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Indiabulls Case: सीबीआई और दिल्ली पुलिस की चुप्पी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, IHFL मामले में कहां तक पहुंची जांच?

Tue, 28 Jul 2026 08:05 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 28 Jul 2026 08:05 PM IST
सार

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) से जुड़े कथित संदिग्ध लेनदेन की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने दोनों एजेंसियों की चुप्पी को 'चौंकाने वाला' बताया और कहा कि मामला 'लेन-देन' जैसा प्रतीत होता है। अदालत ने इतनी सख्त टिप्पणी क्यों की और अब जांच किस दिशा में जाएगी? आइए, सबकुछ विस्तार से समझते हैं...

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Indiabulls Case Supreme Court Pulls Up CBI Delhi Police Over Silence Where Does  IHFL Probe Stand
सीबीआई और ईओडब्ल्यू पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) से जुड़े कथित संदिग्ध लेनदेन की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि जांच एजेंसियों की चुप्पी 'चौंकाने वाली' है और यह मामला प्रथम दृष्टया 'लेन-देन (क्विड प्रो क्वो)' जैसा दिखाई देता है। अदालत ने कहा कि एजेंसियों ने अब तक न तो नियमित मामला (आरसी) दर्ज करने पर अंतिम फैसला लिया और न ही जांच की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट अदालत में दाखिल की।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सीबीआई और ईओडब्ल्यू ने अदालत के पहले के निर्देशों का भी पालन नहीं किया। पीठ ने कहा कि दोनों एजेंसियों के प्रमुखों को अदालत में तलब किया जा सकता था, लेकिन अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने भरोसा दिया कि दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी। इसके बाद अदालत ने फिलहाल सीबीआई निदेशक और दिल्ली पुलिस आयुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश टाल दिया। मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि जनवरी से जुलाई तक सीबीआई क्या कर रही थी और ईओडब्ल्यू अब तक अदालत को जांच की जानकारी देने से क्यों बचती रही।

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सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों से क्या सवाल पूछे?

अदालत ने कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने का उसका इरादा नहीं है, लेकिन अगर जांच में कोई अपराध नहीं बनता तो एजेंसियों को यह बात स्पष्ट रूप से अदालत के सामने रखनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि कर्ज की पूरी राशि ब्याज सहित वापस कर दी गई है और इसलिए कोई अपराध नहीं बनता, तो जांच एजेंसियों को साहस के साथ यह कहना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि ईओडब्ल्यू ने अब तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल क्यों नहीं की। पीठ ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू के आचरण को "बेहद संदिग्ध" बताया।

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याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से क्या दलील दी गई?

एनजीओ सिटिजंस व्हिसलब्लोअर्स फोरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि जनवरी में सीबीआई द्वारा दाखिल हलफनामे में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच में धन के कथित दुरुपयोग के मामले सामने आने का जिक्र था। उन्होंने कहा कि ईओडब्ल्यू ने कुछ एफआईआर दर्ज की हैं और सीबीआई, ईडी द्वारा चिह्नित पांच मामलों को यस बैंक जांच के साथ जोड़ने पर विचार कर रही थी। भूषण ने यह भी बताया कि इंडियाबुल्स के पूर्व प्रवर्तक समीर गहलौत लंदन चले गए हैं और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाना चाहिए। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि जांच जारी है। उन्होंने बताया कि एक मामले की जांच सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) कर रहा है, जबकि चार मामलों की जांच ईओडब्ल्यू कर रही है।

कंपनी और उसके वकीलों ने क्या कहा?

  • सम्मान कैपिटल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में कहा कि समीर गहलौत का अब कंपनी में कोई शेयर नहीं है और उनका कंपनी के संचालन से कोई संबंध नहीं है। 
  • वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और नलिन कोहली ने भी किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सम्मान कैपिटल द्वारा दिए गए सभी ऋण ब्याज सहित पूरी तरह लौटाए जा चुके हैं। 
  • दूसरी ओर, एनजीओ का आरोप है कि आईएचएफएल और उसके पूर्व प्रवर्तकों ने बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों से जुड़ी संस्थाओं को संदिग्ध ऋण दिए, जिनकी रकम कथित रूप से प्रवर्तकों की कंपनियों में वापस पहुंचाई गई ताकि उनकी व्यक्तिगत संपत्ति बढ़ाई जा सके। 
  • एनजीओ ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 फरवरी 2024 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जांच के निर्देश देने से इनकार कर दिया गया था।

 

अब क्या करेगी सीबीआई और ईओडब्ल्यू?

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को मामले में अब तक उठाए गए हर कदम की जानकारी देनी होगी। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह जांच एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों से सीधे जवाब मांग सकती है।

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