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ईरान का पलटवार: IRGC ने जॉर्डन में दागीं मिसाइलें; US सैनिकों ने हेगसेथ को ईरान के साथ लंबी जंग से आगाह किया

Mon, 31 Aug 2026 07:36 AM IST
शिवम गर्ग एएनआई, वॉशिंगटन/तेहरान
एएनआई, वॉशिंगटन/तेहरान Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 31 Aug 2026 07:36 AM IST
सार

ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह कार्रवाई लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद हुई। इसी बीच अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ईरान के खिलाफ अभियान लंबा खिंचने पर सैन्य संसाधनों पर दबाव को लेकर चिंता जताई है। आगे क्या होगा? आइए, जानते हैं...

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Iran Retaliates With Ballistic Missiles at US Bases in Jordan Amid Growing Concerns Over Iran War
ईरान-अमेरिका युद्ध - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमले के बाद की गई बताई जा रही है।

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ईरानी मीडिया के मुताबिक, हमले में जॉर्डन स्थित किंग हुसैन और अल-अजराक एयर बेस को निशाना बनाया गया। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में हमले से हुए नुकसान या किसी हताहत की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने आने वाली मिसाइलों को रोक दिया।

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अमेरिका ने लारक द्वीप पर क्यों किया हमला?

ईरान का यह दावा अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही समय बाद सामने आया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लारक द्वीप पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की ऐसी मिसाइल लॉन्चर गतिविधियां देखी गई थीं, जिनसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी का अंदेशा था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने वहां दो लॉन्चरों को निशाना बनाया। 

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ईरान ने अमेरिका को दी थी बदले की चेतावनी

लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के IRGC ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी हमले को गंभीर गलती बताते हुए कहा था कि इसके परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा सामने आया। हालांकि, मिसाइल हमले से संबंधित नुकसान और प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।


अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने युद्ध लंबा खिंचने पर क्यों जताई चिंता?

इस बीच अमेरिका में भी ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर चिंता सामने आई है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के कई शीर्ष अधिकारियों ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान को लंबे समय तक जारी रखना टिकाऊ नहीं है और इससे दुनिया के दूसरे हिस्सों में अमेरिकी सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों के साथ यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी अभियानों की कमान संभालने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं दर्ज की हैं।



रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के कुछ शीर्ष कमांडरों ने मध्य पूर्व में सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के आदेश पर ‘नॉन-कॉनकर’ यानी असहमति दर्ज की। इसका अर्थ है कि वे आदेश से सहमत नहीं थे, लेकिन आदेश का पालन करेंगे। अमेरिकी सैन्य संसाधनों के लंबे समय तक मध्य पूर्व में इस्तेमाल होने से यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्रों में मिशनों तथा प्रशिक्षण क्षमता पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

नौसेना ने भी जताई संसाधनों पर दबाव की चिंता

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, नौसेना प्रमुख एडमिरल डैरिल काउडल ने भी ईरान युद्ध के लिए मौजूदा स्तर के समर्थन को लंबे समय तक जारी रखने को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार तैनाती से जहाजों के रखरखाव और भविष्य की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ सकता है। कुछ अमेरिकी सैनिकों की मध्य पूर्व में तैनाती सितंबर तक और कुछ की 2027 तक बढ़ाए जाने की संभावना बताई गई है। इससे अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के सामने संसाधनों और वैश्विक सैन्य तैयारियों के बीच संतुलन की चुनौती बढ़ गई है।

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