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Defence: भारत को जल्द मिलेंगी 40 हजार लाइट मशीन गन, पहली खेप की आपूर्ति की तैयारी कर रही इस्राइली रक्षा कंपनी

Sat, 06 Dec 2025 03:47 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरू Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 06 Dec 2025 03:47 PM IST
सार

Defence: इस्राइल की प्रमुख रक्षा कंपनी से भारत को अगले साल की शुरुआत में 40 हजार लाइट मशीन गन मिल सकती हैं। कंपनी पहली खेप की आपूर्ति करने पर विचार कर रही है। साथ ही, कंपनी लगभग 1,70,000 आधुनिक कार्बाइन देने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर के अंतिम चरण में है।

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Israeli defence firm says it plans to supply first batch of LMGs to India early next year
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एक्स/@IWIUS

विस्तार

इस्राइल की एक प्रमुख रक्षा कंपनी ने कहा कि वह अगले साल की शुरुआत से भारत को 40 हजार लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप देना शुरू करेगी। इसके साथ ही कंपनी करीब एक लाख 70 हजार आधुनिक कार्बाइन देने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के अंतिम चरण में है।  
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इस्राइल वेपन इंडस्ट्रीज (आईडब्ल्यूआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शुकी श्वार्ट्ज ने कहा कि उनकी कंपनी भारतीय गृह मंत्रालय की कई एजेंसियों के साथ मिलकर पिस्तौल, राइफल और मशीन गन जैसे हथियारों की भारत में बिक्री पर काम कर रही है। 
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श्वार्ट्ज ने पीटीआई के साथ इंटरव्यू में कहा, हम अभी तीन बड़े कार्यक्रमों में शामिल हैं। पहला 40 हजार लाइट मशीन गन का अनुबंध है, जिस पर पिछले साल हस्ताक्षर हुए थे। हमने सभी परीक्षण और सरकारी जांच पूरी कर ली है और हमें उत्पादन का लाइसेंस मिल गया है। हम साल की शुरुआत में पहली खेप देने की तैयारी में हैं। 

उन्होंने कहा कि एलएमजी की आपूर्ति पांच वर्षों तक चलेगी। उन्होंने कहा कि वह इससे जल्दी भी आपूर्ति कर सकते हैं, लेकिन पहली खेप साल की शुरुआत में दी जाएगी। श्वार्ट्ज ने कहा कि दूसरा कार्यक्रम सीक्यूबी (क्लोज क्वार्टर्स बैटल) कार्बाइन का टेंडर है। इसमें उनकी कंपनी ने दूसरी सबसे बड़ी बोली लगाई थी, जबकि 'भारत फोर्ज' मुख्य बोली लगाने वाली कंपनी है। उन्होंने कहा, हम इस अनुबंध के 40 फीसदी हिस्से की आपूर्ति करना चाहते हैं। हम अनुबंध पर हस्ताक्षर से ठीक पहले के चरण में हैं और मुझे लगता है कि यह इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में पूरा हो जाएगा। 


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सीक्यूबी कार्बाइन की 60 फीसदी आपूर्ति भारत फोर्ज द्वारा की जाएगी, जबकि बाकी 40 फीसदी (1,70,000 यूनिट) अदाणी ग्रुप की कंपनी पीएलआर सिस्टम्स द्वारा दी जाएगी। आर्बेल तकनीक के बारे में श्वार्ट्ज ने बताया कि यह एक कंप्यूटरीकृत हथियार प्रणाली है, जिसमें एक जटिल एल्गोरिदम यह पता करता है कि कब कोई सैनिक सही निशाने पर है और फिर बहुत तेजी और सटीकता से फायर करता है। उन्होंने कहा कि भारत को इस तकनीक के साथ जोड़ने पर शुरुआती बातचीत चल रही है।

उन्होंने कहा, हम अलग‑अलग एजेंसियों से आर्बेल तकनीक को अपनाने को लेकर शुरुआती चर्चा में हैं। एक बार वे इसे लेने का फैसला कर लें, तो हम इसकी इस्राइल और भारत में संयुक्त रूप से बनाकर आपूर्ति करेंगे। उन्होंने बताया कि भारत में इस सह-उत्पादन की जिम्मेदारी पीएलआर सिस्टम्स संभालेगी।

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