फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   India pakistan china votes against UNHRC resolution censuring Iran protest crackdown

UN: मानवाधिकार परिषद में ईरान के साथ खड़े हुए भारत-पाकिस्तान और चीन; किया ऐसा काम, US और पश्चिमी देश चौंके

Sat, 24 Jan 2026 11:54 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 24 Jan 2026 11:54 AM IST
सार

UN: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने इस बार तटस्थ रहने की नीति को छोड़कर सीधे ईरान के पक्ष में वोट दिया, जो पश्चिमी देशों को चौंकाने वाला कदम था। ईरान में विरोध प्रदर्शनों और मानवाधिकार उल्लंघनों की निंदा करते हुए यह प्रस्ताव लाया गया था। यह दुर्लभ अवसर था, जब भारत, पाकिस्तान और चीन ने एक सुर में प्रस्ताव के विरोध में वोट किया। 

विज्ञापन
India pakistan china votes against UNHRC resolution censuring Iran protest crackdown
यूएनएचआरसी - फोटो : एक्स/ओसीएचसीआर डॉट ओआरजी

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 39वें विशेष सत्र में शुक्रवार को भारत ने पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका को चौंका दिया। दरअसल, इस सत्र में ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर पश्चिमी देशों की ओर से एक निंदा प्रस्ताव पेश किया गया। लेकिन भारत ने खुले तौर पर इसमें ईरान का साथ दिया और इस प्रस्ताव के विरोध में वोट किया। 
विज्ञापन

 
इस प्रस्ताव में क्या था?
आइए सबसे पहले जानते हैं कि यह प्रस्ताव क्या था और इसका मकसद क्या था। पश्चिमी देशों की ओर से प्रस्ताव संख्या ए/एचआरसी/एस/एल.1 पेश किया गया, जिस पर मतदान किया गया। इस प्रस्ताव का मकसद 'इस्लामी गणराज्य ईरान में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति' की निंदा करना था। खासतौर पर ईरान में पिछले महीने भड़के विरोध प्रदर्शनों और हजारों लोगों की मौतों के मद्देनजर यह प्रस्ताव लाया गया था। पश्चिमी देश चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र ईरान पर सख्त रुख अपनाए। लेकिन वैश्विक दक्षिण के कई अहम देशों ने इसे खारिज किया और पश्चिमी एजेंडा करार दिया। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: 'बाहर के लोगों ने की हिंसा', प्रदर्शन को लेकर ईरान का बड़ा दावा; कहा- थोपा गया तो युद्ध के लिए तैयार
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रस्ताव के पक्ष-विपक्ष में कितने वोट पड़े?
प्रस्ताव में तेहरान से मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने की मांग की गई थी। इसे 47 सदस्यीय परिषद में पेश किया गया। परिषद के 25 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया। जबकि 14 सदस्य देश इसमें तटस्थ रहे। वहीं सात देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया, जिनमें भारत और चीन भी शामिल थे। मतदान के दौरान असेंबली हॉल में माहौल तनावपूर्ण दिखा। प्रस्ताव को लेकर किए गए मतदान के नतीजे स्क्रीन पर दिखाए गए, जिसमें दुनिया दो धड़ों में बंटती नजर आई। 

एक सुर में ईरान के साथ खड़े हुए भारत, पाकिस्तान और चीन
आम तौर पर भारत इस तरह के विवादित प्रस्तावों पर सीधे 'हां' या 'ना' वोट देने की बजाय 'तटस्थ' रहने की कूटनीति अपनाता रहा है। लेकिन इस बार उसने तटस्थ रहने के बजाय सीधे 'ना' वोट किया। जिन देशों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया उनमें भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक, वियतनाम, इंडोनेशिया और क्यूबा शामिल थे। यह दुर्लभ मौका था, जब किसी अंतरराष्ट्रीय पर भारत और उसके पड़ोसी देश चीन व पाकिस्तान ने एक ही पक्ष की तरफ वोट किया। 
 

किन पश्चिमी देशों ने किया प्रस्ताव का समर्थन?
इस प्रस्ताव के समर्थन में 25 देशों ने वोट किया। इनमें प्रमुख रूप फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, कोस्टा रिका, चिली जैसे देश शामिल थे। 


ये भी पढ़ें: US: जॉर्जिया में पारिवारिक विवाद के चलते गोलीबारी, चार लोगों की मौत; एक भारतीय नागरिक भी शामिल

वोटिंग के दौरान तटस्थ रहे ये देश
वहीं, वैश्विक दक्षिण के कई देशों ने मतदान से दूरी बनाई। कुल 14 सदस्यों देशों ने मतदान से परहेज किया। यानी इन देशों ने वोटिंग के दौरान तटस्थ रहने का विकल्प चुना। इनमें ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, कतर, कुवैत, मलयेशिया और बांग्लादेश शामिल हैं। 

भारत ने क्यों प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया?
पारंपरिक रूप से विवादित अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तटस्थ रहने की नीति अपनाता रहा है। लेकिन इस बार उसने सीधे विपक्ष में वोट दिया है। इसके भारत की विदेश नीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अमेरिका की ओर से भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में तनाव है। यूएनएचआरसी में अपने वोट से भारत ने स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम के किसी भी दबाव में नहीं आएगा। ईरान के साथ भी भारत के मजबूत संबंध रहे हैं। अमेरिकी की ओर से सख्त प्रतिबंध लगाए जाने से ईरान भारत की उर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता रहा। इसके अलावा, रणनीति रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के लिए ईरान भारत के अहम है। 
 
विशेषज्ञों की मानें तो भारत ने सीधे विरोध में वोट डालकर यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि वह दोहरा मापदंडों के खिलाफ खड़ा है और मानवाधिकार उल्लंघन के नाम पर किसी देश के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा। हालांकि, 25 वोट होने के कारण यह प्रस्ताव परिषद में पारित हो गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed