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US: पीयूष गोयल बोले- भारत ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी, जल्द अमेरिका से व्यापार में बढ़ोतरी की उम्मीद

Wed, 24 Sep 2025 09:25 AM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 24 Sep 2025 09:25 AM IST
सार

न्यूयॉर्क में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाएगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत आने वाले वर्षों में नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका का मजबूत साझेदार बनेगा और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में अपनी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

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India is a big player in the energy field- Piyush Goyal at US-India Strategic Partnership Forum
पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और वैश्विक ऊर्जा ग्रिड को लेकर कई अहम बातें रखीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका मिलकर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी साझेदारी करेंगे, जिससे न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापार भी तेजी से बढ़ेगा।
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ऊर्जा सुरक्षा में अमेरिका की बड़ी भूमिका
पीयूष गोयल ने कहा कि दुनिया अब मान चुकी है कि ऊर्जा सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है जहां सबको मिलकर काम करना होगा। 'भारत ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी है। हम अलग-अलग देशों से बड़ी मात्रा में ऊर्जा का आयात करते हैं, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। आने वाले वर्षों में हम अमेरिका के साथ ऊर्जा उत्पादों के व्यापार को और बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, हमारी ऊर्जा सुरक्षा योजनाओं में अमेरिका की बड़ी भूमिका होगी, जिससे भारत को स्थिर और विविध स्रोतों से ऊर्जा मिलेगी। इससे हमें अमेरिका के साथ ऊर्जा से आगे भी कई नए अवसर मिलेंगे।'
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परमाणु ऊर्जा पर सहयोग
इस दौरान पीयूष गोयल ने परमाणु ऊर्जा को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'परमाणु ऊर्जा ऐसा क्षेत्र है जहां भारत और अमेरिका मिलकर आगे बढ़ सकते हैं। पहले कुछ तकनीकी और कानूनी मुद्दे थे जिन्हें सुलझाने पर काम हो रहा है। अमेरिका में छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर पावर पर नवाचार हो रहे हैं, जिनसे भारत को फायदा हो सकता है। भारत आने वाले वर्षों में अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को दोगुना करेगा। हालांकि, बड़े स्तर पर इसे बढ़ाने के लिए लागत और कीमत से जुड़े कुछ चुनौतियों का हल करना होगा।'
 
स्वच्छ ऊर्जा में बड़ा लक्ष्य- 1000 गीगावॉट की ओर
भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजना पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि अगले 5 वर्षों में भारत अपनी क्लीन एनर्जी क्षमता को 250 गीगावॉट से बढ़ाकर 550 गीगावॉट तक ले जाएगा। उन्होंने कहा, 'भारत की सबसे बड़ी ताकत यह है कि हमारे पास 500 गीगावॉट की एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड है, जिसमें आधी क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा की है। यह ग्रिड देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर होने वाली ऊर्जा मांग को संतुलित करती है। यह स्थिरता अमेरिकी कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी, खासकर उन कंपनियों के लिए जो भारत में डेटा सेंटर्स लगाना चाहती हैं। आने वाले समय में यह 500 गीगावॉट बढ़कर 1000 गीगावॉट तक पहुंच जाएगा।'
 
स्टार्टअप और इनोवेशन पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान कहा कि भारत के पास बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली इंजीनियर और युवा हैं, जो दुनिया की कंपनियों के लिए समाधान दे सकते हैं। पीयूष गोयल ने कहा 'भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम बहुत तेजी से बढ़ रहा है। नई कंपनियां पारंपरिक ऊर्जा से आगे बढ़कर नए विचार लेकर आ रही हैं। यह वही दिशा है जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए 'सुविधाजनक कार्रवाई' के रूप में बताया था।'

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'वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड' का सपना
पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री मोदी की 20 साल पुरानी सोच को याद किया। उन्होंने कहा, 'लगभग 20 साल पहले पीएम मोदी ने 'वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड' की परिकल्पना रखी थी। उस समय दुनिया ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आज दुनिया सौर ऊर्जा को भविष्य के बड़े स्रोत के रूप में देख रही है। जब हम भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमसी) की बात करते हैं, तो इसमें सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को देशों के बीच ट्रांसमिशन ग्रिड के जरिए जोड़ना एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।'
 
पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारत सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया के साथ अंडरवाटर केबल्स के जरिए बिजली प्रवाह पर बातचीत कर रहा है। पश्चिम की ओर मध्य पूर्व के देशों से भी इसी तरह का ग्रिड जोड़ने की योजना है। 'अगर यह योजना सफल होती है, तो यह पूरी दुनिया की ऊर्जा संरचना को बदल देगी और सीमाओं के पार स्थायी एवं मजबूत ऊर्जा बाजार तैयार होंगे।'
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