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इस्राइल के राजनीति समीकरण: सरकार गठन पर असमंजस बरकरार, राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा- आंकड़ों से स्थिति स्पष्ट नहीं

Fri, 06 Nov 2026 02:57 AM IST
ज्योति भास्कर पीटीआई, तेल अवीव।
पीटीआई, तेल अवीव। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 06 Nov 2026 02:57 AM IST
सार

इस्राइली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने कहा है कि परामर्श के बाद भी स्पष्ट नहीं है कि कौन सरकार बना पाएगा। नेतन्याहू और आइजेनकोट को समर्थन मिले हैं, लेकिन गुटों के बीच गतिरोध है। ऐसे में फिलहाल किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है।

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Israel New Govt formation President Herzog Unsure Netanyahu v Eisenkot Likud vs Arab parties Who has majority
इस्राइल में त्रिशंकु संसद, जनादेश के बाद नई सरकार के लिए गठबंधन पर नजरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इस्राइली राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने गुरुवार शाम को कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि इस्राइल में कौन सरकार बना पाएगा। नेसेट (इस्राइली संसद) के लिए चुने गए दलों के नेताओं के साथ दो दिन के परामर्श के बाद उन्होंने यह बात कही। राष्ट्रपति हर्जोग ने बताया कि उन्होंने सभी गुटों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनसे गहन चर्चा की। उन्होंने पार्टियों से नए रास्ते तलाशने का आग्रह किया।

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हर्जोग ने कहा कि 67 नेसेट सदस्यों वाले गुटों ने यशर! पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने की सिफारिश की। वहीं, 46 नेसेट सदस्यों वाले गुटों ने प्रधानमंत्री और लिकुड पार्टी के नेता बेंजामिन नेतन्याहू को सरकार बनाने की सिफारिश की। हालांकि, राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सिफारिशों के परिणाम स्पष्ट दिख सकते हैं, लेकिन कानून के तहत उनकी जिम्मेदारी यह तय करना है कि सरकार बनाने की क्षमता किसके पास है। गुटों के बीच और उनके भीतर आपसी वीटो के कारण यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वह रविवार को नेसेट के एक सदस्य को सरकार बनाने का काम सौंपेंगे।
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यह बयान आश्चर्यजनक है, क्योंकि परंपरा के अनुसार सबसे अधिक सिफारिशें पाने वाले सदस्य को ही आमतौर पर राष्ट्रपति द्वारा सरकार बनाने का काम सौंपा जाता है। हर्जोग ने जोर दिया कि वह कुछ पार्टी नेताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत करेंगे। इन वार्ताओं में उनका लक्ष्य इस्राइल के लोगों के लिए एक स्थिर और अच्छी सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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चुनाव परिणाम और गुटों की स्थिति क्या है?

अक्तूबर 27 को हुए चुनावों में 120 सदस्यीय सदन में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गुट ने 53 सीटें जीती थीं। नेतन्याहू विरोधी गुट, जिसे 'परिवर्तन गुट' भी कहा गया, को 48 सीटें मिलीं। शेष 19 सीटें अरब दलों के खाते में गईं, जिससे खंडित जनादेश सामने आया। नेतन्याहू गुट की यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म पार्टी ने उन्हें सिफारिश नहीं दी, जिससे प्रधानमंत्री के लिए सिफारिशों की संख्या 46 हो गई। अरब दलों ने अनिच्छा से आइजेनकोट की सिफारिश की, जिसका उद्देश्य नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करना था।

अरब दलों के साथ गठबंधन में क्या बाधा है?

दोनों गुटों ने अरब दलों के साथ गठबंधन करने से सामान्य तौर पर परहेज किया है। दोनों गुटों की अधिकांश पार्टियों ने, डेमोक्रेट्स को छोड़कर, अरब दलों के साथ सरकार में बैठने से मना किया है। अरब दलों को सत्तारूढ़ गठबंधन में लाने में मुख्य बाधा हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने की उनकी अनिच्छा है। 7 अक्तूबर, 2023 के घातक हमलों के बाद यह बात अधिकांश यहूदी आबादी को अस्वीकार्य है। यह गतिरोध इस्राइल की राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।

हमास पर अरब दलों का क्या रुख है?

रा'आम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने आइजेनकोट की सिफारिश करने के बाद दो-राज्य समाधान का समर्थन दोहराया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना का भी समर्थन किया। इसमें "हमास और सभी सैन्य या सशस्त्र संगठनों को निहत्था करने" का आह्वान शामिल था। हालांकि, मंसूर अब्बास हमास को आतंकवादी संगठन कहने से पीछे हट गए। उनकी इस स्थिति ने गठबंधन की संभावनाओं को और जटिल बना दिया है।

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