Iran-US Peace Plan: ईरान-अमेरिका की बातचीत में पाकिस्तान की एंट्री, शहबाज शरीफ बोले- तेहरान का जवाब मिल गया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर अपना जवाब भेज दिया है। पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद शुरू हुआ पश्चिम एशिया संकट अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर अपना जवाब भेज दिया है। पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस्राइल और अमेरिका के हमलों के बाद शुरू हुआ संकट अब पूरी दुनिया की चिंता बन चुका है, क्योंकि इसका असर तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।
क्या बोले शहबाज शरीफ?
इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान को ईरान का जवाब मिल चुका है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने उन्हें इस बारे में जानकारी दी। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव पर क्या जवाब दिया है। शहबाज शरीफ का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। पाकिस्तान पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर चुका है।
पश्चिम एशिया संकट के बारे में जाने?
पश्चिम एशिया में यह तनाव 28 फरवरी को उस समय बढ़ गया था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। इस संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे दुनिया भर के तेल बाजार में चिंता बढ़ गई। हालांकि आठ अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ड्रोन हमलों और सैन्य गतिविधियों के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
पाकिस्तान क्यों निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका?
पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश की है। 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच एक दौर की सीधी बातचीत भी हुई थी, लेकिन कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया। बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, जबकि ईरान अपने अधिकारों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है।
ट्रंप ने युद्धविराम को लेकर क्या फैसला लिया?
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 21 अप्रैल को युद्धविराम की समयसीमा को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था ताकि बातचीत के लिए ज्यादा समय मिल सके। अमेरिका का कहना है कि वह संघर्ष खत्म कर क्षेत्र में स्थिरता चाहता है। वहीं ईरान लगातार कह रहा है कि उस पर किसी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब भी कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
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