फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Excessive use of antibiotics may cause drug resistant pandemic

एंटीबायोटिक के अधिक प्रयोग से अब दवा प्रतिरोधी महामारी का खतरा

Wed, 10 Jun 2020 03:31 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: Amit Mandal Updated Wed, 10 Jun 2020 03:31 PM IST
विज्ञापन
Excessive use of antibiotics may cause drug resistant pandemic
कोरोना वायरस - फोटो : PTI

कोरोना महामारी के बीच अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टरों ने जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाएं लिखीं। अमेरिका में जब संक्रमण ने रफ्तार पकड़ी तो बुखार फेफड़ों और सांस संबंधी तकलीफ वाले मरीजों को एंटीबायोटिक लिखी गई। यह जानते हुए कि वायरस में एंटीबायोटिक असरदार नहीं होती है।

विज्ञापन


डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक दवाएं इसलिए लिखीं क्योंकि उन्हें डर था कि वायरस के साथ मरीजों को बैक्टीरियल संक्रमण हुआ तो उनकी जान को खतरा और बढ़ेगा। लेकिन अब भविष्य में ड्रग रेजिस्टेंट महामारी यानी दवा प्रतिरोधी महामारी का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन


एंटीबायोटिक एपिडेमियोलॉजी एंड एंटीबायोटिक स्टीवार्डशिप की निदेशक डाक्टर चोपड़ा बताती हैं कि वायरस जब चरम पर था तब डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक अत्यधिक मात्रा में लिखी। एक अनुमान के अनुसार, अस्पताल आने वाले 80 फीसदी मरीजों को एंटीमाइक्रोबियस लिखी गई। वह कहती हैं कि हमें एक बार तो यह लग रहा था कि यह सब खत्म हो जाए। हालांकि बाद में डॉक्टरों को अपनी गलती का एहसास हुआ कि उन्होंने महामारी की शुरुआती दिनों में एंटीबायोटिक दवाओं का कैसे गलत प्रयोग किया है। फिजीशियन डॉक्टरों के पास एंटीबायोटिक दवाओं के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन


ड्रग रेजिस्टेंट के लिए बनानी होगी नई एंटीबायोटिक
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) क्लिनिकल सेंटर के शोधकर्ता डॉक्टर जेफरी आर स्ट्रिच  का कहना है कि कोविड-19 ने दुनिया को बता दिया है कि स्वास्थ्य पर लंबे समय तक अधिक खर्च करना पड़ेगा। वह कहते हैं कि ड्रग रेजिस्टेंट संक्रमण से बचाव के लिए अब नई एंटीबायोटिक दवाएं तैयार करनी होगी। एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक बड़ी समस्या है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में नई एंटीमाइक्रोबियल दवा पर काम ठप पड़ा है। जो अमेरिकी दवाई कंपनियां इस पर काम कर रही थी उन्होंने काम बंद कर दिया है।

2050 तक ड्रग रेजिस्टेंट से एक करोड़ की मौत
नॉर्थवेल हेल्थ के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉक्टर ब्रसफॉर्बर का कहना है कि दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस से मरीजों में ड्रग रेजिस्टेंट का खतरा बढ़ गया है। यह दुनिया भर के लोगों के लिए दूसरा सबसे बड़ा खतरा है। इससे हर साल लाखों लोगों की मौत होती है। आने वाला समय ड्रग रेजिस्टेंस महामारी का होगा। इससे 2050 तक दुनिया भर में एक करोड़ लोगों की मौत होगी।  

एक तिहाई कोरोना मरीजों की मौत डायरिया से
डॉक्टर चोपड़ा का अनुमान है कि संक्रमण की चपेट में आकर भर्ती एक तिहाई की मौत के मामले में रोगी को डायरिया की गंभीर शिकायत होती है। जो रोगी पहले से मधुमेह, हाइपरटेंशन या मोटापे से ग्रसित थे, उनकी जान को भी खतरा अधिक था और ऐसे मरीजों की मौत भी हुई। इस तरह के मरीजों को अगर एंटीबायोटिक की हाई डोज दी गई है तो भविष्य में कोई दूसरी बीमारी होती है तो इसकी तकलीफ बढ़ने का खतरा अधिक है।


डॉक्टरों को पता था वायरस है फिर भी दी एंटीबायोटिक
मिशिगन मेडिसिन की डॉ. वेलरी का कहना है कि मिशिगन में संक्रमित मरीजों में से केवल 4 फ़ीसदी को बैक्टीरियल इंफेक्शन था। इसके बाद भी अस्पताल आने वाले मरीजों को एंटीबायोटिक दी गई। महामारी ने यह दिखाया है कि डॉक्टरों को पता है कि वायरस संक्रमण में एंटीबायोटिक का कोई योगदान नहीं है लेकिन इसके बाद भी मरीजों को दवा लिखी गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed