UN Military Gender Advocate Award: भारतीय शांति सैनिक मेजर अभिलाषा बराक को मिला अवार्ड, बढ़ाया देश का गौरव
भारतीय महिला शांति सैनिक और देश की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवार्ड 2025 प्रदान किया गया। जानें उनकी उपलब्धि और इस सम्मान का महत्व...
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भारत की महिला शांति सैनिक और देश की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र सैन्य लिंग अधिवक्ता पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष समारोह में मेजर बराक को यह पुरस्कार प्रदान किया। वर्तमान में वह लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत शांति मिशन में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
Congratulations to our @UN Military Gender Advocate of the Year, Major Abhilasha Barak of India, who is #ServingForPeace with @UNPeacekeeping in Lebanon.
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Her work shows the critical role that @UNIFIL_ plays & how its presence is transforming the lives of women & girls, even… pic.twitter.com/MffWFACTG9 — António Guterres (@antonioguterres) June 6, 2026
गुटेरेस ने की सराहना
पुरस्कार समारोह के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मेजर अभिलाषा बराक के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका योगदान यह दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन महिलाओं और लड़कियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि मेजर बराक न केवल उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं जिनकी वह सेवा कर रही हैं, बल्कि अपने साथ काम करने वाले शांति सैनिकों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण हैं।
कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक?
मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं। वह भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में भी जानी जाती हैं। अपने सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और महिला नेतृत्व को नई पहचान दिलाई है।
सम्मान पाने वाली तीसरी भारतीय अधिकारी बनी अभिलाषा
- भारत के लिए खास बात यह भी है कि इस सम्मान को पाने वाली अभिलाषा बराक तीसरी भारतीय अधिकारी बन गई हैं।
- इससे पहले मेजर सुमन गवानी को 2019 में और मेजर राधिका सेन को 2023 में यह पुरस्कार मिल चुका है।
- मेजर सुमन गवानी ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के दौरान शानदार काम किया था, जबकि मेजर राधिका सेन ने कांगो में शांति मिशन में अपनी सेवाएं दी थीं।
- यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के डिपार्टमेंट ऑफ पीस ऑपरेशंस द्वारा 2016 में शुरू किया गया था।
- इसका उद्देश्य उन शांति सैनिकों को सम्मानित करना है जो महिलाओं की सुरक्षा, समानता और शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2016 से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवार्ड उन शांति सैनिकों को सम्मानित करता है जिन्होंने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने में असाधारण नेतृत्व और प्रतिबद्धता दिखाई हो। यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाले सैन्य कर्मियों को दिया जाता है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य शांति स्थापना और शांति निर्माण प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना तथा संघर्ष से जुड़े यौन हिंसा के मामलों की रोकथाम और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत के लिए गर्व का क्षण
मेजर अभिलाषा बराक को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत के लिए गौरव का विषय है। उनकी उपलब्धि न केवल भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक और प्रभावशाली उपस्थिति को भी मजबूत करती है। महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना के क्षेत्र में उनके योगदान ने दुनिया भर में भारतीय महिलाओं की क्षमता और नेतृत्व को नई पहचान दिलाई है।