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पाकिस्तान: क्या सेना और न्यायपालिका के बीच पिस जाएगी इमरान सरकार?

Wed, 01 Dec 2021 06:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 01 Dec 2021 06:59 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान की सेना कारोबारी गतिविधियों में भी शामिल रही है। अब इस पर न्यायिक शिकंजा कस रहा है। लेकिन न्यायिक आदेश का पालन सरकार सचमुच करा पाएगी, इसको लेकर संदेह का आलम है...

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It is tough for Pakistan PM Imran Khan to implemented Pak Supreme court oreder on Pakistan Army
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में सर्वोच्च न्यायापालिका सेना को चुनौती देने के मूड में है और इससे इमरान खान सरकार की मुसीबत बढ़ रही है। पाकिस्तान के सत्ता ढांचे पर सेना की मजबूत पकड़ को देखते हुए सेना के खिलाफ जाने वाले न्यायिक आदेश को लागू कर पाना सरकार के लिए मुश्किल साबित होता है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ताजा मामला इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के लिए एक कड़ा इम्तिहान बनता दिख रहा है।

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कैंटोनमेंट की जमीन वापस करे सेना

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कैंटोनमेंट की जिस जमीन का व्यापारिक मकसद से इस्तेमाल हो रहा है, वह जमीन सरकार को लौटा दी जाए। कोर्ट ने कहा कि इस जमीन का कारोबारी इस्तेमाल कानून और संविधान की कई धाराओं का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच सेना की जमीन के व्यापारिक इस्तेमाल संबंधी मामले की सुनवाई कर रही है।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पाकिस्तान के रक्षा सचिव मियां मोहम्मद हिलाल हुसैन की तरफ से पेश रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि सेना की जमीन पर जो इमारतें गैर कानूनी ढंग से बनाई गई थीं, उन्हें गिरा दिया गया है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि ये सच्चाई नहीं है। वे इमारतें अभी भी वहां मौजूद हैं। कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को आदेश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपे, जिसमें बताया जाए कि कैंटोनमेंट की जमीन के हर टुकड़े का उद्देश्य क्या है।
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पिछले हफ्ते इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस गुलजार अहमद ने कहा था कि रक्षा संस्थानों ने रणनीतिक महत्त्व की जमीन पर मुनाफा कमाने के कारोबार शुरू कर दिए हैं। वहां सिनेमाघर और बैक्वेट हॉल खोले जा रहे हैं। कॉमर्शियल प्लाजा भी बनाए जा रहे हैं। तब कोर्ट ने रक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया था। मंगलवार को कोर्ट में आए रक्षा सचिव ने बताया कि सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख सेना की भूमि का कारोबारी इस्तेमाल रोकने पर सहमत हो गए हैं।

अदालत को दिखाएंगे फोटो

लेकिन जज इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी जमीन का इस्तेमाल रक्षा संबंधी उद्देश्य से नहीं हो रहा है, तो वह जमीन सरकार को लौटा देनी जानी चाहिए। कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए रक्षा सचिव ने आश्वासन दिया कि वे निजी रूप से संबंधित जगहों पर जाएंगे और वहां के फोटो खींच कर ले आएंगे। अगली सुनवाई के दिन वे वो फोटो कोर्ट को दिखाएंगे।

इसके पहले रक्षा सचिव ने दलील दी कि सेना की जमीन का कारोबारी इस्तेमाल भी रणनीतिक रूप से रक्षा कार्य के दायरे में आता है। उस जमीन पर व्यापारिक गतिविधियों से सेना के कल्याण में मदद मिलती है। इससे सेना का मनोबल बढ़ता है। लेकिन चीफ जस्टिस अहमद ने इस दलील को ठुकरा दिया। उन्होंने पूछा कि जब जमीन कैंटोनमेंट बनाने के लिए दी गई थी, तो आखिर वह कैंटोनमेंट कहां है? उन्होंने कहा कि अगर जमीन के व्यापारिक इस्तेमाल को रणनीतिक बताया जा रहा है, तो फिर सरकार को यह बताना चाहिए कि रक्षा का उद्देश्य क्या होता है।



पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान की सेना कारोबारी गतिविधियों में भी शामिल रही है। अब इस पर न्यायिक शिकंजा कस रहा है। लेकिन न्यायिक आदेश का पालन सरकार सचमुच करा पाएगी, इसको लेकर संदेह का आलम है।

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