Italy Foreign Minors Adoption: 'सुप्रीम आदेश' से 40 साल बाद बड़ा सुधार, अब विदेशी बच्चे गोद ले सकेंगे अविवाहित
Italy Foreign Minors Adoption:इटली की संविधानिक अदालत ने फैसला सुनाया कि अब अविवाहित लोग विदेशी नाबालिगों को गोद ले सकते हैं, जिससे 40 साल पुरानी पाबंदी खत्म हो गई। अदालत ने 1983 के कानून को असंविधानिक करार दिया, जिसमें केवल शादीशुदा जोड़ों को ही गोद लेने की अनुमति थी।
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इटली की संविधानिक अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया कि अब अविवाहित लोग विदेशी नाबालिगों को गोद ले सकते हैं। इसके साथ ही चालीस साल पुरानी पाबंदी समाप्त हो गई है। इस फैसले के बाद भविष्य में इटली में अकेले रह रहे लोग अपने देश के भीतर भी बच्चों को गोद ले सकेंगे।
अदालत ने 1983 के उस कानून को असंविधानिक करार दिया, जिसमें केवल शादीशुदा जोड़ों को ही विदेशी नाबालिगों को गोद लेने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि अविवाहितों को गोद लेने से रोकने से बच्चों का एक स्थिर और सामंजस्य वाले पारिवारिक माहौल में बढ़ने का अधिकार प्रभावित हो सकता था।
शीर्ष अदालत का यह फैसला उन लोगों की चिंताओं को संबोधित करता है, जो गोद लेने के अधिकार का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि इटली में पिछले कुछ वर्षों में विदेश से गोद लेने की संख्या घटी है, क्योंकि विदेश में गोद लेने की प्रक्रिया जटिल और महंगी हो गई है। इटली के अंतरराष्ट्रीय गोद लेने संबंधी आयोग के मुताबिक, 2024 के पहले छह महीनों में विदेश से गोद लेने में 5.6 फीसदी की गिरावट आई, जो 2023 और 2022 के पहले छह महीनों की तुलना में 14.3 फीसदी कम है।
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प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली इटली की दक्षिणपंथी सरकार ने अदालत में अविवाहितों के गोद लेने के अधिकार का विरोध किया था। विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत के शुक्रवार के फैसलों को ऐतिहासिक मोड़ बताया। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एलेसेंड्रो जान ने कहा, यह फैसला बच्चों के अधिकारों और हर व्यक्ति की खुद की आजादी को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा अब इटली की संसद में मौजूदा कानून में बदलाव करने और हर वैचारिक बाधा को हटाने की जरूरत है।
यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया ह। अक्तूबर में मेलोनी सरकार ने नई कानूनी व्यवस्था को मंजूरी दी थी, जो इटली के नागरिकों को विदेश में सरोगेसी के जरिए बच्चों को जन्म देने पर सजा का प्रावधन करती है। विपक्षी दलों ने इसे मध्यकालीन और समलैंगिक जोड़ों के प्रति भेदभावपूर्ण करार दिया था।
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