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डब्ल्यूटीओ के जख्मों पर कितना मरहम लगा पाएंगी नई महानिदेशक ओकोंजा-आइवियेला?
Mon, 15 Feb 2021 06:56 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 15 Feb 2021 06:56 PM IST
सार
ओकोंजो-आइवियेला 66 साल की हैं। अमेरिका के मशहूर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी किया था। अब उनके सामने चुनौती अमेरिका और चीन के टकराव से जख्मी विश्व अर्थव्यवस्था पर महरम लगाने की है...
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Ngozi Okonjo-Iweala
- फोटो : Agency
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विस्तार
नगोजी ओकोन्जो-आइवियेला आज से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के महानिदेशक का पद संभाल रही हैं। वे इस पद पर आने वाली पहली महिला और पहली अफ्रीकी हैं। ओकोंजा-आइवियेला नाईजीरिया की वित्त मंत्री रह चुकी हैं। लेकिन कुछ साल पहले उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी। डब्ल्यूटीओ के प्रमुख का पद वे उस समय संभाल रही हैं, जब ये संगठन अच्छी स्थिति में नहीं है। विश्व व्यापार को समन्वित करने की इस भूमिका इस वक्त गहरे सवालों के घेरे में है।
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डब्ल्यूटीओ की कार्य क्षमता और साख को सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा कदम उठाने के नजरिए ने पहुंचाया। खासकर ट्रंप ने जिस तरह चीन के खिलाफ कार्रवाइयां की, उससे विश्व व्यापार को नियमों के आधार पर चलाने के लिए बनाए गए इस संगठन को साख बुरी तरह प्रभावित हुई। जबकि डब्ल्यूटीओ की स्थापना में सबसे बड़ी भूमिका अमेरिका की ही रही थी।
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कोरोना वायरस महामारी के कारण भी दुनिया में व्यापार की सूरत बदली है। बहुत से देश अब वैश्विक सप्लाई चेन पर अपनी निर्भरता घटाने का इरादा जता रहे हैं। हालांकि नए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी निष्ठा जताई है, लेकिन आर्थिक मामलों में उनका भी ध्यान अपने देश के उद्योग धंधों को प्राथमिकता देने पर है। उनके प्रशासन ने ‘बिल्ड बैक बेटर अमेरिका’ (फिर से बेहतर अमेरिका के निर्माण) का लक्ष्य घोषित किया है।
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इसलिए ओकोंजो-आइवियेला के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह दिखाने की होगी कि अभी भी डब्ल्यूटीओ विश्व व्यापार के लिए नियम बनाने और उनका पालन कराने में सक्षम है। कुछ समय पहले उन्होंने डब्ल्यूटीओ की आम परिषद की बैठक में कहा था- विश्व अर्थव्यवस्थाओं के एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण आगे चुनौती यह होगी कि सभी देश अलग-अलग प्रयास करने के बजाय सामूहिक प्रतिक्रिया व्यक्त करें।
विश्लेषकों ने कहा है कि ओकोंजो-आइवियेला के हाथ में नेतृत्व जाने से विश्व व्यापार में अफ्रीका के योगदान को बढ़ाने में मदद मिलेगी। वे एक नया चेहरा हैं, इससे ठहरी चीजों को दोबारा शुरू करने की बेहतर संभावना पैदा होगी। ओकोंजो-आइवियेला 66 साल की हैं। अमेरिका के मशहूर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी किया था। अब उनके सामने चुनौती दुनिया की दोनों आर्थिक महाशक्तियों-अमेरिका और चीन के टकराव से जख्मी विश्व अर्थव्यवस्था पर महरम लगाने की है।
इस मामले में जल्द ही डब्ल्यूटीओ को कई विवादास्पद मामलों पर फैसला देना होगा। 2018 में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रावधान को लागू कर स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क बढ़ा दिया था। डब्ल्यूटीओ को इस सवाल पर फैसला देना है कि क्या ऐसा करके अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के नियमों को तोड़ा।
ओकोंजो-आइवियेला के पास 25 वर्ष तक विश्व बैंक में काम करने का अनुभव है। जानकार उनकी कूटनीतिक क्षमता और समझाने-बुझाने के कौशल की तारीफ करते हैं। लेकिन डब्ल्यूटीओ के पूर्व उपमहानिदेशक और पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रुफस येरक्सा का कहना है- यहां ये बात ध्यान में रखना जरूरी है कि महानिदेशक के हाथ में निर्णय लेने के बहुत ज्यादा अधिकार नहीं हैं। महानिदेशक किसी सदस्य देश को कोई बात मानने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।