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कोरोना की बूटी लाए 'पिलोमैन', दोस्त की तरफदारी करने पर ट्रंप पर भड़के अमेरिकी
Sat, 22 Aug 2020 10:45 AM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 22 Aug 2020 10:45 AM IST
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माइकल लिंडेल-डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
- फोटो : Instagram
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दुनियाभर में कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवा और टीके की खोज की जा रही है। इसी बीच वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ऐसी दवा को बढ़ावा देना चाह रहे हैं जिसका न तो कोई वैज्ञानिक आधार है और न ही परीक्षण रिपोर्ट। इस दवा को ट्रंप के कट्टर समर्थक माइकल लिंडेल ने प्रस्तावित किया है।
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लिंडेल को अमेरिका में 'पिलोमैन' के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रपति ट्रंप खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) पर दबाव डाल रहे हैं कि लिंडेल द्वारा प्रस्तावित दवा को डाइट्री सप्लीमेंट (आहार पूरक) या कोरोना के इलाज के तौर पर अप्रूव किया जाए। हालांकि लिंडेल के पास इस बात के कोई सबूत नहीं है कि उनकी दवा कोरोना के इलाज में कारगर होगी या नहीं।
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इस दवा को ओलिएंडर (पीला कनेर) के पौधे से बनाया गया है। चुनावी काल में ट्रंप के इस दवा के समर्थन के बाद अमेरिका में जगह-जगह विरोध शुरू हो गया है। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि जुलाई में पिलोमैन लिंडेल और शहरी आवास विकास के सचिव बेन कार्सन के साथ ट्रंप की एक बैठक हुई थी। जिसमें उन्होंने ओलिएंड्रीन नाम की दवा से अवगत कराया था।
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लिंडेल ने सीएनएन को हाल में दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप ने बैठक के बाद कहा कि एफडीए को इस दवा को मंजूरी देनी चाहिए। ये कारगर है। इससे पहले एफडीए ने कोरोना के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी थी जबकि खुद ट्रंप इस दवा को लेते थे।
एफडीए ने एचसीक्यू दवा पर यह कहते हुए पाबंदी लगाई थी कि इससे दिल की बीमारियों का खतरा है। पिलोमैन की दवा का ट्रंप द्वारा समर्थन करने से व्हाइट हाउस के कई अधिकारियों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की जड़ी-बूटी को प्रोत्साहित करने की प्रवृत्ति अमेरिकियों के लिए खतरे का सबब बन सकती है।
फर्जी दावा करके लोगों से धोखाधड़ी कर चुके हैं पिलोमैन
माइकल लिंडेल तकिया बनाने वाली कंपनी माय पिलो के सीईओ हैं। उनपर फर्जी दावे करके ग्राहकों को लूटने के आरोप लगते रहे हैं। हाल ही में फर्जी दावे के एक मामले में उन्हें 7.5 करोड़ रुपये का हर्जाना देना पड़ा था। उन्होंने दावा किया था कि उनके तकिए का इस्तेमाल करने से माइग्रेन और सिरदर्द नहीं होता है।