चुनाव नतीजे से पहले गरजे गादी: 'नेतन्याहू पर भरोसा नहीं, हटाना ही होगा'; PM पर बरसे पूर्व इस्राइली सेना प्रमुख
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी सहायता बंद होने के फैसले पर विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए हैं। याशर दल के अध्यक्ष, पूर्व सेना प्रमुख और इस चुनाव में नेतन्याहू को सीधी चुनौती दे रहे गादी आइजेनकोट ने भरोसा खत्म होने की बात कही है। डेमोक्रेटिक दल के अध्यक्ष याइर गोलान ने नेतन्याहू के आचरण को खतरनाक बताते हुए उन्हें बदलने की मांग की है।
विस्तार
अमेरिकी सहायता रुकने पर नेतन्याहू घिरे, विपक्षी ने बदलने की मांग की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्राइल को वित्तीय सहायता समाप्त करने के कथित फैसले पर इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चौतरफा घिर गए हैं। एंटी-नेतन्याहू गुट के याशर दल के अध्यक्ष गादी आइजेनकोट ने मंगलवार को नेतन्याहू के आचरण को खतरनाक बताया। उन्होंने नेतन्याहू को बदलने की मांग की। इस घटनाक्रम ने इस्राइल की राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देश के पूर्व सेना प्रमुख आइजेनकोट ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ इस्राइल का विशेष संबंध उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का एक प्रमुख घटक है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के सुरक्षा प्रतिष्ठान और नागरिकों को रणनीतिक संबंध में बदलाव के बारे में मीडिया से क्यों पता चल रहा है। आइजेनकोट ने कहा, "हम अब उन पर भरोसा नहीं कर सकते और उनकी जगह किसी और नेता को चुनना ही होगा।"
उन्होंने नेतन्याहू पर इस घटनाक्रम को लेकर इस्राइली जनता के प्रति पारदर्शी न होने का भी आरोप लगाया। आइजेनकोट ने कहा कि नेतन्याहू इस्राइली नागरिकों की आंखों में आंखें डालकर सच बताने में असमर्थ हैं। उन्होंने मांग की कि नेतन्याहू आज रात इस्राइली नागरिकों को जवाब दें। ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार के बाद आईं। ट्रंप ने घोषणा की थी कि वाशिंगटन इस साल के अंत तक इस्राइल को लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर की वार्षिक सहायता बंद कर देगा। उन्होंने कहा कि इस्राइल को अब अमेरिकी वित्तीय सहायता की आवश्यकता नहीं है।
अमेरिकी सहायता क्यों बंद हो रही है?
डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (स्थानीय समय) को फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका इस्राइल को 4 अरब अमेरिकी डॉलर दे रहा था, लेकिन यह इस साल के अंत तक बंद हो जाएगा। ट्रंप ने इस फैसले के पीछे का तर्क बताते हुए कहा कि इस्राइल आर्थिक रूप से समृद्ध हो गया है। अब वह अमेरिकी सहायता पर निर्भर हुए बिना अपने हथियार खरीद सकता है। ट्रंप ने कहा, "उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं है। इस्राइल एक बहुत समृद्ध देश है।" यह घटनाक्रम मौजूदा अमेरिका-इस्राइल सुरक्षा सहायता समझौते की पृष्ठभूमि में आया है। फॉक्स न्यूज के अनुसार, यह समझौता 2028 तक सालाना लगभग 3.8 अरब अमेरिकी डॉलर प्रदान करता है। यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य सहयोग का एक प्रमुख हिस्सा है।
नेतन्याहू पर विपक्षी दलों ने किन बिंदुओं पर हमला बोला?
ट्रंप की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, इस्राइल के डेमोक्रेटिक दल के अध्यक्ष याइर गोलान ने भी नेतन्याहू की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब लंबे युद्ध के बाद इस्राइल की रक्षा आवश्यकताएं उच्च बनी हुई हैं। गोलान ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नेतन्याहू ने अपने रिकॉर्ड में एक और बड़ी विफलता दर्ज की है। उन्होंने अमेरिकी सहायता की रोक को "इस्राइल की सुरक्षा और देश में जीवन की गुणवत्ता के लिए एक गंभीर झटका" बताया। गोलान ने तर्क दिया कि सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने का वित्तीय बोझ इस्राइली नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने नेतन्याहू के इस मुद्दे से निपटने की आलोचना की। गोलान ने कहा कि एक जिम्मेदार प्रधानमंत्री अमेरिकी सहायता बढ़ाने के लिए लड़ता, न कि उसे खत्म करता। गोलान ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू सुरक्षा और आर्थिक संकट को गहरा कर रहे हैं और इस्राइल के भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं।
नेतन्याहू के भविष्य पर क्या असर?
नेतन्याहू ने पहले सीबीएस न्यूज के 60 मिनट्स को दिए अपने साक्षात्कार के अनुसार, अगले दशक में अमेरिकी सैन्य सहायता पर इस्राइल की निर्भरता कम करने का इरादा व्यक्त किया था। यह प्रस्तावित कदम ऐसे समय में आया है जब इस्राइल के 'चेंज एंड रिपेयर' विपक्षी दलों के नेता एकजुट हुए हैं। उन्होंने औपचारिक रूप से याशर दल के नेता गादी आइजेंकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उन्होंने राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को उन्हें देश की 38वीं सरकार बनाने और तत्काल सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित करने की सिफारिश करने पर सहमति व्यक्त की है। यह घटनाक्रम नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।