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पुतिन से शिखर वार्ता के जर्मन-फ्रेंच प्रस्ताव पर यूरोपियन यूनियन में बवाल
Fri, 25 Jun 2021 05:53 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 25 Jun 2021 05:53 PM IST
सार
पर्यवेक्षकों का कहना है कि असल में इस प्रस्ताव से एक तरफ ईयू में गहरे मतभेद पैदा हो सकते हैं, दूसरी तरफ इससे रूस भी नाराज हो सकता है। शिखर सम्मेलन के प्रस्ताव से ईयू के कई नेता मान सकते हैं कि ये प्रस्ताव पुतिन के प्रति नरम रुख से प्रेरित हैं। जबकि नए प्रतिबंधों की बात से पुतिन नाराज हो सकते हैँ...
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व्लादिमीर पुतिन
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
जर्मनी और फ्रांस ने यूरोपियन यूनियन (ईयू) की रूस नीति को मुश्किल में डाल दिया है। उन दोनों देशों ने एक तरफ रूस पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी, लेकिन साथ ही उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के साथ यूरोपीय नेताओं की शिखर बैठक की वकालत भी की है। जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत के बाद इस बारे में एक प्रस्ताव ईयू के सामने रखा है। ये प्रस्ताव ईयू नेताओं की शिखर बैठक से ठीक पहले पेश किया गया है।
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जर्मनी के सूत्रों का कहना है कि ये प्रस्ताव दंड और लालच के सिद्धांत पर आधारित है। लेकिन वेबसाइट पोलिटिको.ईयू की एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे ईयू के लिए असहज स्थिति पैदा हुई है। ईयू के ज्यादातर नेता ये समझ नहीं पा रहे हैं कि जब पहले ऐसी कोशिशें नाकाम रही हैं, तो इस प्रस्ताव से कैसे बात आगे बढ़ेगी। पर्यवेक्षकों का कहना है कि असल में इस प्रस्ताव से एक तरफ ईयू में गहरे मतभेद पैदा हो सकते हैं, दूसरी तरफ इससे रूस भी नाराज हो सकता है। शिखर सम्मेलन के प्रस्ताव से ईयू के कई नेता मान सकते हैं कि ये प्रस्ताव पुतिन के प्रति नरम रुख से प्रेरित हैं। जबकि नए प्रतिबंधों की बात से पुतिन नाराज हो सकते हैँ।
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जर्मन-फ्रांस प्रस्ताव का मसविदा ईयू राजनयिकों की बैठक में पेश किया गया। उसमें यूरोपियन परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल भी मौजूद थे। बताया जाता है कि आखिरी मौके पर इस तरह का एक प्रस्ताव लाए जाने से ईयू के कई राजनयिक नाराज हुए हैं। सबसे कड़ी प्रतिक्रिया पोलैंड, लिथुआनिया, और एस्तनिया की रही है। ये देश रूस के खिलाफ सख्त रुख के समर्थक रहे हैँ। इन देशों और कुछ दूसरे ईयू नेताओं की राय है कि पुतिन के साथ शिखर बैठक का प्रस्ताव गलत सोच पर आधारित है। यह एक तरह से पुतिन को पुरस्कृत करने जैसा कदम होगा। आलोचक देशों का कहना है कि ऐसा कोई प्रस्ताव रखने के पहले कम से कम हाल में हुई जो बाइडन-पुतिन शिखर वार्ता के नतीजों का इंतजार करना चाहिए।
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कुछ अधिकारियों का कहना है कि ईयू को बाइडन-पुतिन वार्ता में ही खुद को शामिल करना चाहिए। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि बाइडन ने पुतिन के साथ उन्हीं मुद्दों पर बात की, जो यूरोप के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। वेबसाइट पोलिटिको के मुताबिक एक ईयू राजनयिक ने उससे कहा कि जर्मन-फ्रांस प्रस्ताव के आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा- इसमें ऐसी बातें शामिल हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।
लेकिन फ्रेंच राष्ट्रपति मैक्रों के एक सलाहकार ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उसने कहा- ‘राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोपीय देशों में तालमेल बनाए रखते हुए रूसी राष्ट्रपति से शिखर वार्ता की पेशकश की है। इस मामले में वे जर्मनी के नजरिए से सहमत हैं।’ सलाहकार ने पुतिन के साथ शिखर वार्ता के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि यह एक तार्किक कदम होगा। उसने कहा कि अमेरिका ने पुतिन के साथ जिनेवा शिखर वार्ता करके इसी नजरिए का परिचय दिया। इसलिए जर्मनी से सहमत होते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने ऐसी शिखर वार्ता से सहमति जताई, जिसको लेकर यूरोपीय देशों में समन्वय बना रहे।