फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Even in Europe, governments have come down on shutting down the media and anti government news channel

सरकार विरोधी चैनलों पर तालाबंदी: पश्चिमी यूरोप तक कैसे पहुंच गई मीडिया पर हमलों की मुहिम?

Mon, 16 Aug 2021 07:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 16 Aug 2021 07:43 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों ने कहा है कि सबसे सदमे की बात यह है कि ऐसे कानून यूरोप में बनाए जा रहे हैं, जिसे लोकतंत्र का गढ़ समझा जाता है। जिस समय ये कदम उठाए जा रहे हैं, वह भी गौरतलब है। सरकारें कोरोना महामारी के कारण बने माहौल का फायदा उठा रही हैं...

विज्ञापन
Even in Europe, governments have come down on shutting down the media and anti government news channel
न्यूज चैनल - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ऐसा लगता है कि अब यूरोप में भी सरकारें मीडिया का मुंह बंद करने पर उतर आई हैं। बीते हफ्ते पोलैंड की सरकार ने एक बिल पारित कराया, जिसका मकसद देश में सरकार विरोधी रुख रखने वाले एकमात्र स्वतंत्र न्यूज चैनल को बंद कराना है। टीवीएन-24 नाम के इस चैनल में अमेरिकी मीडिया ग्रुप डिस्कवरी का पैसा लगा हुआ है। नए कानून में प्रावधान है कि पोलैंड में किसी मीडिया कंपनी में यूरोपियन यूनियन (ईयू) से बाहर के निवेशक पैसा नहीं लगा पाएंगे। इसका मतलब है कि डिस्कवरी को तुरंत अपना निवेश टीवीएन-24 से निकालना पड़ेगा।

विज्ञापन


उधर ऑस्ट्रिया के चांसलर सिबैस्टिन कुर्ज ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका मकसद देश के सबसे पुराने अखबार के लिए धन के स्रोत पर रोक लगा देना है। वाइनर जीटुंग सरकारी अखबार है। अभी के प्रावधान के मुताबिक सरकार को नौकरियों और अपनी तमाम घोषणाओं के विज्ञापन इस अखबार को देने पड़ते हैं। सरकारी स्वामित्व के बावजूद ये अखबार स्वतंत्र संपादकीय नीति के तहत चलता रहा है। उसने कई बार कुर्ज सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। नए प्रस्तावित कानून के मुताबिक इस अखबार के धन के मुख्य स्रोत यानी सरकारी विज्ञापनों पर रोक लग जाएगी।
विज्ञापन


पर्यवेक्षकों ने कहा है कि सबसे सदमे की बात यह है कि ऐसे कानून यूरोप में बनाए जा रहे हैं, जिसे लोकतंत्र का गढ़ समझा जाता है। जिस समय ये कदम उठाए जा रहे हैं, वह भी गौरतलब है। सरकारें कोरोना महामारी के कारण बने माहौल का फायदा उठा रही हैं। सर्वे एजेंसी इप्सोस मोरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेन पेज ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘संकट के समय में लोगों के बीच सरकार के प्रति भरोसा बढ़ जाता है। वे एकजुट होकर उसके पीछे खड़े हो जाते हैं। इस समय में इससे भी ध्यान हट जाता है कि सरकार बाकी क्या कर रही है। जो प्रेस की आजादी को खत्म करना चाहती हैं, उन सरकारों को ऐसा करने के लिए यह अनुकूल समय लगा है।’
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बीच ये शिकायत भी है कि महामारी के बीच पत्रकारिता पर लोगों का भरोसा घटा है। फ्रांस की मशहूर संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अध्यक्ष पियरे हास्की ने सीएनएन से कहा- ‘हम पत्रकारों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि दुनियाभर में हमें सिस्टम का हिस्सा समझा जा रहा है। इसलिए व्यवस्था के खिलाफ उठ रहे आंदोलन हमारे खिलाफ भी हो जाते हैं।’ हालांकि हालांकि हास्की का मानना है कि अभी प्रेस की आजादी के लिए खतरा व्यवस्था विरोधी आंदोलनों से नहीं, बल्कि मुख्यधारा के राजनेता ही पैदा कर रहे हैं।

ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में लोकतंत्र के विशेषज्ञ निक चीसमैन ने कहा है कि जब कभी सरकारें संकट में पड़ती हैं, वे पत्रकारों पर कार्रवाई करने लगती हैं, जिनका काम ही सच को सामने लाना है। विश्लेषकों का कहना है कि मीडिया के खिलाफ बने मौजूदा माहौल के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं, जिन्होंने लगातार मीडिया के खिलाफ माहौल बनाया। कोरोना महामारी आने पर उन्होंने मीडिया पर हमले तेज कर दिए।


अंतरराष्ट्रीय संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स के उप कार्यकारी निदेशक रॉब मेहोनी ने सीएनएन से कहा- ‘डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के नेताओं को मीडिया पर हमला करने के सूत्र दिए। तो विभिन्न देशों की सरकारों ने उस समय मीडिया पर हमले तेज कर दिए, जब लोगों को सच्ची खबरों की सबसे ज्यादा जरूरत है। ट्रंप से पहले ब्राजील और फिलीपींस की सरकारों ने सीख ली। अब यही काम पश्चिमी यूरोप के नेता कर रहे हैं। वे महामारी के दौरान अपनी नाकामी छिपाने के लिए मीडिया को निशाना बना रहे हैं।’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed