हांगकांग : लोकतंत्र की मांग को लेकर छात्रों के बाद अब बुजुर्गों ने खोला मोर्चा
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर दागे आंसू गैस के गोले, कई लोग हुए गिरफ्तार
- उन्हें समर्थन देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बोला ‘थैंक्यू’
- चीन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है पांच महीने से चल रहा आंदोलन
- चीन ता यूएन मानवाधिकार पर आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हांगकांग में पांच महीने से चल रहा सरकार विरोधी आंदोलन अब चीन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। छात्रों और युवाओं के बाद बुजुर्ग भी लोकतंत्र की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। उन्होंने चीन और हांगकांग प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दूसरे दिन रविवार को भी हजारों लोग सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए। वे हांगकांग को आजाद करने की मांग कर रहे थे। उन्होंने इस आंदोलन में उनका साथ देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘थैंक्यू’ बोला और अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च निकाला। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोल दागे। इस दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया।
रविवार को भी हजारों छात्र और बुजुर्ग विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। यह पहला मौका है जब बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना है कि पुलिस बर्बरतापूर्ण और गैर कानूनी तरकी से लोगों को गिरफ्तार कर रही है। बैठने के लिए घर से प्लास्टिक की कुर्सी लेकर आईं 71 साल की एक महिला ने कहा, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जून में करीब 10 लाख लोग सड़क पर उतरे थे, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर गौर नहीं किया। अब सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।’
पॉन नाम की एक बुजुर्ग महिला भी अपनी बेटी और दामाद के साथ इस प्रदर्शन में शामिल हुईं। पॉन के मुताबिक, ‘मैंने पुलिस को बेरहमी और गैर कानूनी ढंग से आंदोलनकारियों को गिरफ्तार देखा है। यह वह हांगकांग नहीं है, जिसे मैं जानती हूं। मैं इसलिए आई हूं ताकि सरकार को एहसास हो कि उन्होंने हमारी इस पीढ़ि के साथ जो किया है उससे हम खुश नहीं हैं।’ पिछले सप्ताह ने पुलिस ने करीब 11,00 लोगों को गिरफ्तार किया था।
एक सप्ताह बाद फिर लौटे आंदोलनकारी
निकाय चुनाव में मिली जीत से आंदोलनकारी उत्साहित हैं और वे फिर से सड़कों पर लौट आए हैं। उनका कहना है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं वे प्रशासन पर दबाव बनाए रखेंगे। 25 वर्षीय छात्र फेलिक्स ने कहा, ‘हमने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस बल का प्रयोग कर रही है।’ 27 साल के एक आंदोलनकारी ने कहा, ‘मैं हांगकांग प्रशासन को संदेश देना चाहता हूं कि यह खत्म नहीं हुआ है। हम पीछे नहीं हटेंगे।’
हांगकांग को आजाद कराने की अपील
इससे पहले रविवार सुबह सैकड़ों आंदोलनकारी हांगकांग में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च निकाला। उनके हाथों अमेरिकी झंडे थे। उन्होंने इस आंदोलन में उनका साथ देने के लिए अमेरिकी सांसदों का भी आभार जताया। आंदोलनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘थैंक्यू’ बोला। साथ ही हांगकांग को आजाद कराने की अपील की। संसद से पास हुए आंदोलनकारियों के समर्थन वाले विधेयक पर ट्रंप ने हस्ताक्षर किया था।
स्वतंत्र समिति बनाने पर विचार
आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग को लेकर छात्रों से लेकर आम लोगों में काफी गुस्सा है। वे चाहते हैं कि सरकार इस मामले की जांच के लिए एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समिति गठित करे। इसको लेकर हांगकांग प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है और वह बैकफुट पर है। प्रशासन अब समिति गठित करने पर विचार कर रहा है। मुख्य सचिव मैथ्यू चेउंग ने कहा कि संकट से निपटने की समीक्षा करने के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जा सकती है।
यूएन मानवाधिकार दे रहा दखल : चीन
चीन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बेशेलेट पर उसके देश के आंतरिक मामलों में अनुचित तरीके से दखल देने का आरोप लगाया है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय में चीन के मिशन ने कहा कि बेशेलेट का ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ में लेख एकदम गलत है और यह संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इस लेख में हांगकांग विशेष प्रशासन क्षेत्र की स्थिति पर अनुचित टिप्पणी की गई है और यह चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है।’ बेशेलेट ने शनिवार को प्रकाशित एक लेख में हांगकांग में पुलिस के अत्यधिक बल का इस्तेमाल करने के मामले में जांच की मांग की थी।