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Hindi News ›   World ›   Gotabaya Rajapaksha hints India insisted on his continuation as Sri Lanka's President in 2022

श्रीलंका: 'विदेशी ताकतों ने मुझे हटाने के लिए माहौल बनाया', 2022 में राष्ट्रपति पद से इस्तीफे पर बोले गोटबाया

Thu, 07 Mar 2024 04:48 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, कोलंबो Published by: आदर्श शर्मा Updated Thu, 07 Mar 2024 04:48 PM IST
सार

वर्ष 2002 में श्रीलंका के राष्ट्रपति पद से अपदस्थ गोटाबाया राजपक्षे ने कहा कि कुछ विदेशी शक्तियां चाहती ही नहीं थी कि मैं सत्ता में बना रहूं, हालांकि मैंने पीछे इसलिए हटा क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि हिंसक प्रदर्शन ज्यादा बढ़े। 

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Gotabaya Rajapaksha hints India insisted on his continuation as Sri Lanka's President in 2022
गोटाबाया राजपक्षे (फाइल फोटो) - फोटो : twitter

विस्तार

श्रीलंका के राष्ट्रपति पद से अपदस्थ गोटबाया राजपक्षे ने गुरुवार को संकेत दिया कि कुछ पश्चिमी शक्तियों के इशारों पर किए गए जन असंतोष के बावजूद एक देश उनके पद पर बने रहने का इच्छुक है। राजपक्षे ने भारत का नाम लिए बिना अपनी पुस्तक में लिखा, दरअसल एक प्रमुख विदेशी शक्ति थी जो इस बात पर जोर दे रही थी कि मुझे इस्तीफा नहीं देना चाहिए था और उन्होंने श्रीलंका को आवश्यक चीजें उपलब्ध कराने की इच्छा भी जाहिर की थी। 
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लोगों को राहत देने के लिए दिया था इस्तीफा- गोटाबाया
पूर्व राष्ट्रपति ने किताब में कहा कि फिर भी मैंने श्रीलंका के लोगों को कुछ राहत देने के लिए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। किताब में कहा गया है कि दो साल के कोविड लॉकडाउन, स्कूलों के बंद होने और रोजगार के नुकसान के बाद जीवनयापन की लागत बढ़ गई है। मैं अपने कारण लोगों को लंबे समय तक राजनीतिक गतिरोध में नहीं डालना चाहता था।
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विदेशी ताकतों का था मुझे हटाने में हाथ- गोटाबाया
गोटाबाया द्वारा लिखी गई पुस्तक में, उन्होंने कहा कि मैंने उन राजनीतिक साजिशों और तोड़फोड़ को खत्म करने के लिए इस्तीफा दे दिया, जो हर किसी के जीवन को असहनीय बना रही थीं। उन्होंने आगे कहा, किसी के लिए भी यह दावा करना बेहद नादानी होगी कि इसमें कोई विदेशी हाथ नहीं था। मुझे सत्ता से बाहर करने के लिए कदम उठाए गए।
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कुछ देश लोकतंत्र के सच्चे संरक्षण- गोटाबाया
उन्होंने दावा किया कि कई विदेशी शक्तियां और कुछ राजनीतिक दल मुझे हटाने के लिए हिंसक विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड के लिए वित्तपोषण कर रहे थे। मैं जब तक सत्ता में बना रहा, तब तक वे रुके नहीं। पश्चिमी देशों के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ देश चाहते थे कि मैं सत्ता में बना ही नहीं रहूं। वहीं कुछ ऐसे देश थे जो दुनियाभर में लोकतंत्र और कानून के शासन के संरक्षक के रूप में रहना पसंद करते हैं। 
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