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Israel Hamas War: US के बाद अब इन देशों में भड़का गुस्सा, कहीं नारेबाजी तो कहीं पुलिस की कार्रवाई के बीच विरोध

Sun, 05 May 2024 09:38 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: काव्या मिश्रा Updated Sun, 05 May 2024 09:38 AM IST
सार

हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइली शहरों पर हमला कर दिया था। इसके जवाब में इस्राइल ने हमास आतंकियों के खिलाफ गाजा में ऑपरेशन शुरू किया था। इससे अधिकतर गाजा खंडहर में तब्दील हो गया है। अब दुनियाभर के छात्र फलस्तीनियों के समर्थन में उतर आए हैं। 

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Hamas Israel War: After US, Pro-Palestinian Student Protests Spread To More Countries
इस्राइल के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हमास और इस्राइल बीते सात महीने से जंग लड़ रहे हैं। इस्राइल द्वारा हमास को खत्म करने का संकल्प गाजा पट्टी के लोगों पर भारी पड़ रहा है। गाजा में पैदा हुई मानवीय परिस्थितियों को लेकर अमेरिका के बाद कई और देशों में गुस्सा भड़क गया है। दुनियाभर के छात्र इस्राइल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि फलस्तीनियों के समर्थन में किन-किन देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं। 

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अमेरिका में सबसे पहले हुआ विरोध-प्रदर्शन
गाजा के लोगों की हालत को लेकर सबसे पहले अमेरिका के छात्रों ने आवाज उठाई। उन्होंने इस्राइल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। 17 अप्रैल से लेकर अबतक कम से कम यहां के 40 विश्वविद्यालय परिसरों में प्रदर्शनकारी एकत्र हो चुके हैं। इन लोगों ने गाजा पट्टी में बढ़ती मौतों की संख्या के विरोध में विश्वविद्यालय परिसरों में तंबू लगाए। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को लेकर करीब दो हजार लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
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हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प देखी गई। विश्वविद्यालय के प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस ने कार्रवाई की। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में धरने पर बैठे कई छात्रों को जबरदस्ती हटाया गया। इतना ही नहीं, कोलंबिया विश्वविद्यालय में जिस जगह पर प्रदर्शन हो रहे थे वहां बैरिकेड लगाए गए। वहीं, कुछ छात्रों ने पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत दी। लॉस एंजिल्स के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सैकड़ों पुलिस ने प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए टेंटों को तोड़ा। इसके अलावा 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।



एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्जीनिया विश्वविद्यालय में फलस्तीनी समर्थक शिविर को तोड़ने के लिए पुलिस ने रासायनिक स्प्रे का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, रोड आइलैंड में ब्राउन विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने टेंट हटाने का फैसला तब लिया, जब उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनकी मांग पर विचार किया जाएगा। हालांकि, देशभर में बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राष्ट्रपति जो बाइडन ने जोर देकर कहा कि कानून बनाए रखें। 

फ्रांस के इन कॉलेजों तक भड़की आग
पुलिस ने शुक्रवार को देश के शीर्ष पॉलिटिकल साइंस स्कूल साइंस पो में फलस्तीनियों के समर्थन में उतरे प्रदर्शनकारियों को जबरदस्ती हटाया। इतना ही नहीं, पुलिस ने यहां करीब 91 लोगों को गिरफ्तार भी किया। साइंस पो स्कूल के अंतरिम प्रशासक जीन बेसेरेस ने इस्राइली विश्वविद्यालयों के साथ संस्थान के संबंधों की जांच करने की एक छात्र की मांग को खारिज कर दिया।

फ्रांस में सोरबोन विश्वविद्यालय के बाहर यहूदी छात्रों के संघ ने शुक्रवार को बातचीत के लिए एक बैठक की। अतिथि वक्ता के रूप में कॉमिक-बुक कलाकार जोआन सफार इस बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि आखिर छात्र विरोध- प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। 



