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ट्रंप ने सत्ता छोड़ने से पहले चीन पर की ये बड़ी कार्रवाई, जानिए चीन को होगा कितना नुकसान

Thu, 03 Dec 2020 06:42 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Thu, 03 Dec 2020 06:42 PM IST
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Donald Trump keeps hammering China just weeks before Biden takes over
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता छोड़ने से पहले चीन के खिलाफ कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनकी वजह से चीन को आगे भारी नुकसान हो सकता है। चुनाव में हारने के चलते जल्द ही व्हाइट हाउस से विदाई लेंगे। अपने शासन में चीन के साथ टकराव रखने वाले राष्ट्रपति ट्रंप जाते-जाते भी ड्रैगन को कई जख्म देने की तैयारी में हैं। अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन के शपथ लेने और ट्रंप के व्हाइट हाउस से विदाई की तैयारी से पहले यह कार्रवाई की है।

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ट्रंप प्रसाशन ने बुधवार को ही चाइनीज कॉम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों के लिए ट्रैवल वीजा पर रोक लगा दी, तो सेना से संबंध रखने वाली कंपनी से कॉटन आयात को भी बंधुआ मंजदूरी का आरोप लगाकर बैन कर दिया।
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ट्रंप कर सकते हैं ये बड़ी कार्रवाई
इतना ही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप विदाई से पहले यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स से एक बिल पास करा सकते हैं, जिससे चाइनीज कंपनियों को अमेरिकी एक्सचेंज को बाहर निकाला जा सकता है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने से पहले बचे सात सप्ताह में ट्रंप चीन को और कैसे-कैसे जख्म देंगे। हांगकांग की स्वायत्तता को कम करने के आरोपी अधिकारियों और कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेताओं पर भी बैन लगाया जा सकता है।  
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यूनिवर्सिटी ऑफ चाइन के अमेरिकन स्टडीज सेंटर के डायरेक्टर और चाइनीज सरकार के सलाहकार रेनमिन कहते हैं कि ट्रंप की ओर से उठाए जा रहे कदम बाइडेन के लिए मुश्किलें बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि यह लगातार उकसावा है। बातचीत के लिए शुरुआती बिंदु बढ़ता रहता है। अमेरिकी पक्ष के लिए तनाव से पहले के दौर लौटने की संभावना कम है।

बाइडेन के बंधे हाथ

पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसी सप्ताह न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था कि चीन के खिलाफ बड़े कदमों से पहले वह अमेरिका के सहयोगियों से विचार-विमर्श लेंगे, जिसमें दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच जनवरी में फेज वन ट्रेड डील पर दोबारा काम करना शामिल है। ऐसे में ट्रंप के ये फैसले बाइडेन के लिए चीन को फायदा पहुंचाने वाली स्थिति के खिलाफ हाथ बांधने के रूप में देखे जा रहे हैं। 

ट्रंप के फैसलों से रिश्तों में आएगी और खटास
इस सप्ताह ट्रंप की ओर से उठाए गए कदम ट्रेड वॉर, जियोपॉलिटिकल कंप्टीशन और कोरोना महामारी की उत्पत्ति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की वजह से खराब चल रहे रिश्तों को और बिगाड़ सकते हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ ने नवंबर में कहा था कि चीन के खिलाफ अमेरिका की सख्ती खत्म नहीं हुई है। उन्होंने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी को 'मार्क्सवादी-लेनिनवादी राक्षस' बताते हुए क्रूर और मानवीय स्वतंत्रता के लिए खिलाफ होने का आरोप लगाया था। 

चीन के खिलाफ अमेरिकी अधिकारियों की ताकत बढ़ी

अमेरिकी संसद में बुधवार को उस कानून को पास किया गया, जिससे यूएस अधिकारियों को चाइनीज कंपनियों के फाइनेंशल ऑडिट्स को जांचने की अनुमति मिल जाएगी। साथ ही कंपनियों को यह खुलासा करने की आवश्यकता होगी कि वे चाइनीज सरकार के नियंत्रण में हैं या नहीं। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी ने यह भी कहा कि कस्टम अधिकारी चीनी सेना से जुड़ी कॉटन कंपनी के उत्पाद को लाने वाली जहाजों को जब्त कर लेंगे। यह कंपनी चीन की सबसे बड़ी कॉटन उत्पादक कंपनियों मं शामिल है।

नए वीजा नियमों के मुताबिक, कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य और उनके परिवार के लोगों को केवल सिंगल एंट्री वीजा दिया जाएगा, जोकि एक महीने तक ही वैध होगा। इससे पहले उन्हें मल्टीपल एंट्री विजिटर वीजा दिया जाता था और इसकी अवधि 10 साल तक होती थी। 

अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने ईमेल से भेजे एक बयान में कहा कि चाइना कम्युनिस्ट पार्टी और इसके सदस्य अमेरिका में प्रोपेगैंडा, आर्थिक दबाव और अन्य कुटिल हरकतों से अमेरिकी लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। दशकों तक हमने सीसीपी सदस्यों को अमेरिकी संस्थाओं और कारोबारों में मुक्त और बेरोकटोक पहुंच दिया, जबकि इस तरह की सुविधाएं अमेरिकी नागरिकों को चीन में नहीं दी गईं।


बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि उन्हें वीजा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं है। हालांकि, अमेरिका से उन्होंने रुख बदलने की अपील की। चुनयिंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन अमेरिकी पक्ष के साथ आपत्ति जाहिर करता है और हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिकी लोग चीन के प्रति आम तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाएंगे और सीसीपी के प्रति अपनी घृणा और असामान्य मानसिकता को छोड़ देंगे।

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