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इस्तांबुल की बड़ी उड़ान: दुनिया का सबसे कनेक्टेड एयरपोर्ट बना, किसे पछाड़कर हासिल किया पहला स्थान?
Thu, 08 Oct 2026 01:56 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:56 PM IST
सार
तुर्की का आईजीए इस्तांबुल एयरपोर्ट दुनिया का सबसे कनेक्टेड एयरपोर्ट बन गया है। ओएजी मेगाहब्स 2026 इंडेक्स में उसने लंदन हीथ्रो को पीछे छोड़ा। करीब 350 गंतव्यों से जुड़ा यह एयरपोर्ट 9 रनवे और 200 मिलियन यात्रियों की सालाना क्षमता के लक्ष्य के साथ वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।
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इस्तांबुल एयरपोर्ट क्यों खास?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
यूरोप और एशिया के बीच सदियों से व्यापार और आवागमन के प्रमुख केंद्र रहे इस्तांबुल ने अब विमानन की दुनिया में भी बड़ी छलांग लगाई है। तुर्की का आईजीए इस्तांबुल एयरपोर्ट दुनिया का सबसे बेहतर कनेक्टेड एयरपोर्ट बन गया है। वैश्विक विमानन डेटा प्रदाता ओएजी के मेगाहब्स 2026 इंडेक्स में इस्तांबुल ने लंदन के हीथ्रो को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया है। एम्स्टर्डम शिफोल तीसरे, कुआलालंपुर चौथे और शिकागो ओ'हारे पांचवें स्थान पर रहे।
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सीएनएन ट्रैवल की रिपोर्ट के अनुसार, ओएजी की रैंकिंग एयरपोर्ट से उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय उड़ानों, उनके बीच कनेक्शन और वहां से पहुंचने वाले गंतव्यों की संख्या के आधार पर तैयार की गई है। इसके लिए 2 अगस्त के उड़ान आंकड़ों को आधार बनाया गया। इस्तांबुल एयरपोर्ट फिलहाल दुनिया के करीब 350 गंतव्यों से जुड़ा है और इसमें आगे विस्तार की बड़ी गुंजाइश है।
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मैनहट्टन से बड़ा एयरपोर्ट परिसर
करीब 12 अरब डॉलर की लागत से बना इस्तांबुल एयरपोर्ट 2018 में शुरू हुआ था। शहर के यूरोपीय हिस्से में करीब 20 मील दूर स्थित इसका पूरा परिसर 76.5 मिलियन वर्ग मीटर में फैला है। यानी इसका क्षेत्रफल न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से भी बड़ा है। इसका मुख्य टर्मिनल करीब 1.4 मिलियन वर्ग मीटर में फैला है।यहां हर साल 84 मिलियन से अधिक यात्री आते-जाते हैं। हालांकि एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता को अंतिम सीमा नहीं माना जा रहा। दीर्घकालिक योजना के तहत इसकी क्षमता बढ़ाकर सालाना 200 मिलियन यात्रियों तक ले जाने का लक्ष्य है।ओएजी के मुख्य विश्लेषक जॉन ग्रांट के मुताबिक, इस्तांबुल की स्थिति आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकती है। पर्याप्त रनवे क्षमता, तेजी से बढ़ती तुर्की एयरलाइंस और मध्य एशिया जैसे उभरते बाजारों से इसकी नजदीकी इसे बड़ा फायदा देती है।
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9 रनवे का लक्ष्य
इस्तांबुल एयरपोर्ट ने हाल ही में अपना चौथा मुख्य रनवे शुरू किया है। 2,820 मीटर लंबा यह रनवे पूर्व-पश्चिम दिशा में है। इससे पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों में टैक्सीिंग और उड़ान संबंधी समय कम होने के साथ ईंधन की बचत हो सकती है।एयरपोर्ट की अंतिम योजना 9 रनवे की है। इनमें 6 मुख्य और 3 रिजर्व रनवे होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक इस्तांबुल एयरपोर्ट दुनिया के उन चुनिंदा हवाई अड्डों में है, जिन्हें एक साथ 3 रनवे संचालन के लिए लाइसेंस मिला है। इससे व्यस्त समय में अधिक उड़ानें संचालित करने और समय की पाबंदी सुधारने में मदद मिलती है।
तुर्की एयरलाइंस बनी बड़ी ताकत
इस्तांबुल एयरपोर्ट की सफलता के पीछे तुर्की एयरलाइंस की भूमिका अहम है। एयरपोर्ट से संचालित उड़ानों में करीब 80% हिस्सेदारी इसी एयरलाइन की है। 2026 में तुर्की एयरलाइंस करीब 130 देशों तक उड़ान भर रही है और उसके बेड़े में 500 से अधिक बोइंग और एयरबस विमान हैं।
आधुनिक विमानों की ईंधन दक्षता बेहतर होती है। ऐसे समय में जब विमान ईंधन की कीमतें एयरलाइंस की लागत बढ़ाती हैं, नया बेड़ा तुर्की एयरलाइंस को परिचालन लागत और किराये के स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देता है।
हीथ्रो और शिफोल की सीमाओं का फायदा
इस्तांबुल एयरपोर्ट को यूरोप के दूसरे बड़े हवाई अड्डों की सीमाओं का भी फायदा मिल रहा है। लंदन हीथ्रो में तीसरे रनवे की योजना लंबे समय से पर्यावरणीय और स्थानीय विरोध का सामना कर रही है। वहीं एम्स्टर्डम शिफोल पर सालाना उड़ानों की संख्या को लेकर सीमा है।इसके मुकाबले इस्तांबुल एयरपोर्ट शहर के बाहरी हिस्से में होने के कारण 24 घंटे संचालन की सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है। विशाल जमीन और विस्तार की गुंजाइश इसे प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त देती है।
संकट के बीच भी बढ़ी कनेक्टिविटी
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्यपूर्व के तनाव का भी वैश्विक हवाई यातायात पर असर पड़ा है। क्षेत्र के कुछ एयरपोर्टों को उड़ानों में कमी का सामना करना पड़ा, जबकि इस्तांबुल की भौगोलिक स्थिति और तुर्की के अंतरराष्ट्रीय संबंधों ने उसे अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रखा।तुर्की एयरलाइंस का स्टॉपओवर कार्यक्रम भी इस्तांबुल की कनेक्टिविटी को पर्यटन से जोड़ता है। लंबे ट्रांजिट वाले यात्री यहां रुककर शहर घूम सकते हैं और साझेदार होटलों में ठहरने की सुविधा भी पा सकते हैं।
चीन से बढ़ सकती है चुनौती
ओएजी के विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 3-4 वर्षों में चीन के एयरपोर्टों की स्थिति तेजी से मजबूत हो सकती है। चीनी एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय विस्तार बढ़ रहा है, जिससे उसके बड़े विमानन केंद्र वैश्विक कनेक्टिविटी की दौड़ में आगे आ सकते हैं।फिलहाल इस्तांबुल के पास बढ़त बनाए रखने के लिए रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, तेजी से विस्तार करती राष्ट्रीय एयरलाइन और विशाल एयरपोर्ट बुनियादी ढांचा तीनों मौजूद हैं। यही वजह है कि इस्तांबुल एयरपोर्ट यूरोप, एशिया और मध्यपूर्व को जोड़ने वाला प्रमुख वैश्विक विमानन केंद्र बनता जा रहा है।