{"_id":"5f617b3b368cab54f80878e0","slug":"india-statement-in-united-nations-that-after-many-tries-by-neighbor-country-india-rebirth-democracy-in-jammu-and-kashmir","type":"story","status":"publish","title_hn":"संयुक्त राष्ट्र में भारत का बयान, जम्मू-कश्मीर में जमीनी लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
संयुक्त राष्ट्र में भारत का बयान, जम्मू-कश्मीर में जमीनी लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया
Wed, 16 Sep 2020 08:24 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
Published by: Tanuja Yadav
Updated Wed, 16 Sep 2020 08:24 AM IST
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत ने पड़ोसी देश की ओर से जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को घुसपैठ कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लगातार कोशिशों के बावजूद राज्य में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया है और यहां सामाजिक और आर्थिक विकास को गति दी है।
विज्ञापन
यहां मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र में एक बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्रमणि पांडे ने क्षेत्र के बारे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बेचलेट के बयान पर खेद व्यक्त किया।
विज्ञापन
पांडे ने कहा कि भारत सभी मानवाधिकार को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता और देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देते हुए मानवाधिकार के एजेंडे और इस पर बहस निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को 2019 में खत्म किए जाने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस बदलाव की वजह से केंद्र-शासित क्षेत्र के लोग उन्हीं मूलभूत अधिकारों को हासिल कर रहे हैं, जो अधिकार भारत के अन्य हिस्सों के लोगों के लिए हैं।