{"_id":"65e956da31dc654b4c0dcf86","slug":"eu-climate-agency-said-february-2024-was-warmest-on-record-after-pre-industrial-period-el-nino-2024-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Climate: फरवरी 2024 रहा रिकॉर्ड गर्म, यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने ये बताई गर्मी बढ़ने की वजह","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Climate: फरवरी 2024 रहा रिकॉर्ड गर्म, यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने ये बताई गर्मी बढ़ने की वजह
Thu, 07 Mar 2024 11:33 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 07 Mar 2024 11:33 AM IST
सार
एजेंसी ने कहा कि दुनियाभर के देशों को कोशिश करनी चाहिए कि वैश्विक औसत तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न बढ़े वरना इसके गंभीर परिणाम होंगे। वैश्विक तापमान पहले ही औद्योगिक युग (1850-1900) से पहले की तुलना में 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
विज्ञापन
जलवायु परिवर्तन
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने बताया है कि फरवरी 2024 रिकॉर्ड गर्म रहा। एजेंसी ने कहा कि फरवरी 2024 में तापमान, औसत तापमान से 1.77 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। इससे पहले औद्योगिक युग से पहले इतना तापमान फरवरी में दर्ज किया गया था। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने कहा कि पिछले साल जून से हर महीना गर्मी के मामले में रिकॉर्ड गर्म रहा है।
अल नीनो इफेक्ट के चलते बढ़ी गर्मी
एजेंसी ने कहा कि अल नीनो इफेक्ट के चलते प्रशांत महासागर की सतह का पानी गर्म हो रहा है, जिसकी वजह से गर्मी बढ़ रही है। साथ ही मानव जनित कारणों से भी जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इससे पहले जनवरी में भी तापमान औसत तापमान की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा था। एजेंसी ने कहा कि दुनियाभर के देशों को कोशिश करनी चाहिए कि वैश्विक औसत तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न बढ़े वरना इसके गंभीर परिणाम होंगे। वैश्विक तापमान पहले ही औद्योगिक युग (1850-1900) से पहले की तुलना में 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
इस साल ज्यादा बारिश का अनुमान
कॉपरनिकस एजेंसी ने बताया कि गर्मी बढ़ने की वजह से दुनियाभर में बाढ़, जंगलों की आग, सूखा आदि की घटनाएं बढ़ी हैं। वैश्विक तापमान बीते एक साल में (मार्च 2023-फरवरी 2024) 1991-2020 के समय की तुलना में 0.68 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है, वहीं 1850-1900 की तुलना में 1.56 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। वैश्विक मौसम संगठन ने मंगलवार को बताया कि 2023-24 में अल नीनो इफेक्ट सबसे मजबूत रहा। हालांकि फिलहाल यह कमजोर पड़ रहा है, लेकिन अभी भी आने वाले कई महीनों तक इसका असर दिखेगा। मार्च से मई तक जमीनी सतह पर भी तापमान में बढ़ोतरी होगी। इस साल के अंत में ला नीना इफेक्ट बन सकता है, जिसकी वजह से इस साल अच्छी बारिश हो सकती है। ला नीना इफेक्ट के चलते इस साल हॉर्न ऑफ अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अफ्रीका में ज्यादा बारिश हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अल नीनो इफेक्ट के चलते बढ़ी गर्मी
एजेंसी ने कहा कि अल नीनो इफेक्ट के चलते प्रशांत महासागर की सतह का पानी गर्म हो रहा है, जिसकी वजह से गर्मी बढ़ रही है। साथ ही मानव जनित कारणों से भी जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इससे पहले जनवरी में भी तापमान औसत तापमान की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा था। एजेंसी ने कहा कि दुनियाभर के देशों को कोशिश करनी चाहिए कि वैश्विक औसत तापमान डेढ़ डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न बढ़े वरना इसके गंभीर परिणाम होंगे। वैश्विक तापमान पहले ही औद्योगिक युग (1850-1900) से पहले की तुलना में 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
विज्ञापन
इस साल ज्यादा बारिश का अनुमान
कॉपरनिकस एजेंसी ने बताया कि गर्मी बढ़ने की वजह से दुनियाभर में बाढ़, जंगलों की आग, सूखा आदि की घटनाएं बढ़ी हैं। वैश्विक तापमान बीते एक साल में (मार्च 2023-फरवरी 2024) 1991-2020 के समय की तुलना में 0.68 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है, वहीं 1850-1900 की तुलना में 1.56 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है। वैश्विक मौसम संगठन ने मंगलवार को बताया कि 2023-24 में अल नीनो इफेक्ट सबसे मजबूत रहा। हालांकि फिलहाल यह कमजोर पड़ रहा है, लेकिन अभी भी आने वाले कई महीनों तक इसका असर दिखेगा। मार्च से मई तक जमीनी सतह पर भी तापमान में बढ़ोतरी होगी। इस साल के अंत में ला नीना इफेक्ट बन सकता है, जिसकी वजह से इस साल अच्छी बारिश हो सकती है। ला नीना इफेक्ट के चलते इस साल हॉर्न ऑफ अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अफ्रीका में ज्यादा बारिश हो सकती है।
विज्ञापन