फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   India-Nepal study centre research on Sanskrit texts and publication of pandulipi

India-Nepal: संस्कृत ग्रंथों पर शोध, पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए स्थापित करेंगे अध्ययन केंद्र

Mon, 01 Apr 2024 08:15 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: जलज मिश्रा Updated Mon, 01 Apr 2024 08:15 AM IST
सार

काठमांडो में तीन दिवसीय नेपाल-भारत अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन के अवसर पर पांच सूत्री प्रस्ताव अपनाया गया। प्रतिभागियों ने महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के सहयोग से नेपाल में गुरुकुल के विकास के लिए सहायता प्रदान करने का संकल्प भी लिया।

विज्ञापन
India-Nepal study centre research on Sanskrit texts and publication of pandulipi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत व नेपाल के विद्वानों ने संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है। इसके तहत दोनों देशों के विद्वान हर साल अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन आयोजित करेंगे। संस्कृत ग्रंथों, विशेष रूप से हिमालयी राष्ट्र में पाई जाने वाली पांडुलिपियों पर शोध व प्रकाशन की व्यवस्था करने के लिए एक अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाएगा।

विज्ञापन

काठमांडो में तीन दिवसीय नेपाल-भारत अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन के अवसर पर पांच सूत्री प्रस्ताव अपनाया गया। प्रतिभागियों ने महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन के सहयोग से नेपाल में गुरुकुल के विकास के लिए सहायता प्रदान करने का संकल्प भी लिया। प्रस्ताव के अनुसार, नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान नेपाल, दोनों देशों के संस्कृत अध्ययन केंद्र के प्रधान कार्यालय के रूप में कार्य करेगा। यह केंद्र संयुक्त अनुसंधान करेगा तथा नेपाल व भारत के संस्कृत ग्रंथों के प्रकाशन की व्यवस्था करेगा। यह नेपाल में पाई गई संस्कृत पांडुलिपियों का भी अध्ययन करेगा।

विज्ञापन

नेपाल के पुरातत्व विभाग में संरक्षित हैं पांच लाख संस्कृत पांडुलिपियां
अनुमान है कि नेपाल के पुरातत्व विभाग में लगभग पांच लाख अप्रकाशित संस्कृत पांडुलिपियां संरक्षित हैं। नीति अनुसंधान की तरफ से रविवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, भारत में नेपाली संस्कृत छात्रों की भाषा सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (दिल्ली) नेपाल में गुरुकुलों के पुस्तकालयों की सुविधा प्रदान करेगा और नेपाल में संस्कृत शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराएगा। मालूम हो कि हाल ही में भारत ने नेपाल को बिजली देने की समयसीमा को भी बढ़ाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पाली व प्राकृत भाषाओं का भी किया जाएगा संरक्षण
सम्मेलन में संस्कृत, पाली व प्राकृत भाषाओं के संरक्षण के साथ-साथ नेपाल और भारत के धर्म, संस्कृति, दर्शन, इतिहास व पुरातत्व को बढ़ावा देने का संकल्प भी अपनाया गया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (दिल्ली) व इंडिया फाउंडेशन (दिल्ली) के सहयोग से नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान की तरफ से आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में दोनों देशों के 120 से अधिक संस्कृत विद्वान, प्रोफेसर व सरकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed