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आतंकियों का डर: इमरान खान ने कहा- पाक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों नहीं देंगे इजाजत
Wed, 23 Jun 2021 01:30 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, इस्लामाबाद
एजेंसी, इस्लामाबाद
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 23 Jun 2021 01:30 AM IST
सार
- पाकिस्तानी पीएम ने कहा, आतंकी बदला लेने के लिए हम पर कर सकते हैं हमला
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इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
पीएम इमरान खान ने अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई के लिए पाकिस्तान के भीतर अमेरिकी सैन्य ठिकाने बनाने की इजाजत देने की संभावना को खारिज कर दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे आतंकी बदला लेने के लिए देश पर हमले कर सकते हैं। इमरान ने अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट में एक आलेख में यह विचार रखे।
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बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन इस सप्ताह के अंत में व्हाइट हाउस में अफगान नेताओं के साथ बैठक करने वाले हैं। खान ने पाकिस्तान में ऐसे अमेरिकी ठिकानों की प्रभाव क्षमता पर भी सवाल उठाए। क्षेत्र में सैन्य ठिकाने बनाने के लिए अमेरिका की नजर पाकिस्तान की ओर होने संबंधी खबरों के बीच खान ने कहा, हम पहले ही इसकी भारी कीमत चुका चुके हैं। अब ये खतरा मोल नहीं ले सकते।
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खान ने पाक में अमेरिकी सैन्य बेस को इजाजत न देने के पीछे कारण बताया कि यदि हम ऐसी जगह सैन्य ठिकाने बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं, जहां से अफगानिस्तान पर बम बरसाए जाएंगे तो अफगानिस्तान में गृह युद्ध छिड़ जाएगा। ऐसे में आतंकवादी बदले की भावना से पाकिस्तान को फिर से निशाना बनाएंगे। इससे पहले 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में संयोजन के लिए पाक ने देश में सैन्य ठिकानों की मंजूरी दी थी।
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जो काम अमेरिका 20 साल में नहीं कर पाया, वह अब कैसे कर लेगा
इमरान खान ने पूछा, अमेरिका के पास सबसे ज्यादा ताकतवर सैन्य मशीनरी है, वह भी अफगानिस्तान में रहकर 20 साल में युद्ध नहीं जीत पाया तो फिर वह हमारे देश में सैन्य ठिकानों से यह कैसे कर पाएगा। खान ने कहा, हम गृह युद्ध नहीं बल्कि बातचीत के जरिए शांति कायम करना चाहते हैं। हम ऐसा कोई खतरा मोल नहीं लेंगे जिससे संघर्ष और भड़के।
हमने युद्ध की बड़ी कीमत चुकाई
खान ने कहा कि अफगान में युद्धरत धड़ों के बीच से एक को चुनकर पाकिस्तान ने पहले गलती की थी, लेकिन अब उसने अनुभव से सबक लिया है। उन्होंने कहा, इतिहास गवाह है कि अफगानिस्तान को बाहर से काबू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में युद्ध की पाकिस्तान को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी जिसमें 70,000 से अधिक पाकिस्तानी मारे गए।