{"_id":"5ccbc75bbdec2207853456cf","slug":"iran-secretly-executes-two-minor-boys-says-amnesty","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुष्कर्म के आरोप में ईरान ने दो नाबालिग लड़कों को गुप्त रूप से दी मौत की सजा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
दुष्कर्म के आरोप में ईरान ने दो नाबालिग लड़कों को गुप्त रूप से दी मौत की सजा
Fri, 03 May 2019 11:16 AM IST
Shilpa Thakur
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Fri, 03 May 2019 11:16 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : File Photo
मानव अधिकारों की रक्षा करने वाले समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि ईरान ने गुप्त रूप से दो नाबालिग लड़कों को दुष्कर्म के कई आरोपों के चलते मौत की सजा दी है। एमनेस्टी ने इस बात के लिए ईरान की निंदा की है और कहा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून और बच्चों के अधिकारों की अवहेलना की है।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
ब्रिटेन स्थित अधिकार समूह का कहना है कि मृतक लड़कों को 15 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था। दोनों के नाम मेहदी सोहरबिफर और अमीन सेगाघाट था। बताया जा रहा है कि अनुचित ट्रायल के दौरान दोनों को मौत की सजा सुनाई गई और बीते गुरुवार को फांसी पर लटका दिया गया।
वहीं एमनेस्टी का कहना है कि दोनों लड़कों को मारने से पहले कोड़े मारे गए थे। एमनेस्टी के मध्यपूर्व और उत्तरी अफरीका के निदेशक फिलिप लूथर का कहना है, "ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर साबित किया है कि वे बच्चों को मौत के घाट उतारने के लिए तैयार हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना करके।"
उन्होंने आगे कहा, "इन दोनों लड़कों को मौत की सजा को लेकर दो साल तक अंधेरे में रखा गया। जीवन के अंतिम क्षणों में इन्हें प्रताड़ित किया गया। और फिर गुप्त रूप से फांसी पर चढ़ा दिया।"
इनके परिवार को बीते बुधवार को इनसे मिलने की अनुमति दी गई लेकिन मौत की सजा के बारे में कुछ नहीं बताया गया। बच्चों को फांसी देने के मामले में ईरान के बाद दूसरा स्थान चीन का है। जहां माना जाता है कि हजारों बच्चों को हर साल मौत की सजा दी जाती है। एमनेस्टी का कहना है कि साल 1990 से 2018 के बीच ऐसे 97 नाबालिग कैदी थे जिन्हें मौत की सजा दी गई है।