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UK: ब्रिटेन के पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन हुए प्रधानमंत्री मोदी के मुरीद, कहा- उनमें विचित्र तरह की सूक्ष्म ऊर्जा

Sat, 12 Oct 2024 06:16 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: बशु जैन Updated Sat, 12 Oct 2024 06:16 PM IST
सार

अपनी किताब में ब्रिटेन और भारत नामक अध्याय में जॉनसन ने लिखा कि 201 2 में जब वह लंदन के मेयर थे तो भारत में महापौर व्यापार प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में आए। इस दौरान ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने उनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न मिलने के लिए कहा था, क्योंकि वे हिंदू राष्ट्रवादी नेता थे।

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former British PM Boris Johnson praised Prime Minister Modi, said- he has a strange kind of subtle energy
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते ब्रिटेन के पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन। (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपनी किताब अनलीशेल्ड में पीएम मोदी की तारीफ की है। पीएम नरेंद्र मोदी से पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि पीएम मोदी में विचित्र तरह की सूक्ष्म ऊर्जा है। उन्होंने भारत-ब्रिटेन के संबंधों को लेकर लिखे एक अध्याय में जिक्र किया कि भारत के साथ ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समझौते के लिए मोदी सरीखे मित्र की जरूरत थी। जोकि उन्हें पहली मुलाकात के दौरान महसूस हुआ। 

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अपनी किताब में ब्रिटेन और भारत नामक अध्याय में जॉनसन ने लिखा कि 201 2 में जब वह लंदन के मेयर थे तो भारत में महापौर व्यापार प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में आए। इस दौरान ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने उनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न मिलने के लिए कहा था, क्योंकि वे हिंदू राष्ट्रवादी नेता थे। इसके कुछ साल बाद जब वह मोदी से सिटी हॉल कार्यालय के बाहर मिले तो कुछ अजीब का महसूस हुआ। 
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जॉनसन ने किताब में लिखा है कि पीएम मोदी ने मेरा हाथ उठाया और हिंदी में कुछ बोला, मगर मुझे वह समझ न आया। उनसे हाथ मिलाने के दौरान मुझे विचित्र सूक्ष्म ऊर्जा का अहसास हुआ। मुझे लगता है कि वह परिवर्तन-निर्माता हैं जिनकी हमारे रिश्ते को ज़रूरत है। 
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बोरिस जॉनसन ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद जब वह 2022 में प्रधानमंत्री के तौर पर भारत आए थे तो उनका स्वागत बेहद यादगार था। वह लिखते हैं कि मैं सारा इतिहास और संवेदनशीलता जानता था। मैं युद्ध के बाद भारत के पश्चिम के साथ  गुटनिरपेक्षता के कारण और मास्को के साथ अटूट रिश्ते के बारे में जानता था। मैं रूसी हाइड्रोकार्बन पर चीन की तरह भारतीय निर्भरता को भी समझता हूं। रूस-चीन को लेकर उन्होंने लिखा कि मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या यह बदलाव, पुर्नविचार का समय नहीं था। क्या भारत इस निरंकुश जोड़ी के साथ जुड़ना चाहता था। 

पुस्तक के एक अन्य खंड में उन्होंने इतिहास और इतिहास-निर्माताओं के बारे में अपने गहन व्यक्तिगत ज्ञान के लिए दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की भरपूर प्रशंसा की।  उन्होंने लिखा कि मुझे वह बात याद आई जो पूर्व भारतीय प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1950 के दशक में उनसे कही थी। उन्होंने मुझसे कहा कि भारत हमेशा रूस के साथ रहेगा और कुछ चीजें कभी नहीं बदलेंगी। वे बस ऐसी ही हैं। 


जॉनसन भारत-ब्रिटेन साझेदारी के लिए व्यापार और जलवायु परिवर्तन और शैक्षिक साझेदारी से आगे बढ़ने और सैन्य और तकनीकी सहयोग कार्यक्रम को शुरू करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण पेश करने का श्रेय खुद को देते हैं। उन्होंने लिखा कि हम पनडुब्बियों से लेकर हेलीकॉप्टर और समुद्री प्रणोदन इकाइयों तक सभी प्रकार की सैन्य प्रौद्योगिकी पर एक साथ काम करने के लिए सहमत हुए।



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