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Hindi News ›   World ›   India China Tension on LAC will be prolonged, British expert says Time to change strategy on Indo-China border

एलएसी पर लंबा चलेगा तनाव... भारत-चीन सीमा को लेकर रणनीति बदलने का वक्त

Sat, 27 Jun 2020 03:55 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 27 Jun 2020 03:55 AM IST
सार

  • ब्रिटिश विशेषज्ञ के मुताबिक भारत-चीन सीमा पर तनाव घटा नहीं बल्कि लंबा चलेगा
  • 1967 के बाद बिना गोली चले हुई इस सबसे घातक हिंसक झड़प के मायने अलग

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India China Tension on LAC will be prolonged, British expert says Time to change strategy on Indo-China border
कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक जवान। - फोटो : PTI

विस्तार

भारत और चीन के बातचीत से पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर जारी तनाव कम करने के दावों के बीच ब्रिटिश विशेषज्ञ का मानना है कि यह फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा और लंबा चलेगा। उनकी राय है कि 1967 के बाद बिना गोली चले हुई इस सबसे घातक हिंसक झड़प के मायने अलग हैं।

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ऐसे में दोनों देशों को सीमाओं को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरत है। कुछ के मुताबिक चीन ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। दक्षिण एशियाई मामलों के ब्रिटिश विशेषज्ञ एंटोइन लेविस्की के मुताबिक भारतीय सेना के 20 जवानों के साथ जो हुआ इससे साफ है कि चीन ने इसके लिए पूरी तैयारी की थी।
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जिस तरह 9 से 16 जून के बीच 200 वाहनों को गलवां घाटी के पास पहुंचाया गया, इससे संभव है कि चीनी सैनिकों ने वहां कार्रवाई के लिए बेस तैयार किया। इससे भारत सीमा के लिए चीन के सामरिक दृष्टिकोण में बदलाव को देखा जा सकता है।
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तेजी से हालात नियंत्रण के बाहर होंगे
लेविस्की ने कहा, गलवां की घटना के बाद दिल्ली और बीजिंग के बीच गलतफहमी और गलत अनुमान बढ़ते दिखे। यह दिखा कि दोनों सरकारों की अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से सीमा पर हालात बेकाबू हो रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों को सतर्क होने की जरूरत है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में ऐसे तनाव से बचने के लिए भारत और चीन को सीमाओं को लेकर 2013 में हुए करार के आगे सोचने की जरूरत है। कूटनीतिक व सैन्य दोनों स्तर पर नए और सख्त प्रावधान करने होंगे। सेनाओं के बीच संकल्पों को व्यवस्थित करने के तरीके निकालने होंगे। ताकि ऐसे हादसे दोहराये न जाएं।

चीन की चाल के कुछ अहम मोड़

लेविस्की के अनुसार चीन की इस चाल के पीछे कई अहम मोड़ हैं। चीन ने समय चुनने में विशेष सावधानी बरती है। भारत 90 दिनों से कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन में है। ऐसे में सरकार पर तनाव कम नहीं है, चीन ने इसका फायदा उठाते हुए गलवां घाटी के पास सैन्य गतिविधियां बढ़ा दीं।

अपने पांचों कमान में रह चुके अनुभवशाली लेफ्टिनेंट जनरल शू किलिंग को पश्चिमी कामन का जिम्मा सौंपना भी रणनीति का हिस्सा था। चीन ने गलवां में अपने सैनिकों की संख्या भी तेजी से बढ़ाई। कुछ साक्ष्य ऐसे भी मिले हैं जिनके मुताबिक गलवां के पास 12 होवित्जर और टाइम 88 टैंक पहुंचाए गए।

युद्ध नहीं बस दमखम दिखाने की चाल
लेविस्की ने कहा, चीन की रणनीतिक तैयारी दरअसल किसी युद्ध की मंशा से नहीं है। बल्कि यह महज सीमा पर तनाव बढ़ाकर दमखम दिखाने की चाल है। वह दक्षिण सागर में भी इसी तरह की रणनीति अपनाता है।

इन तीन बातों पर देना होगा ध्यान

  • सीमा पर शांति: लेविस्की के मुताबिक दोनों देशों के बीच रिश्ते सीमा पर शांति के बगैर बहाल नहीं हो सकते। भारत-चीन के मामले में दोनों उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देश बाजारवाद के मुद्दे पर सहयोग की धारणा रखते हैं। ऐसे में सीमा पर रिश्ते बिगड़ने पर आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, हालांकि इस बार कड़वाहट अधिक है। ऐसे में दोनों देशों को इस पर ध्यान देना होगा।
  • चीन की मनमानी रोकनी होगी: चीन लगातार अपनी सभी सीमाओं पर मनमाने ढंग से निर्माण कर रहा है और सैन्य अड्डे बना रहा है। ऐसे में उसकी मनमानी रोकना बेहद जरूरी है। सीमाओं की अपनी भाषा, आयाम और नियम होते हैं। भारत को चीन को दक्षिण सागर जैसी मनमानी नहीं करने देनी चाहिए।
  • सीमा की सूचनाओं पर नियंत्रण बढ़ाना होगा: लेविस्की के मुताबिक मौजूदा दौर में दोनों देशों के पास सीमा पर होने वाली गतिविधियों की सूचनाओं पर नियंत्रण कम हुआ है। हालांकि चीन इस मामले में मजबूत है। पूरी दुनिया में विवाद से जुड़ी चर्चा तेज है। ऐसे में सोशल मीडिया पर अफवाहों को हवा मिलती है। इसका वैश्विक असर बड़ा होता है। सीमा विवाद तब द्विपक्षीय नहीं रहता और इसका असर सबसे पहले बाजार पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने मृतकों की संख्या का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के 20 जवान शहीद होने की सूचना पूरे विश्व को है, लेकिन चीन के कितने सैनिक मारे गए इसके बारे में कोई सुराग नहीं है।
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