UAE: पत्थरों की छंटाई से लेकर भोजन पकाने तक..., इन प्रवासी भारतीयों ने मंदिर निर्माण के लिए दी सेवा
UAE: संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किया है। लेकिन, इस मंदिर निर्माण के दौरान कई प्रवासी भारतीयों ने सेवा दी थी। इसमें पत्थरों की छंटाई से लेकर भोजन पकाने तक हर काम शामिल है।
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सिडनी की एक गर्भवती तकनीकी विशेषज्ञ, बोस्टन के एक दंपत्ति और ब्रिटेन के एक स्कूल शिक्षक उन भारतीय प्रवासियों में शामिल थे, जो पिछले साल निर्माणाधीन पहले हिंदू मंदिर में सेवा के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) आए थे। बुधवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर का उद्घाटन किया तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। इन सेवादारों ने मंदिर के लिए पत्थरों की छंटाई से लेकर भोजन पकाने, काम की प्रगति का दस्तावेजीकरण करने, आउटरीच कार्यक्रमों से लेकर शिपमेंटर उतारने की अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
गर्भावस्था में भी मंदिर निर्माण के लिए दी सेवा
सिडनी की सॉफ्टवेयर इंजीनियर शीला पटेल गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) के दौरान कुछ सार्थक करना चाहती थीं। वह निर्माणाधीन मंदिर में सेवा करने के लिए अबू धाबी आईं थीं। पटेल ने बताया कि उनका परिवार बहुत चिंतित था। शुरुआत में वह यहां चार हफ्ते के लिए आईं थीं और अब तक वापस सिडनी नहीं लौटीं। उन्होंने बताया, मैंने यहां अपने बेटे को जन्म दिया। आठवें महीने में मेरे पति मेरे साथ आए। हम अब मार्च में वापस सिडनी जाएंगे।
मंदिर में सेवा के लिए बोस्टन से दंपत्ति आया
इसी तरह, बोस्टन में अपने पति के साथ रहने वालीं आस्था ठक्कर भी यहां आईं। उन्होंने पिछले साल अमेरिका में अपनी कंपनी के लिए यूएई से ही काम किया। उन्होंने बताया, मैं सेवा और अपने काम के बीच समय का प्रबंधन करती थी। मेरे पति भी यहीं थे। जब हमने मंदिर के बारे में सुना, तो हमने इस बारे में सोचा कि हमें क्या करना है। यह भगवान के आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देने का हमारा तरीका है।
स्कूल शिक्षक ने सेवा के लिए स्कूल से ली छुट्टी
वहीं, ब्रिटेन के एक गणित शिक्षक उमेश राजा ने स्कूल से विराम लिया और वह दो साल से अबू धाबी में हैं। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए गर्व का क्षण था। उन्होंने कहा, मैं मंदिर के लिए रेगिस्तान से पत्थर उठाने के काम को देखता था। जब मैंने ऐसा करने का फैसला किया तो मेरा परिवार पैसों को लेकर चिंतित रहता था। लेकिन, एक बार भगवान आपको इस तरह के काम के लिए भेज देता है, तो आ रास्ता ढूंढ लेते हैं।
मंदिर में सेवा में जुटे हैं अहमदाबाद के बैंकर
अहमदाबाद के बैंकर देवांश भट्ट के लिए पिछले डेढ़ महीने खास रहे हैं। उन्होंने कहा, भारत में अपनी कुछ जिम्मेदारियों की वजह से पहले नहीं आ सका। इसलिए, मैंने नए साल पर यहां आने का फैसला किया और तबसे सेवा कर रहा हूं। जब मैं आया था तब मंदिर निर्माण का कार्य अंतिम चरण में था।
मंदिर निर्माण में आई 700 करोड़ की लागत
इस मंदिर का निर्माण बीएपीएस स्वामीनाायण संस्था ने किया है। यह मंदिर दुबई-अबू धाबी शेख जायद राजमार्ग पर अल रहबा के पास बना है। मंदिर अबू मुरीखा में 27 एकड़ जगह पर 700 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण 18 लाख ईंटों और 1.8 लाख घन मीटर बलुआ पत्थरों से किया गया है। अबू धाबी के पहले हिंदू मंदिर को वास्तुकला की नागर शैली में बनाया गया है। यह ठीक वैसे ही है, जैसे अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण किया गया है।
खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा मंदिर
इस मंदिर के डिजाइन पर 2019 से काम चल रहा था। मंदिर के यूएई सरकार की ओर से जमीन दान की गई थी। यूएई में तीन अन्य हिंदू मंदिर हैं, जो दुबई में स्थित हैं। पत्थर पर वास्तुकला वाला यह खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा मंदिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में यूएई का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने इस मंदिर का उद्घाटन किया। 2015 के बाद से उनकी यह सातवीं यूएई यात्रा थी।