अमेरिकी प्रतिबंध की मार झेल रहा क्यूबा: गहराया ईंधन संकट, समझिए स्पेन समेत कई देशों की कैसे बढ़ी चिंता?
क्यूबा में ईंधन संकट गहराने से मानवीय हालात बिगड़ते जा रहे हैं, क्योंकि अमेरिका द्वारा तेल सप्लाई रोकने के बाद ऊर्जा व्यवस्था चरमरा गई है। ब्राजील, मैक्सिको और स्पेन ने स्थिति पर चिंता जताते हुए मानवीय सहायता बढ़ाने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन और बातचीत से समाधान की मांग तेज हो गई है।
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अमेरिका और क्यूबा के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जनवरी के आखिर में वॉशिंगटन द्वारा तेल की सप्लाई रोकने के बाद क्यूबा की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं मिल रहा है ईंधन के अभाव में इन तीन महीनों में वहां मानवीय स्थिति एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। इस बीच ब्राजील, मैक्सिको और स्पेन की सरकारों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है और स्थिति को आसान बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। स्पेन के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को तीनों सरकारों ने संबंधित पक्षों से यह भी अपील की कि वे ऐसे किसी भी कदम से बचें, जिससे लोगों के जीवन की स्थितियां और खराब हों या जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो। इसके साथ ही उन्होंने क्यूबा के लोगों की तकलीफों को कम करने के लिए एक समन्वित तरीके से अपनी मानवीय सहायता को बढ़ाने का भी संकल्प लिया।
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ब्राजील-स्पेन और मैक्सिको ने क्या कहा?
अपने बयान में ब्राजील, स्पेन और मैक्सिको ने हर समय अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की आवश्यकता को भी दोहराया। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों का पालन करने पर भी जोर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी फिर से दोहराया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातचीत का मकसद मौजूदा हालात का कोई पक्का हल निकालना होना चाहिए और यह पक्का करना चाहिए कि क्यूबा के लोग पूरी आजादी के साथ अपना भविष्य खुद तय करें।
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क्यूबा की मानवीय जरूरत अभी भी बरकरार
इसके साथ ही देश में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी ने कहा कि सीमित मात्रा में ईंधन की सप्लाई पहुंचने की खबरों के बावजूद रूस से भेजी गई तेल की एक हालिया खेप को पिछले हफ्ते अमेरिका की नाकेबंदी के बावजूद बंदरगाह पर उतरने की इजाजत दी गई थी। देश में मानवीय जरूरतें अभी लगातार बनी हुई हैं। मार्च के आखिर से ऊर्जा संकट का असर और भी ज्यादा बिगड़ गया है। बता दें कि क्यूबा की ऊर्जा जरूरतें जनवरी में अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सौंपे जाने तक बड़े पैमाने पर वेनेजुएला द्वारा पूरी की जाती थीं।
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