Bangladesh: क्या चीन पर कुछ ज्यादा ही निर्भर होता जा रहा है बांग्लादेश? पढ़ें पूरी डिटेल
बांग्लादेश बैंक ने बाकी मुद्राओं की तुलना में युवान को बहुत बाद में जाकर रिजर्व करेंसी के रूप में मान्यतदा दी थी। उसके तुरंत बाद वह युआन का भंडार बढ़ाने की कोशिश में जुट गया।
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बांग्लादेश का सेंट्रल बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में चीनी मुद्रा युआन का हिस्सा तेजी से बढ़ा रहा है। इस तरह वह युआन को अंतरराष्ट्रीय कारोबार की मुद्रा बनाने की चीन की योजना में मददगार बन रहा है। बांग्लादेश के वित्तीय अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अब बांग्लादेश बैंक ने अपने भंडार में मौजूद विदेशी मुद्रा में युआन का हिस्सा बढ़ा कर 1.32 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि ये संख्या अपने-आप में बहुत छोटी है, लेकिन अगर अतीत से तुलना करें, तो बांग्लादेश के वित्तीय विशेषज्ञ इसे एक महत्त्वपूर्ण ट्रेंड के रूप में देख रहे हैँ।
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार अमेरिकी मुद्रा डॉलर का हिस्सा अब 75 प्रतिशत रह गया है। 2017 में डॉलर का हिस्सा 81 प्रतिशत था। जानकारों के मुताबिक डॉलर के हिस्से में गिरावट और युआन की मात्रा में बढ़ोतरी ज्यादातर हाल के समय में हुई है।
बांग्लादेश ने डॉलर की जगह यूरोपियन यूनियन की मुद्रा यूरो का हिस्सा भी तेजी से बढ़ाया है। इस वर्ष अगस्त उसका हिस्सा पांच प्रतिशत तक पहुंच गया। इसी तरह बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में अब ब्रिटिश मुद्रा पाउंड का हिस्सा बढ़ कर 4.4 फीसदी तक पहुंच गया है। लेकिन पर्यवेक्षकों का सबसे ज्यादा ध्यान बांग्लादेश में युआन को मिल रही तरजीह ने खींचा है।
बांग्लादेश बैंक ने बाकी मुद्राओं की तुलना में युवान को बहुत बाद में जाकर रिजर्व करेंसी के रूप में मान्यतदा दी थी। उसके तुरंत बाद वह युआन का भंडार बढ़ाने की कोशिश में जुट गया। बीते अगस्त तक बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार में 52 करोड़ 80 डॉलर मूल्य के बराबर युआन मौजूद था। विश्लेषकों ने कहा है कि बांग्लादेश के चीन के साथ कारोबार में हाल में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से बांग्लादेश में युआन का महत्त्व बढ़ गया है। अपनी मुद्रा को अधिक स्वीकार्य बनाने के लिए चीन ने कुछ नियोजित कोशिशें भी की हैँ। कुछ ही महीने पहले चीन ने अपने सरकारी बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और बांग्लादेश बैंक के बीच युवान और टका (बांग्लादेश की मुद्रा) में अदला-बदली की सुविधा प्रदान की थी। इस सुविधा का लाभ द्विपक्षीय व्यापार में उठाया जा सकता है।
द बिजनेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण में बताया गया है कि अब दुनिया भर में युआन में लेन-देन बढ़ता जा रहा है। इसलिए बांग्लादेश में इस मुद्रा की स्वीकार्यता बढ़ी है। उधर चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापार पार्टनर बन गया है। पिछले वित्त वर्ष में बांग्लादेश ने एक लाख करोड़ टका कीमत की वस्तुओं का आयात चीन से किया। जबकि बांग्लादेश से 804 करोड़ टका कीमत की वस्तुओं का निर्यात चीन को हुआ।
हाल के वर्षों में बांग्लादेश चीन से विकास संबंधी मदद में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। वह अब बांग्लादेश में विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। पिछले वित्त वर्ष में उससे मिली सहायता में 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जानकारों के मुताबिक इन तमाम वजहों से बांग्लादेश के चीन से संबंध गहराए हैं। अब संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक बांग्लादेश के विदेश मुद्रा भंडार में युआन का हिस्सा और बढ़ जाएगा।