Indo-Pacific Economic Framework: चीन के खिलाफ व्यापारिक गोलबंदी के लिए अमेरिका ने फूंकी आईपीईएफ में जान
Indo-Pacific Economic Framework: आईपीईएफ में शामिल अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर में शामिल हैं। आईपीईएफ में शामिल देशों का साझा सकल घरेलू उत्पाद दुनिया के कुल जीडीपी के 40 फीसदी के बराबर है...
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अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क में गुरुवार को इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (आईपीईएफ) की पहली मंत्री-स्तरीय बैठक शुरू हुई। अमेरिका ने इस समूह का गठन चीन का मुकाबला करने के लिए किया है। इसका एलान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी पिछली एशिया यात्रा के दौरान किया था। न्यूयॉर्क में शुरू हुई बैठक में 14 देशों के व्यापार मंत्री भाग ले रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आईपीईएफ की बैठक में चार खास मुद्दों पर चर्चा हो रही है। ये मुद्दे हैं- व्यापार से जुड़े सप्लाई चेन की मजबूती, स्वच्छ ऊर्जा एवं कार्बन उत्सर्जन में कटौती, इन्फ्रास्ट्रक्चर और टैक्स एवं भ्रष्टाचार विरोधी उपाय। समूह ने यह स्पष्ट किया है कि ये समूह कोई औपचारिक व्यापार समझौता नहीं है। बल्कि आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए की जा रही एक सहभागिता भर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में अमेरिका ने एशिया-पैसिफिक के देशों साथ कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (सीपीटीपीपी) समझौता किया था। यह मुक्त व्यापार समझौता था। लेकिन इसे लेकर अमेरिका में उपजे विरोध को देखते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस करार से अपने देश को निकाल लिया। अमेरिका में भी अभी भी मुक्त व्यापार समझौते के खिलाफ माहौल है। इसलिए बाइडेन प्रशासन आईपीईएफ को आगे बढ़ाने के क्रम में अति सतर्कता बरत रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक मुक्त व्यापार समझौतों के प्रति अमेरिका की हिचक का फायदा चीन ने उठाया है। वह 15 देशों के बीच हुए रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) में शामिल हुआ है। यह एक मुक्त व्यापार समझौता है। इसके अलावा उसने सीपीटीपीपी की सदस्यता लेने के लिए भी अर्जी दी हुई है। अब अमेरिका इसका मुकाबला आईपीईएफ के जरिए करना चाहता है।
न्यूयॉर्क बैठक के दौरान अमेरिका की वाणिज्य मंत्री गिना राइमोंडो और अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाय ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण की एक नई पहल की घोषणा की। इसके तहत इस क्षेत्र की उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में महिलाओं और लड़कियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस प्रोग्राम में खास कर भारत, ब्रुनेई, फीजी, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड और वियतमान पर ध्यान दिया जाएगा।
आईपीईएफ में शामिल अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और सिंगापुर में शामिल हैं। अमेरिका सरकार के सूत्रों ने यहां मीडियाकर्मियों का ध्यान इस बात की तरफ खींचा की आईपीईएफ में शामिल देशों का साझा सकल घरेलू उत्पाद दुनिया के कुल जीडीपी के 40 फीसदी के बराबर है। यह आरसीईपी की जीडीपी से ज्यादा है। आरसीईपी में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की है।
न्यूयॉर्क में हो रही दो दिन की बैठक में सदस्य देशों के बीच सूचना के आदान-प्रदान में सुधार करने का समझौता होने की आशा है। अगर ऐसा हुआ, तो उससे दुनिया में वैकल्पिक सप्लाई चेन कायम करने में मदद मिलेगी। सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि बैठक खत्म होने के बाद सभी 14 देशों की तरफ से एक साझा बयान जारी किया जाएगा।
आईपीईएफ की बैठक के साथ ही यहां राइमोंडो और टाय की दक्षिण कोरिया और जापान के व्यापार मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक भी हुई। खबरों के मुताबिक उन दोनों देशों के मंत्रियों ने हाल में अमेरिका में पास हुए मुद्रास्फीति कटौती अधिनियम पर चिंता जताई। इस कानून में प्रावधान है कि जो कंपनियां चीन से कारोबार करेंगी, उन्हें अमेरिकी सब्सिडी से वंचित कर दिया जाएगा। जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियों को इससे नुकसान होने का अंदेशा है।