Iran: सुप्रीम लीडर ही ईरानी सत्ता संरचना की धुरी, कैसे होता है चुनाव, मजलिस-ए जोब्रेगन-ए रहबारी का क्या रोल?
ईरान के सर्वोच्च नेता का चयन एक विशेष संस्था एक्सपर्ट्स काउंसिल मजलिस-ए जोब्रेगन-ए रहबारी द्वारा किया जाता है। यह संस्था 88 वरिष्ठ धर्मगुरुओं और विद्वानों की होती है, जिन्हें जनता चुनती है। ईरान की सत्ता संरचना में सुप्रीम लीडर वह केंद्र है जिसके चारों ओर देश की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक धुरी घूमती है। चूंकि सुप्रीम लीडर देश की सबसे ताकतवर संस्था के प्रमुख होते हैं इसलिए उनकी शक्तियां भी व्यापक होती हैं।
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ईरान की राजनीतिक व्यवस्था दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक या सैन्य तानाशाही व्यवस्थाओं से बिल्कुल अलग है। यहां सर्वोच्च सत्ता एक धार्मिक नेता सुप्रीम लीडर के हाथों में होती है, जिसकी शक्तियां राष्ट्रपति, संसद और सेना से भी ऊपर होती हैं। लेकिन यह पद केवल वंश या सीधे चुनाव से नहीं मिलता बल्कि इसकी एक विशिष्ट प्रक्रिया और शक्ति-संरचना होती है।
ईरान के सर्वोच्च नेता का चयन एक विशेष संस्था एक्सपर्ट्स काउंसिल मजलिस-ए जोब्रेगन-ए रहबारी द्वारा किया जाता है। यह संस्था 88 वरिष्ठ धर्मगुरुओं और विद्वानों की होती है, जिन्हें जनता चुनती है। ईरान की सत्ता संरचना में सुप्रीम लीडर वह केंद्र है जिसके चारों ओर देश की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक धुरी घूमती है।
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चूंकि सुप्रीम लीडर देश की सबसे ताकतवर संस्था के प्रमुख होते हैं इसलिए उनकी शक्तियां भी व्यापक होती हैं। वे सशस्त्र सेनाओं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और खुफिया एजेंसियों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। इसके अलावा न्यायपालिका के प्रमुख की नियुक्ति सुप्रीम लीडर ही करते हैं। सरकारी टेलीविजन और रेडियो पर नियंत्रण भी उन्हें का होता है। राष्ट्रपति की पुष्टि और उसे हटाने की शक्ति तथा युद्ध और शांति जैसे फैसलों पर अंतिम निर्णय भी वही लेते हैं।
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संसद-राष्ट्रपति की शक्तियां भी सीमित
ईरान में संसद (मजलिस) और राष्ट्रपति निर्वाचित होते हैं, लेकिन उनकी शक्ति सीमित होती है। संसद कानून बनाती है, बजट पास करती है और सरकारी कामकाज की निगरानी करती है, लेकिन हर कानून को गार्जियन काउंसिल से मंजूरी लेनी पड़ती है जो सीधे या परोक्ष रूप से सुप्रीम लीडर के प्रभाव में होती है। राष्ट्रपति सरकारी नीतियों को लागू करता है लेकिन विदेश नीति, रक्षा और न्याय व्यवस्था पर उसका अंतिम नियंत्रण नहीं होता। इन सभी मामलों में अंतिम निर्णय सुप्रीम लीडर ही लेते हैं।
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