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Hindi News ›   World ›   India development model praised at 52nd UN Human Rights Council meet in Geneva

UN: संयुक्त राष्ट्र में भारत का बजा डंका, 52वीं मानवाधिकार परिषद की बैठक में विकास मॉडल की हुई प्रशंसा

Sat, 18 Mar 2023 05:42 PM IST
Jeet Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 18 Mar 2023 05:42 PM IST
सार

बैठक में कहा गया कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है साथ ही भारत ने महिलाओं, दलितों और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों को आगे बढ़ाने में प्रगति की है।
 

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India development model praised at 52nd UN Human Rights Council meet in Geneva
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

जिनेवा में 52वीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में भारत का खूब डंका बजा है। इस बैठक में भारत के विकास मॉडल की प्रशंसा हो रही है। बैठक में एनजीओ द्वारा भारतीय शिक्षा मॉडल जिक्र हुआ और संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्य राज्यों से इसका पालन करने का आग्रह कर रहे हैं।

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संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) एनजीओ के साईं संपत ने अपने मौखिक तौर पर जिनेवा में पढ़ने वाली एक दलित लड़की रोहिणी की कहानी का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वह भारत सरकार द्वारा दी गई एक करोड़ रुपये की लाभार्थी रही हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के 20 करोड़ दलित लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए एक सम्मान की बात है। जिनेवा, स्विट्जरलैंड में पीएचडी करने के लिए मुझे छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए मैं भारत सरकार का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं।
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उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्ग से आने वाले व्यक्ति के रूप में, मैंने जातिगत भेदभाव देखा है। वहीं भारत में दलितों की स्थिति अन्य पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति से कहीं बेहतर है। साथ ही संपत ने कहा भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और ओबीसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे संविधान की शक्ति के लिए एक वसीयतनामा हैं। इससे पता चलता है कि विविध समुदायों और पृष्ठभूमि के लोग बाधाओं को तोड़ सकते हैं और अवसर पैदा कर सकते हैं।
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वहीं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में अफ्रीका संघ का प्रतिनिधित्व कर रहे सोमयाजी ने अपने मौखिक हस्तक्षेप के दौरान भारत के विकास के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद से मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। भारत ने महिलाओं, दलितों और अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों को आगे बढ़ाने में प्रगति की है।

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