India-EU: भारत-ईयू समझौते से पाकिस्तान की टेक्सटाइल पर संकट? PAK विश्लेषक बोलें- आर्थिक जंग तेज होने की आशंका
India-EU FTA Impact On Pakistan Economy: भारत और EU के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते से पाकिस्तान के कारोबारी जगत में चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे पाकिस्तान की टेक्सटाइल और अन्य निर्यात पर असर पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि विश्लेषको क्या-कुछ कहना चाह रहे हैं।
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विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने दक्षिण एशिया में नई आर्थिक हलचल पैदा कर दी है। जहां भारत के लिए यह करार निर्यात और निवेश के बड़े अवसर खोलता है, वहीं पाकिस्तान के कारोबारी जगत में इसे लेकर गहरी चिंता दिख रही है। वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता पाकिस्तान की टेक्सटाइल समेत कई निर्यात उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है।
हाल ही में भारत-ईयू एफटीए के तहत 27 देशों वाले यूरोपीय ब्लॉक में भारत के 93 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही ईयू से भारत में लग्जरी कारों और वाइन का आयात सस्ता होगा। पाकिस्तान के विश्लेषकों का मानना है कि इससे यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और पाकिस्तान का बाजार हिस्सा घट सकता है, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर में।
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क्या कहते हैं पाकिस्तानी विश्लेषक?
पाकिस्तान के वित्तीय विशेषज्ञ मुहम्मद अली साया ने चेतावनी दी है कि भारत ने “नई आर्थिक लड़ाई” शुरू कर दी है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान को कठिन प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने बताया कि GSP+ दर्जा होने के बावजूद पाकिस्तान की टेक्सटाइल निर्यात स्थिति कमजोर हो सकती है, क्योंकि भारत को अब शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा।
टेक्सटाइल और अन्य निर्यात पर असर क्यों?
पाकिस्तान को ईयू ने 2014 में जीएसपी+ का दर्जा दिया था, जिससे यूरोप को उसके टेक्सटाइल निर्यात में 108 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हालांकि यह दर्जा दिसंबर अगले वर्ष समाप्त होने वाला है। विश्लेषक अली शान का कहना है कि भारत-समझौते के बाद पाकिस्तान की प्रतिस्पर्धी बढ़त खत्म हो सकती है।
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पाक पर कितना असर?
टेक्सटाइल, चावल और कपास निर्यात पर दबाव बढ़ेगा।
भारतीय उत्पाद ईयू में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।
रोजगार और निर्यात मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
बाजार एक बार हाथ से निकलने पर वापस पाना मुश्किल होगा।
सरकार और उद्योग की चिंता
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईयू के संपर्क में है ताकि संभावित नुकसान से निपटा जा सके। वहीं, बिजनेसमैन पैनल प्रोग्रेसिव के अध्यक्ष साकिब फैयाज मागून ने सरकार से निर्यातकों को ज्यादा प्रोत्साहन देने की मांग की है। उनका कहना है कि EU पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है और कुल निर्यात का 25 प्रतिशत हिस्सा वहीं जाता है।
होजरी मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रमुख फैसल अरशद के अनुसार, भारत-ईयू एफटीए से भारतीय निर्यातक आक्रामक कीमतों पर सामान बेच सकते हैं, जिससे पाकिस्तान की हिस्सेदारी घटेगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को टैक्स में राहत, सस्ती ऊर्जा और आसान निर्यात प्रक्रियाओं जैसे कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो पाकिस्तान के लिए ईयू बाजार में टिके रहना कठिन हो जाएगा।
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