बगदादी की सत्ता की भूख से ऐसे जन्मा आईएसआईएस
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अमेरिका के 2003 में हुए हमले के बाद इराक तबाह हो गया था। 2011 में अमेरिकी सैनिकों के लौटने के बाद वहां छोटे-छोटे गुटों ने लड़ना शुरू कर दिया। इसमें से एक गुट अलकायदा इराक का प्रमुख अबू बकर अल बगदादी का था। जो कि 2006 से ही इराक में पांव जमाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसके पास संसाधन नहीं थे। अमेरिकी सैनिकों के लौटने के बाद उसने अपने संगठन का नाम रखा इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक। उसने सद्दाम की सेना के कमांडर और सैनिकों को मिलाकर ताकत बढ़ानी शुरू कर दी। इराक में बड़ी कामयाबी न मिलने पर बगदादी ने सीरिया का रुख किया जो गृहयुद्ध की चपेट में था। चार साल तक वह वहां भी नाकाम रहा पर संगठन के नाम में सीरिया जुड़ गया और वह आईएसआईएस बन गया।
एक साल में बड़े शहरों पर किया कब्जा
2013 में बाजी पलट गई। सीरिया सरकार के खिलाफ लड़ रहे फ्री सीरियन आर्मी के जनरल ने अपील की और अमेरिका, इस्राइल और जार्डन समेत कई देशों ने वहां हथियार पहुंचा दिए। यही हथियार एक साल के भीतर आईएस को मिल गए क्योंकि बगदादी सीरियाई विद्रोहियों में सेंध लगा चुका था। इसके बाद एक साल के भीतर इस आतंकी संगठन ने 2014 में सीरिया और इराक के बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया।
2017 में खत्म हो गया साम्राज्य
2015, 2016 और 2017 में पश्चिमी देशों समेत कई जगहों पर आतंकी हमले हुए। हालांकि अमेरिकी सेना, इराकी सेना और रूस की मदद से सीरियाई सेना अब इस आतंकी संगठन को दोनों देशों की जमीन से साफ कर चुकी है।
यहां अभी जिंदा है आईएस
आईएस के आतंकी इराक और सीरिया में हारने के बावजूद कई अन्य आतंकी संगठनों से समझौता कर संगठन का अस्तित्व बनाए हुए हैं। लीबिया, यमन, अफगानिस्तान में इनका काफी प्रभाव है। वहीं चेचन्या, नाइजीरिया समेत कई जगहों पर इनकी मौजूदगी बनी हुई है।
जब 46 भारतीय नर्सें आईएस के चंगुल से हुईं आजाद
जून, 2014 में भारत सरकार ने बताया कि इराक के तिकरित शहर में काम कर रहीं 46 भारतीय नर्सें अगवा कर ली गई हैं। हालांकि यह भी दावा किया गया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। जिसके बाद आतंकी उन्हें मोसुल ले गए। पर भारत सरकार ने सऊदी के अधिकारियों और इराक में कार्यरत संगठनों की मदद से कूटनीतिक प्रयास शुरू किये। जिसके बाद इसमें कामयाबी मिली और पांच जुलाई को सभी नर्सों को सुरक्षित भारत लाया जा सका। रॉ के पूर्व अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने पूरी वार्ता को गुप्त रखा इसलिए उसे कामयाबी मिली। आईएस को इसके लिए कोई फिरौती भी नहीं दी गई। इनमें से ज्यादातर नर्सें केरल से थीं जो कि ईसाई समुदाय से जुड़ी थीं।