भारत का विकल्प नहीं हो सकता है चीन, संबंध न बिगाडे़ नेपाल: विशेषज्ञ
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सीमा विवाद को लेकर भारत-नेपाल के रिश्ते खराब नहीं होने चाहिए, क्योंकि नेपाल को भारत से हर जरूरी वस्तु मिलती है। ऐसे में भारत के विकल्प के रूप में चीन नहीं हो सकता है। नेपाल के एक जाने-माने अर्थशास्त्री ने यह अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, नेपाल सिर्फ जमीन से घिरा हुआ देश नहीं है, बल्कि यह तीन ओर से भारत से ही घिरा हुआ है। अगर भारत ने जवाबी कार्रवाई की तो हालात बिगड़ सकते हैं और इसका देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पडे़गा।
हाल ही में भारतीय इलाके लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना क्षेत्र बताकर नेपाल की संसद ने संविधान संशोधन कर अपने नए नक्शे को मंजूरी दी थी, जिससे दोनों देशों के बीच विवाद और गहरा गया था। हालांकि, भारत ने नेपाल के इस कदम को सिरे से खारिज करते हुए ऐतिहासिक तथ्यों से परे बताया था।
साउथ एशिया वॉच ऑन ट्रेड इकोनॉमिक्स एंड एन्वायरमेंट (एसएडब्ल्यूटीईई) के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. पोश राज पांडेय के मुताबिक, नेपाल के इस कदम का आर्थिक प्रभाव भारत की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। 20 साल से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास के मसले पर काम कर रहे डॉ. पोश राज ने कहा कि भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि नेपाल के इस कदम का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, इस मामले को जल्द से जल्द बातचीत कर सुलझा लेना चाहिए।
- भारत से आयात करीब 66 फीसदी, चीन से सिर्फ 14 फीसदी
विश्व व्यापार संगठन में सदस्य रह चुके डॉ. पोश राज ने कहा, नेपाल में सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भारत से ही होती है। नेपाल करीब दो तिहाई (करीब 66 फीसदी) आयात भारत से ही करता है, जबकि उसका चीन से आयात महज 14 फीसदी ही है। नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व सदस्य रहे डॉ. पोश राज ने कहा, उत्तर की ओर से समुद्र तक पहुंचने का सबसे करीबी रास्ता 4,000 किमी दूर है, जबकि भारत की ओर से समुद्र तक यानि कोलकाता तक जाने का रास्ता इससे तीन गुना कम है।
- निर्यात भी सबसे ज्यादा 60 फीसदी भारत को
पोश राज के मुताबिक, नेपाल अपने कुल निर्यात का 60 फीसदी से ज्यादा भारत को करता है। वहीं, चीन को सिर्फ दो फीसदी ही निर्यात करता है। इससे पहले 2015 में नेपाल के भारत से संबंध उस वक्त खराब हो गए थे, जब भारतीय मूल के मधेशियों ने सरकार के खिलाफ छह महीने से ज्यादा आंदोलन किया था। इससे नेपाल को बडे़ पैमाने पर आर्थिक नाकाबंदी झेलनी पड़ी थी।
इसके बाद से ही नेपाल ने चीन से संबंध बढ़ाने शुरू कर दिए थे। चीन नेपाल को अपने प्रभाव वाले तिब्बत से सड़क नेटवर्क जोड़ने में मदद कर रहा है। चीन की योजना तिब्बत के शिगात्से से काठमांडो तक रेल नेटवर्क बनाने की भी है, जो तिब्बत की राजधानी ल्हासा से सीधे रेल नेटवर्क से जुडे़गा। इसके अलावा, चीन ने नेपाल को वस्तुओं की ढुलाई के लिए चार बंदरगाह बनाने का भी प्रस्ताव दिया है।