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मिसाइलों के दम पर बचा ईरान: राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- US के साथ समझौते में शामिल नहीं हमारा मिसाइल कार्यक्रम
Wed, 24 Jun 2026 07:41 AM IST
अमन तिवारी
एएनआई, इस्लामाबाद
एएनआई, इस्लामाबाद
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 24 Jun 2026 07:41 AM IST
सार
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि मिसाइल क्षमता देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है और भविष्य में भी इस विषय पर किसी समझौते की संभावना नहीं है।
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मसूद पेजेशकियन, ईरानी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते का हिस्सा नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी मिसाइलों को लेकर ऐसा कोई समझौता नहीं होगा। पेजेशकियन ने यह बात पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मीडिया वार्ता के दौरान कही।
राष्ट्रपति ने अपने देश के मिसाइल कार्यक्रम का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें ईरान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं। उनके मुताबिक, अगर ईरान के पास ये मिसाइलें नहीं होतीं, तो इस्रायल और अमेरिका अब तक ईरान को पूरी तरह बर्बाद कर चुके होते। उन्होंने मिसाइल क्षमता और अमेरिका के साथ हुए समझौते के बीच किसी भी तरह के जुड़ाव को सिरे से खारिज कर दिया।
पेजेशकियन इन दिनों पाकिस्तान के दौरे पर हैं। वहां वे पाकिस्तानी नेताओं के साथ आपसी संबंधों और क्षेत्र के हालातों पर चर्चा कर रहे हैं। यह बयान स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी बातचीत के खत्म होने के बाद आया है। इस 14 सूत्रीय समझौते का मुख्य उद्देश्य इलाके में जारी तनाव और दुश्मनी को खत्म करना है। पिछले हफ्ते ही अमेरिका ने इस समझौते का आधिकारिक मसौदा सबके सामने रखा था।
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते में कई अहम बातें शामिल हैं। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का प्रावधान है। साथ ही ईरान पर लगी कुछ आर्थिक पाबंदियों को कम करने की बात भी कही गई है। समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य में तकनीकी बातचीत करने की रूपरेखा भी तैयार की गई है।
ये भी पढ़ें: संकट में शांति समझौता: 'परमाणु निरीक्षण से किया इनकार तो रद्द कर दूंगा बैठकें', ट्रंप ने फिर दी ईरान को धमकी
हालांकि, इस आधिकारिक दस्तावेज में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह की रोक का जिक्र नहीं है। इसमें हथियारों से जुड़ी सिर्फ एक ही शर्त है। ईरान ने यह वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा और न ही उन्हें विकसित करेगा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। लेकिन अब उनका रुख बदल गया है। हाल ही में फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि मिसाइलें अब कोई समस्या नहीं हैं।
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राष्ट्रपति ने अपने देश के मिसाइल कार्यक्रम का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें ईरान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं। उनके मुताबिक, अगर ईरान के पास ये मिसाइलें नहीं होतीं, तो इस्रायल और अमेरिका अब तक ईरान को पूरी तरह बर्बाद कर चुके होते। उन्होंने मिसाइल क्षमता और अमेरिका के साथ हुए समझौते के बीच किसी भी तरह के जुड़ाव को सिरे से खारिज कर दिया।
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पेजेशकियन इन दिनों पाकिस्तान के दौरे पर हैं। वहां वे पाकिस्तानी नेताओं के साथ आपसी संबंधों और क्षेत्र के हालातों पर चर्चा कर रहे हैं। यह बयान स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी बातचीत के खत्म होने के बाद आया है। इस 14 सूत्रीय समझौते का मुख्य उद्देश्य इलाके में जारी तनाव और दुश्मनी को खत्म करना है। पिछले हफ्ते ही अमेरिका ने इस समझौते का आधिकारिक मसौदा सबके सामने रखा था।
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते में कई अहम बातें शामिल हैं। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का प्रावधान है। साथ ही ईरान पर लगी कुछ आर्थिक पाबंदियों को कम करने की बात भी कही गई है। समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भविष्य में तकनीकी बातचीत करने की रूपरेखा भी तैयार की गई है।
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हालांकि, इस आधिकारिक दस्तावेज में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह की रोक का जिक्र नहीं है। इसमें हथियारों से जुड़ी सिर्फ एक ही शर्त है। ईरान ने यह वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं खरीदेगा और न ही उन्हें विकसित करेगा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। लेकिन अब उनका रुख बदल गया है। हाल ही में फ्रांस में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि मिसाइलें अब कोई समस्या नहीं हैं।