट्यकला अस्तित्व में आई। दामिन के लोगों के बीच प्रसिद्ध किंवदंती है कि कुबुकी आयोजनों की शुरुआत एक चमत्कार से हुई। दामिन के लोगों को कानन देवी ने बड़े संकट से बचाया था। बदले में हर वर्ष कुबुकी पर्व मनाने का वचन लिया था। द्वितीय विश्व युद्ध में भी यह आयोजन होता रहा।
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