{"_id":"5df227298ebc3e87fc6b7e90","slug":"hafiz-saeed-did-not-appear-in-court-due-to-lawyers-strike","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाफिज सईद को अदालत में पेश नहीं किया जा सका, याचिका भी खारिज","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
हाफिज सईद को अदालत में पेश नहीं किया जा सका, याचिका भी खारिज
Thu, 12 Dec 2019 07:55 PM IST
Trainee Trainee
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 12 Dec 2019 07:55 PM IST
विज्ञापन
हाफिज सईद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुंबई हमले के सरगना हाफिज सईद को गुरुवार को अदालत में पेश नहीं किया जा सका। वकीलों की हड़ताल के कारण गुरुवार को पाकिस्तान में आतंकवाद रोधी अदालत में हाफिज की पेशी नहीं हो सकी। आतंकवाद को वित्तीय मदद मुहैया कराने के मामले में सईद और उसके तीन अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है।
विज्ञापन
लाहौर की आतंकवाद रोधी अदालत के न्यायाधीश अरशद हुसैन भुट्टा ने आतंकवाद को धन मुहैया करने के मामले में सईद और अन्य के खिलाफ सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी। अदालत ने बुधवार को इस मामले में जमात उद दावा (जेयूडी) प्रमुख और उसके सहायकों हाफिज अब्दुल सलाम बिन मोहम्मद, मुहम्मद अशरफ और जफर इकबाल को आरोपी करार दिया था और अभियोजन को गवाह प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
विज्ञापन
अदालत के एक अधिकारी ने बताया वकीलों की हड़ताल के कारण ना तो सईद और ना ही अन्य तीनों संदिग्धों समेत ना ही किसी अन्य गवाह को गुरुवार को अदालत के सामने पेश किया जा सका।
विज्ञापन
याचिका भी खारिज
वहीं, पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के सरगना हाफिज सईद और गैर-कानूनी संगठन जमात-उद-दावा और उसकी तथाकथित धर्मार्थ संस्था फलाह-ए-इंसानियत के 67 अन्य नेताओं की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज 23 प्राथमिकियों को रद्द करने की अपील की थी।
न्यायाधीश मोहम्मद कासिम खान की अध्यक्षता वाली लाहौर हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के वकील हर प्राथमिकी के खिलाफ अलग से याचिकाएं दायर कर सकते हैं।
सईद के वकील ए के दोगर ने दलील दी कि जिन संपत्तियों का जिक्र किया गया है, उनका इस्तेमाल कभी भी आतंकवाद के वित्तपोषण के लिये नहीं किया गया और इस तरह के "झूठे आरोपों" के पक्ष में कोई सबूत मौजूद नहीं है।