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मानवाधिकार हनन मामला: अफसरों पर पाबंदी को लेकर बांग्लादेश ने अमेरिका से मांगी सफाई

Sat, 05 Feb 2022 03:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 05 Feb 2022 03:31 PM IST
सार

अमेरिका ने प्रतिबंधों का एलान करते समय सातों अधिकारियों पर मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करने का इल्जाम लगाया था। उसने कहा था कि ये अधिकारी अवैध हत्याएं करने और विपक्षी दलों को निशाना बनाने में शामिल रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी उत्पीड़न किया है...

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Human rights violation: Bangladesh seeks clarification from United states regarding ban on officers
आरएबी बांग्लादेश - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में नया पेच पड़ने का अंदेशा है। बांग्लादेश के अर्ध सैनिक बल रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के अधिकारियों खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर शेख हसीना वाजेद सरकार ने अपना रुख सख्त करने का संकेत दिया है। उसने अमेरिकी अधिकारियों से इस प्रतिबंध के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। अमेरिका ने बीते दिसंबर में मानवाधिकार हनन के आरोप में आरएबी सात पूर्व औऱ वर्तमान अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे।

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जब अमेरिका ने इस अफसरों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी, तब उसको लेकर बांग्लादेश में जोरदार विरोध भड़का था। अमेरिका ने ये कदम लगभग उसी समय उठाया, जब वहां लोकतांत्रिक देशों का शिखर सम्मेलन (समिट ऑफ डेमोक्रेसीज) होने वाला था। जो बाइडन प्रशासन ने इस सम्मेलन में बांग्लादेश को आमंत्रित नहीं किया। इससे भी बांग्लादेश में अमेरिका के खिलाफ असंतोष देखा गया था।

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वजह बताए अमेरिका

अब बांग्लादेश ने आरएबी के अधिकारियों के मामले को फिर से उठा दिया है। बांग्लादेश के विदेश राज्यमंत्री एम शहरियार आलाम ने गुरुवार को कहा- ‘आरएबी के अधिकारियों पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया, हम इसकी वजह विस्तार से जानना चाहते हैं। अमेरिका के विदेश और न्याय मंत्रालयों ने बीते दस दिसंबर को इस बार में जिन बहानों का जिक्र किया था, हम उसके अतिरिक्त कारणों को जानना चाहते हैं।’ आलम ने कहा- ‘हम यह भी जानना चाहते हैं कि इन प्रतिबंधों का परिणाम क्या होगा। उन्हें ये बात बतानी ही होगी।’

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बांग्लादेश सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि अमेरिका सरकार ने इस बारे में पूरी वजह बताने का वादा किया था। लेकिन अभी तक उसकी तरफ से कोई ब्योरा नहीं आया है। बांग्लादेश ने आरंभ से ही अमेरिकी कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा बताया है। शहरयार आलम ने दोहराया कि आरएबी बांग्लादेश का गौरव है, जिसकी स्थापना और प्रशिक्षण में खुद अमेरिका ने मदद की थी।

बांग्लादेश सरकार ने दो टूक कहा है कि अमरिकी प्रतिबंधों से पैदा हुई स्थिति का मुकाबला करने के लिए उसने पूरी तैयारी कर ली है। इस बारे में अभी भी विशेषज्ञों से राय-मशविरा चल रहा है। शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार ने कहा है कि बांग्लादेश अमरिकी कार्रवाई को कूटनीतिक और वैधानिक दोनों मोर्चों पर चुनौती देगा।

पर्दाफाश करने के लिए लगाया प्रतिबंध

अमेरिका ने प्रतिबंधों का एलान करते समय सातों अधिकारियों पर मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करने का इल्जाम लगाया था। उसने कहा था कि ये अधिकारी अवैध हत्याएं करने और विपक्षी दलों को निशाना बनाने में शामिल रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का भी उत्पीड़न किया है। अमेरिका ने कहा था कि प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं, ताकि मानवाधिकारों के उल्लंघन का पर्दाफाश किया जा सके और उसके लिए दोषी लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।



उसके जवाब में बांग्लादेश सरकार ने कहा कि आरएबी का कभी भी राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया गया। लेकिन जिन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगे हैं, उनके अमेरिका, ब्रिटेन, या कनाडा जाने पर रोक लग गई है। पर्यवेक्षकों का कहना है बांग्लादेश में इस अमेरिकी कार्रवाई को लेकर उग्र जन भावना है। उसे देखते हुए ही अब सरकार ने अपना रुख सख्त करने का संदेश दिया है।

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