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Iraq Elections 2025: सादरिस्ट का बहिष्कार, कम वोटिंग और कड़ी सुरक्षा; क्या संदेश दे रहा है बगदाद का जनादेश?

Wed, 12 Nov 2025 06:22 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बगदाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बगदाद Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 12 Nov 2025 06:22 AM IST
सार

इराक में मंगलवार को हुए संसदीय चुनाव सख्त सुरक्षा और शिया नेता मुक्तदा अल-सद्र के सादरिस्ट मूवमेंट के बहिष्कार से फीके रहे। 32 मिलियन योग्य मतदाताओं में से सिर्फ 21.4 मिलियन ने वोटर कार्ड बनाए और 55% मतदान दर्ज हुआ। कुल मिलाकर मतदान में क्षेत्रीय तनाव और जनता की राजनीतिक उदासीनता साफ झलकी।

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Iraq Elections 2025 Iraq holds parliamentary election boycotted by major political group News In Hindi
इराक चुनाव - फोटो : Google Gemini

विस्तार

इराक में मंगलवार को संसदीय चुनाव हुए, जो कड़ी सुरक्षा और एक बड़े राजनीतिक गुट के बहिष्कार से प्रभावित रहे। मतदान के दौरान हिंसा की सिर्फ एक बड़ी घटना सामने आई, जो कि उत्तरी शहर किर्कुक में दो दलों के समर्थकों के बीच झड़प में दो पुलिसकर्मी मारे गए। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, पंजीकृत मतदाताओं में से 55% ने वोट डाला, लेकिन कुल 32 मिलियन योग्य मतदाताओं में से सिर्फ 21.4 मिलियन ने ही मतदाता कार्ड बनवाए, जो 2021 के चुनाव में 24 मिलियन से कम है।

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बता दें कि यह चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में बड़े बदलाव हुए हैं। उदाहरण के तौर पर गाजा और लेबनान में युद्ध, इस्राइल-ईरान संघर्ष और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के पतन जैसे घटनाक्रमों के बीच। ऐसे में अमेरिका भी इराक सरकार पर ईरान समर्थक सशस्त्र गुटों के प्रभाव को कम करने का दबाव बना रहा है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने कहा कि यह चुनाव जनता की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 2003 के बाद सिर्फ एक प्रधानमंत्री को ही दोबारा मौका मिला है।

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सादरिस्ट मूवमेंट का बहिष्कार
प्रभावशाली शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाला सादरिस्ट मूवमेंट इस चुनाव से दूर रहा। 2021 में इस गुट ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं, लेकिन सरकार गठन पर सहमति न बनने के बाद उसने संसद से इस्तीफा दे दिया और अब पूरे राजनीतिक सिस्टम का बहिष्कार कर रहा है। सदर सिटी (बगदाद के बाहरी इलाके) में सुरक्षा बेहद कड़ी थी, सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियां और विशेष बलों की तैनाती थी। वहां एक बड़ा बैनर लगा था, जिसमें अल-सद्र सैन्य वर्दी में हथियार लिए नजर आ रहे थे, साथ में लिखा था- मेरे लोग सदर सिटी में बहिष्कार कर रहे हैं।

खास बात ये रही है कि मतदान केंद्र खुले तो थे, लेकिन लगभग खाली रहे। एक केंद्र, जहां 3,300 मतदाता पंजीकृत थे, वहां कुछ घंटों में केवल 60 लोगों ने वोट डाला। केंद्र के निदेशक अहमद अल-मुसावी ने कहा कि सादरिस्ट बहिष्कार का बड़ा असर पड़ा है। पहले लंबी कतारें लगती थीं, अब सन्नाटा है। स्थानीय निवासी सबीह दाखिल ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि शायद नए नेता जीवन स्तर सुधारें। जबकि दूसरे निवासी राफिद अजील ने कहा कि यह सरकार भ्रष्ट है, पहले भी भ्रष्ट थी, आगे भी वैसी ही होगी।

किर्कुक में तनाव और हिंसा, समझिए कारण
मतदान से पहले रात में किर्कुक में हिंसा भड़क उठी। यहां अरब, कुर्द, शिया और तुर्कमान समुदाय रहते हैं और यह इलाका लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद का केंद्र रहा है। रात 2 बजे के करीब दो गुटों में झगड़ा हुआ जो बाद में गोलीबारी में बदल गया। इसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और दो नागरिक घायल हुए। 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, झगड़ा कुर्द पार्टी (पीयूके) और इराकी तुर्कमान फ्रंट के समर्थकों के बीच हुआ। सुबह तक स्थिति शांत हुई और धीरे-धीरे लोग वोट डालने पहुंचे। हालांकि, कई मतदाताओं ने राजनीतिक उदासीनता जताई। 60 वर्षीय नूरअदीन सालेह ने कहा, “हम सिर्फ चेहरों को बदलते हैं, बाकी कुछ नहीं बदलता। अस्सीरी अल्पसंख्यक की बैन बहनम ने भी कहा, “उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी हम वोट डालने आते हैं।

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भ्रष्टाचार और कानूनी विवाद
मतदान से पहले भ्रष्टाचार और वोट खरीदने के कई आरोप लगे। सुरक्षा बलों ने पिछले हफ्ते 46 लोगों को गिरफ्तार किया, जो अवैध रूप से वोटर कार्ड खरीद-बेच रहे थे। उनके पास से 1,841 कार्ड बरामद हुए।इराक के सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल के प्रमुख ने भी कहा कि चुनाव की तारीख संवैधानिक नहीं है, क्योंकि इसे पहले 24 नवंबर तय किया गया था, बाद में बदलकर 12 नवंबर कर दिया गया।

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