ईरान के हमले से भड़का इस्राइल: PM नेतन्याहू बोले- आतंकियों को हथियारबंद होने की इजाजत नहीं; रुख के मायने क्या?
Benjamin Netanyahu Statement: अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू कर पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंचा दिया है। नेतन्याहू ने इसे अस्तित्व की लड़ाई बताया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी सेना को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी। आइए, जानते हैं कि ईरान पर हमले के बाद नेतन्याहू ने इस्राइल की जनता को क्या संबोधित किया।
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पश्चिम एशिया में अचानक सैन्य तनाव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह अभियान ईरान से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को खत्म करने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका को तेज कर दिया है।
नेतन्याहू ने ऑपरेशन को कैसे बताया जरूरी कदम?
नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के आतंकी शासन के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया है। उनके अनुसार ईरानी शासन लंबे समय से इस्राइल और अमेरिका के खिलाफ हिंसक नारे और गतिविधियां चलाता रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा शासन परमाणु हथियार हासिल कर ले तो पूरी मानवता के लिए खतरा बन सकता है। नेतन्याहू ने मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन को ऐतिहासिक बताया।
ऑपरेशन रोअरिंग लॉयन क्या है और इसका लक्ष्य क्या बताया गया?
इस्राइली सेना आईडीएफ ने इस सैन्य कार्रवाई को ऑपरेशन रोअरिंग लॉयन नाम दिया है। सेना के अनुसार अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त सेनाएं ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से कार्रवाई कर रही हैं।
आईडीएफ का कहना है कि ईरान लगातार इस्राइल की सीमाओं पर सक्रिय समूहों को प्रशिक्षण, हथियार और वित्तीय मदद देता रहा है। सेना ने इसे इस्राइल के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बताया।
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ईरान में अभी कैसे बदल सकते हैं हालात?
- अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड को हथियार डालने की चेतावनी दी।
- आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षा देने की बात कही गई।
- ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।
- लगातार हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनती दिख रही है।
ट्रंप की चेतावनी कितनी सख्त मानी जा रही है?
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि ईरान की सेना, पुलिस और रिवोल्यूशनरी गार्ड यदि हथियार डाल देते हैं तो उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि यह ईरान की जनता के लिए अपने भविष्य का फैसला करने का समय हो सकता है। ट्रंप ने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई व्यापक स्तर पर जारी रह सकती है।
ईरानी जनता से नेतन्याहू की अपील क्यों अहम है?
नेतन्याहू ने ईरान के अलग-अलग समुदायों जैसे फारसी, कुर्द, अज़ेरी, बलोच और अहवाजी लोगों से मौजूदा शासन के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी जनता को स्वतंत्र और शांतिपूर्ण भविष्य का रास्ता देना है। इस बयान को सैन्य के साथ राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
परमाणु विवाद ने कैसे बढ़ाया टकराव?
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ था। अमेरिका और इस्राइल का आरोप रहा है कि ईरान परमाणु हथियार क्षमता विकसित करना चाहता है। संयुक्त सैन्य अभियान को इसी खतरे को रोकने की कोशिश बताया गया है। हालांकि हमलों के पूरे असर का आकलन अभी जारी है।
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