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मदद का हाथ: मानवीय सहायता के तौर पर भारत ने अफगानिस्तान रवाना की 2500 मीट्रिक टन गेहूं की पहली खेप

Tue, 22 Feb 2022 07:59 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अट्टारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अट्टारी Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 22 Feb 2022 07:59 PM IST
सार

भारत सरकार कह चुकी है कि हम संकट से जूझ रहे देश अफगानिस्तान को मानवीय मदद उपलब्ध कराना जारी रखेंगे।

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India sent first consignment of humanitarian aid of wheat to Afghanistan via Pakistan from Attari Wagah border
मदद की पहली खेप को रवाना करते विदेश सचिव श्रृंगला व अन्य - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत ने अफगानिस्तान को मदद के रूप में जो 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं देने का वादा किया था उसकी पहली खेप मंगलवार को पाकिस्तान के रास्ते रवाना हो गई। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और अफगानिस्तान के राजदूत फरीद मामुंदजई ने अट्टारी-वाघा बॉर्डर पर 2500 मीट्रिक टन गेहूं की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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बता दें कि इस मानवीय मदद को भेजने के लिए पाकिस्तान के साथ महीनों से वार्ता चल रही थी। इसके बाद हाल ही में तय हुआ था कि अट्टारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत सड़क मार्ग से अफगानिस्तान को गेहूं की पहली खेप रवाना करेगा। जानकारी के अनुसार यह खेप अट्टारी-वाघा सीमा से होते हुए पाकिस्तान के रास्ते से अफगानिस्तान पहुंचेगी।
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भारत सरकार ने पाकिस्तान के रास्ते 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं अफगानिस्तान भेजने के लिए ट्रांजिट सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके लिए सात अक्तूबर 2021 को पाकिस्तान सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया था। पाकिस्तान ने 24 नवंबर को इस प्रस्ताव का उत्तर दिया था, जिसके बाद परिवहन को लेकर बातचीत शुरू हुई थी।
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श्रृंगला अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने भी पहुंचे 



इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह खेप भारत की ओर से अफगानिस्तान के लोगों को 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्धता का हिस्सा है। मानवीय सहायता के रूप में गेहूं की आपूर्ति कई खेप में की जाएगी। यह खेप अफगानिस्तान के जलालाबाद में संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (यूएनडब्ल्यूएफपी) को सौंपी जायेगी ।

शनिवार को अफगानिस्तान पहुंची थी दवाओं की खेप
अफगानिस्तान को मदद उपलब्ध कराने के लिए अपने प्रयासों के तहत भारत पिछले कुछ महीनों में बड़ी मात्रा में जीवन रक्षक दवाओं समेत कई अन्य जरूरी वस्तुएं इस संकटग्रस्त देश में पहुंचाई हैं। दवाओं की पिछली खेप शनिवार को ही अफगानिस्तान पहुंची थी।  इस खेप में ढाई टन चिकित्सा सामग्रियां और सर्दियों के कपड़े पहुंचाए गए थे।

तालिबान की सरकार को भारत ने नहीं दी है मान्यता
यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारत ने अफगानिस्तान में तालिबान की नई सरकार को मान्यता नहीं दी है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि काबुल में एक समावेशी सरकार का गठन होना चाहिए। भारत सरकार ने यह भी कहा है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए कतई नहीं होना चाहिए।

अफगानिस्तान : बामियान में तालिबान को करना पड़ रहा विरोध का सामना
तालिबान अफसरों ने सोमवार को दावा किया कि उन्हें अफगानिस्तान के बामियान प्रांत में कुछ गुटों के विरोध का जबरदस्त सामना करना पड़ रहा है। तालिबान के मंसूरी कोर के पांचवें ब्रिगेड के योजना व संचालन प्रमुख अल्लाह मोहम्मद बख्तियार ने कहा, हम बामियान के सभी लोगों के साथ काम करने को उत्सुक है ताकि क्षेत्र की सुरक्षा से समझौता न हो। टोलो न्यूज के मुताबिक, बामियान के कई निवासी तालिबानी ताकतों द्वारा लोगों के उत्पीड़न की आलोचना कर रहे हैं।

इस कारण कई छोटे समूह तालिबान के विरोध में उठ खड़े हुए हैं। टोलो न्यूज ने बताया कि समूहों की पहचान किए बिना 203वीं मंसूरी कोर की 5वीं ब्रिगेड के कमांडर मुल्ला मोहम्मद शिरीन ने कहा, यहां विदेशी गिरोह हैं और वे सुरक्षा को बाधित करने और विभिन्न समस्याएं पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सोमवार को हल्के और भारी हथियारों से लैस 1,500 तालिबान बलों का एक काफिला प्रांत की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बामियान गया। इसका क्षेत्र में जबरदस्त विरोध हो रहा है।

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