इसके अलावा पेरिस-डॉफिन विश्वविद्यालय में भी हालात बिगड़ते दिखे। अंतरराष्ट्रीय कानून में एक फ्रेंको-फलस्तीनी विशेषज्ञ रीमा हसन से जुड़े एक सम्मेलन पर प्रशासकों ने प्रतिबंध लगा दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को साइंस पो और अन्य फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों में लगाए गए नाकेबंदी की निंदा की। 

जर्मनी में फलस्तीनियों का समर्थन
यहां भी इस्राइल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। शुक्रवार को मध्य बर्लिन में हम्बोल्ट विश्वविद्यालय के बाहर प्रदर्शन कर लोगों को वहां से हटाने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने बताया कि पहले इन लोगों को चेतावनी दी गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों  ने हटने से मना कर दिया, तब जबरदस्ती इन लोगों को हटाया गया। 

बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने विरोध की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश में संयुक्त राज्य अमेरिका या फ्रांस जैसी घटनाओं को होते नहीं देखना चाहते थे।

कनाडा में भी विरोध-प्रदर्शन
छात्रों ने मॉन्ट्रियल, ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर सहित कई शहरों में गाजा में हो रहे युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। पुलिस की चेतावनी के बाद भी मॉन्ट्रियल के मैकगिल विश्वविद्यालय में हो रहे विरोध-प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल हुए। उन्होंने तब तक यहां रहने की कसम खाई है जब तक मैकगिल इस्राइल के साथ सभी वित्तीय और शैक्षणिक संबंधों को खत्म नहीं कर देता।




विश्वविद्यालय प्रशासकों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी छात्र निकाय के सदस्य नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि वह टेंटों को तुरंत हटाना चाहते हैं। 

ऑस्ट्रेलिया में समर्थकों ने लहराए झंडे
सैकड़ों समर्थकों ने शुक्रवार को सिडनी विश्वविद्यालय में नारेबाजी की और झंडे लहराए। यहां थोड़ी बहुत बहस के बीच विरोध शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। संघर्ष विराम समर्थक प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय के सामने एक हरे लॉन में 10 दिनों से डेरा डाले हुए हैं। वे चाहते हैं कि यह इस्राइल संस्थानों के साथ संबंधों को खत्म करे और हथियार कंपनियों से धन को दे। 

आयरलैंड में भी विरोध-प्रदर्शन
ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन विश्वविद्यालय में छात्रों ने शुक्रवार को फलस्तीनी समर्थक विरोध-प्रदर्शन किया। 

मैक्सिको में लगे फ्री फलस्तीन के नारे
देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय यूएनएएम के दर्जनों छात्रों ने गुरुवार को राजधानी में एक शिविर लगाया। प्रदर्शनकारियों ने फ्री फलस्तीन के नारे लगाए।



स्विट्जरलैंड में सैकड़ों लोग कर रहे विरोध
लुसाने विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर सैकड़ों छात्रों ने विरोध किया। धरने पर बैठे करीब 100 लोगों ने गाजा में तत्काल संघर्ष विराम का आह्वान किया। 

सात माह से जंग जारी
हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइली शहरों पर पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागकर हमले की शुरुआत की थी। इसके बाद हमास के आतंकियों ने इस्राइल में घुसकर लोगों को मौत के घाट उतारा। इसके जवाब में इस्राइल ने हमास आतंकियों के खिलाफ गाजा में ऑपरेशन शुरू किया था। इस ऑपरेशन में गाजा स्थित हमास के ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी की गई है, जिससे अधिकतर गाजा खंडहर में तब्दील हो गया है। अब तक इस्राइल और गाजा में कुल मिलाकर 30000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बता दें कि गाजा के अधिकारियों का कहना है कि सात अक्तूबर के बाद से गाजा में इस्राइल के सैन्य अभियान में अब तक उनके 34,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि हजारों शवों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है।

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