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बढ़ती दखलंदाजी से परेशान: फ्रांस में गरमाते चुनावी माहौल के बीच यूरोपियन यूनियन बन रहा है निशाना

Sat, 20 Nov 2021 06:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 20 Nov 2021 06:10 PM IST
सार

मैक्रों ईयू के बारे में अधिक कुछ बोलने से बच रहे हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि यूरोपीय मामलों में राष्ट्रपति का रिकॉर्ड अच्छा रहा है। उनका कहना है कि मैक्रों के दबाव के कारण ही जर्मनी 750 बिलियन यूरो के कोरोना पैकेज के लिए राजी हुआ था। इस पैकेज से ईयू के सदस्य देशों को महामारी के बाद अपनी अर्थव्यवस्थाओं को संभालने में मदद मिली है...

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French public opinion that the EU has acquired too much power to intervene within the country
इमैनुएल मैक्रों - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

फ्रांस में गरमाते चुनावी माहौल के बीच यूरोपियन यूनियन (ईयू) के खिलाफ माहौल बनता दिखाई दे रहा है। 2017 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस वादे के साथ चुनाव लड़ा था कि वे ईयू में फ्रांस की हैसियत को मजबूत बनाएंगे। उनके विरोधी इस वादे को लेकर अब उन्हें घेरने की कोशिश में हैं। फ्रांस में अगले अप्रैल में राष्ट्रपति चुनाव होगा। उसमें मैक्रों की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन कर उभरीं धुर दक्षिणपंथी नेता मेरी ली पेन ने फ्रांस में ईयू का दखल घटाने का वादा कर दिया है।

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ब्रिटेन का दे रहे हैं उदाहरण

इस बार मैक्रों ईयू के बारे में अधिक कुछ बोलने से बच रहे हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि यूरोपीय मामलों में राष्ट्रपति का रिकॉर्ड अच्छा रहा है। उनका कहना है कि मैक्रों के दबाव के कारण ही जर्मनी 750 बिलियन यूरो के कोरोना पैकेज के लिए राजी हुआ था। इस पैकेज से ईयू के सदस्य देशों को महामारी के बाद अपनी अर्थव्यवस्थाओं को संभालने में मदद मिली है। मैक्रों समर्थक इस सिलसिले में ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन का तजुर्बे का भी जिक्र कर रहे हैं। उनका कहना है कि ईयू से अलग होने के कारण ब्रिटेन नुकसान में है।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि फ्रांस के जनमत के एक हिस्से में हमेशा से ईयू विरोधी भावनाएं रही हैं। उनके दबाव के कारण ही 2005 में फ्रांस में ईयू के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया गया था। तब फ्रांस के लोगों के बहुमत ने उस यूरोपियन संविधान को ठुकरा दिया था, जिसमें ये प्रावधान था कि राष्ट्रीय कानून पर ईयू के कानून को वरीयता मिलेगी।

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राष्ट्रीय संप्रभुता को प्राथमिकता

अब फ्रेंच जनमत के एक हिस्से में ये शिकायत देखी जा रही है कि ईयू ने देश के अंदर दखल देने की ज्यादा शक्ति हासिल कर ली है। मतदाताओं का यह हिस्सा ‘राष्ट्रीय संप्रभुता’ की रक्षा के मुद्दे को अहमियत दे रहा है। जबकि वामपंथी या उदारवादी समूहों का कहना है कि ईयू का सदस्य रहने पर मुक्त व्यापार और उचित प्रतिस्पर्धा के जो अवसर फ्रांस को मिले हुए हैं, वे फायदेमंद हैं। इन फायदों के लिए संप्रभुता में मामूली दखल की शर्त मंजूर की जा सकती है।


वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू की एक रिपोर्ट के मुताबिक जनमत संग्रहों से जाहिर हुआ है कि मोटे तौर पर फ्रांस से अधिकतर लोग ईयू की सदस्यता के पक्ष में है। इसके बावजूद मेरी ली पेन और दूसरे दक्षिणपंथी समूहों ने इस मुद्दे को इतना गरमा दिया है कि मैक्रों कई बार दबाव में नजर आए हैं।


पर्यवेक्षकों का कहना है कि पोलैंड को लेकर ईयू में जो तनाव पैदा हुआ है, उससे मैक्रों की मुश्किलें बढ़ी हैं। पोलैंड की संवैधानिक अदालत ने पिछले महीने फैसला दिया था कि ईयू के न्यायालय के निर्णय और उसके फैसले में टकराव होने पर पोलैंड में उसका फैसला ही लागू होगा। पूरे यूरोप के दक्षिणपंथी समूहों ने इस न्यायिक फैसले को ‘राष्ट्रीय संप्रभुता की जीत’ बताया था। जानकारों का कहना है कि इससे उठे विवाद से मेरी ली पेन को ताकत मिली है, जिन्होंने फ्रांस के अंदर ईयू के हस्तक्षेप को सीमित करने की अपनी कार्ययोजना पेश की है।

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