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China: चीनी विदेश मंत्री का दावा- मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष में चीन ने निभाई अहम भूमिका
Tue, 30 Dec 2025 09:30 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 30 Dec 2025 09:30 PM IST
सार
China: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जैसे मुद्दों में चीन ने डीजीएमओ के सीधे संवाद से हुआ और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
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चीन के विदेश मंत्री वांग यी।
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन गरमागरम मुद्दों में शामिल था, जिनमें चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। भारत का पक्ष स्पष्ट रहा है कि सात से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुई झड़प का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के सीधे संवाद के जरिये हुआ था।
विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान तय की, जो 15:35 बजे शुरू हुई थी। भारत यह भी लगातार कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई जगह नहीं है।
वांग यी ने बीजिंग में अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन के विदेश संबंधों पर आयोजित संगोष्ठी में कहा, इस साल स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष दूसरी विश्व युद्ध के बाद सबसे अधिक भड़के। भू-राजनीतिक अशांति लगातार फैलती रही। उन्होंने कहा, स्थायी शांति बनाने के लिए हमने निष्पक्ष और न्यायपूर्ण रुख अपनाया और मूल कारणों पर फोकस किया।
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ये भी पढ़ें: ड्रोन हमलों के बाद पुतिन का बड़ा फैसला, अहम ठिकानों की सुरक्षा के लिए रिजर्व सैनिकों की होगी वापसी
उन्होंने कहा कि चीन ने उत्तर म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दा, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फलस्तीन और इस्राइल के बीच मुद्दे तथा हाल ही में कंबोडिया और थाईलैंड के संघर्ष में मध्यस्थता की।
दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था। सात से 10 मई तक ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था। इस दौरान चीन की भूमिका आलोचना और शक के घेरे में रही, खासकर पाकिस्तान को सैन्य मदद देने के कारण।
चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयंम बरतने का आग्रह किया था और भारत के हमलों पर खेद व्यक्त किया था। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था, चीन इस सुबह की भारत की सैन्य कार्रवाई को खेदजनक मानता है। उसने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सक्रिय रूप से मदद दी। इसने बीजिंग और नई दिल्ली के संबंदों पर चीन-पाकिस्तान संबंधों के नकारात्मक असर को उजागर किया।
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विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान तय की, जो 15:35 बजे शुरू हुई थी। भारत यह भी लगातार कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से जुड़े मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई जगह नहीं है।
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वांग यी ने बीजिंग में अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन के विदेश संबंधों पर आयोजित संगोष्ठी में कहा, इस साल स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष दूसरी विश्व युद्ध के बाद सबसे अधिक भड़के। भू-राजनीतिक अशांति लगातार फैलती रही। उन्होंने कहा, स्थायी शांति बनाने के लिए हमने निष्पक्ष और न्यायपूर्ण रुख अपनाया और मूल कारणों पर फोकस किया।
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उन्होंने कहा कि चीन ने उत्तर म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दा, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फलस्तीन और इस्राइल के बीच मुद्दे तथा हाल ही में कंबोडिया और थाईलैंड के संघर्ष में मध्यस्थता की।
दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल में आतंकवादी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था। सात से 10 मई तक ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था। इस दौरान चीन की भूमिका आलोचना और शक के घेरे में रही, खासकर पाकिस्तान को सैन्य मदद देने के कारण।
चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयंम बरतने का आग्रह किया था और भारत के हमलों पर खेद व्यक्त किया था। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था, चीन इस सुबह की भारत की सैन्य कार्रवाई को खेदजनक मानता है। उसने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने का आह्वान किया। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सक्रिय रूप से मदद दी। इसने बीजिंग और नई दिल्ली के संबंदों पर चीन-पाकिस्तान संबंधों के नकारात्मक असर को उजागर किया।
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