बढ़ती आबादी नहीं, उसमें गिरावट बड़ी चिंता, एलन मस्क और जेक मा ने पहली बार साझा किया मंच
- 2100 तक कुल विश्व आबादी में वार्षिक वृद्धि दर 0.1 फीसदी से कम होगी
- 1950 से अब तक विश्व जनसंख्या 1-2% की सालाना दर से बढ़ती रही है
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दुनिया में इलेक्ट्रिक कारों से क्रांति लाने वाले टेस्ला कंपनी के सीईओ व स्पेस-एक्स के संस्थापक एलन मस्क और मंगलवार को अलीबाबा के चेयरमैन का पद छोड़ने वाले कंपनी के संस्थापक जैक मा ने शंघाई में एक साथ मंच साझा किया। इस दौरान कई मुद्दों पर मतभेद के बावजूद दोनों में इस बात पर एकमत रहा कि भविष्य में दुनिया के सामने सबसे बड़ी समस्या बढ़ती आबादी नहीं बल्कि इसमें गिरावट होगी।
दुनिया के दो सफल उद्यमी जैक मा और एलन मस्क पहली बार सार्वजनिक मंच पर एक साथ देखे गए। मस्क ने कहा, ‘ज्यादातर लोगों को लगता है कि धरती पर बहुत सारे लोग हो गए हैं। लेकिन असल में यह एक पुराना नजरिया है।’
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले 20 सालों में ही जो सबसे बड़ी समस्या दुनिया के सामने होगी, वह आबादी का विस्फोट नहीं बल्कि जनसंख्या में भारी गिरावट की होगी।’ मस्क की इस बात से जैक मा पूरी तरह सहमत दिखाई दिए।
जैक मा ने कहा, ‘जनसंख्या की समस्या बहुत बड़ी होने वाली है। चीन में 1.4 अरब लोग, सुनने में ज्यादा लगते हैं लेकिन अगले 20 सालों में जनसंख्या कम होने से बहुत बड़ी परेशानियां खड़ी हो जाएंगी। जनसंख्या घटने की दर और तेज हो जाएगी। आप इस भारी गिरावट को पतन कहते हैं तो मैं इस पर आपसे सहमत हूं।’
सदी के अंत तक आबादी घटेगी
जैक मा और एलन मस्क की ये चिंताएं उन जनसंख्या विशेषज्ञों की भविष्यवाणियों से भी मेल खाती हैं जिनका तर्क है कि दुनिया में लोगों की आबादी का इस सदी के अंत तक बढ़ना बंद हो जाएगा। वे इसकी बड़ी वजह विश्व भर में गिरती प्रजनन दर को बताते हैं। फिलहाल दुनिया में सिर्फ अफ्रीका ही है जहां 21वीं सदी के शेष बचे वर्षों में अच्छी प्रजनन दर बरकरार रहने का अनुमान है।
आबादी में गिरावट चीन के लिए समस्या
जैक मा ने बताया कि चीन में जनसंख्या का गिरना बाकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा असर डालेगा। चीन के लिए यह एक बड़ा संकट इसलिए भी है क्योंकि पिछले चार दशकों में चीन के तेज आर्थिक विकासमें युवा आबादी का बड़ा हाथ रहा है। अब ये युवा बुढ़ापे की ओर बढ़ चुके हैं और कामगारों में बुजुर्गों की तादाद काफी बढ़ चुकी है। जबकि अब युवाओं की आबादी गिरने से एक बड़ी मानवीय त्रासदी पैदा हो सकती है। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं छह-सात साल ज्यादा जीती हैं। जनसंख्या में कमी के कारण वे और भी ज्यादा प्रभावित होंगी।